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Wednesday, March 25, 2026
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UP : मेरठ हत्याकांड में पुलिस से बड़ी चूक, क्या छूट जाएंगे सौरभ के हत्यारे मुस्कान और साहिल?

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मेरठ

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज सौरभ हत्याकांड में थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने क्राइम सीन यानी मुख्य आरोपी साहिल के मकान को सील नहीं किया, जिससे साक्ष्य नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है। इस गंभीर लापरवाही पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। अब यह जांच की जाएगी कि आखिर साहिल का कमरा क्यों नहीं सील किया गया और क्या इसके पीछे किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या मिलीभगत थी।

सीसीटीवी फुटेज जुटाने में नाकाम पुलिस
इस मामले में मास्टरमाइंड मुस्कान द्वारा कत्ल की साजिश रचने और हत्या के सामान खरीदने की सीसीटीवी फुटेज अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगी है। घटना को 15 दिन बीत चुके हैं, जिसके कारण ज्यादातर जगहों के सीसीटीवी बैकअप डिलीट हो चुके हैं। पुलिस टीम अब किसी एक्सपर्ट की मदद से फुटेज रिकवर करने की कोशिश कर रही है। मुस्कान ने खैरनगर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी थी, शारदा रोड से चाकू और सीमेंट लिया था, और जली कोठी से ड्रम खरीदा था। पुलिस ने इन जगहों पर जांच की, लेकिन वहां की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग नहीं मिल सकी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बेहोशी की दवा का नहीं मिला कोई प्रमाण
सौरभ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि उसके सीने में चाकू के तीन वार किए गए थे और गर्दन को बेरहमी से काट दिया गया था। इसके अलावा, दोनों हाथ कलाई से काटे गए थे। शव 15 दिन पुराना होने के कारण किसी भी बेहोशी की दवा के अंश नहीं मिले। रिपोर्ट के अनुसार, सौरभ को जहर नहीं दिया गया था, इसलिए बिसरा भी सुरक्षित नहीं रखा गया।

शिमला तक पहुंची जांच, क्राइम सीन को सील न करने पर सवाल
पुलिस टीम इस मामले की जांच को शिमला तक ले जा चुकी है, जहां कुछ अहम सुराग मिलने की संभावना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस ने साहिल के कमरे को सील क्यों नहीं किया। इस लापरवाही के पीछे किसका हाथ है, इसकी जांच एसएसपी के निर्देश पर शुरू कर दी गई है।

इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी के खिलाफ जांच
एसपी सिटी आयुष बिक्रम सिंह ने बताया कि शुरुआत में इस मामले की जांच एसएसआई ब्रह्मपुरी कर्मवीर सिंह को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी को दे दी गई थी लेकिन उनके द्वारा लापरवाही बरते जाने पर उनसे जांच वापस ले ली गई और उनके खिलाफ भी जांच बिठा दी गई है। अब पूरे मामले की निगरानी और चार्जशीट दाखिल करने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।

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