13.3 C
London
Sunday, March 22, 2026
Homeराष्ट्रीयचीतों को भारत में बसाने में आसानी से सफलता नहीं मिलने वाली,...

चीतों को भारत में बसाने में आसानी से सफलता नहीं मिलने वाली, ऐसा क्यों कह रहे एक्सपर्ट

Published on

नई दिल्ली

चीते भारत में आ गए हैं। हमने तस्वीरें देखीं और उनकी आवाज भी सुनी। अब सरकार और देश को उम्मीद है कि भारत में फिर से चीतों की आबादी बढ़ेगी। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। जी हां, चीता एक्सपर्ट डॉ. लॉरी मार्कर का कहना है कि चीतों को फिर से भारत में बसाने जैसे प्रोजेक्ट में तुरंत और आसानी से सफलता नहीं मिल सकती है। ‘चीता कंजर्वेशन फंड’ (CCF) की संस्थापक ने कहा कि देश में सात दशक बाद चीतों की पहली पीढ़ी के पूरे जीवनकाल पर नजर रखनी पड़ सकती है। सीसीएफ ने देश में चीतों को फिर से बसाने में भारतीय अधिकारियों के साथ करीबी सहयोग किया है। मार्कर 2009 से कई बार स्थिति के आकलन और योजनाओं का मसौदा तैयार करने के लिए भारत आ चुकी हैं।

अमेरिकी जीव विज्ञानी एवं शोधार्थी मार्कर ने कहा कि जीवों की किसी प्रजाति की आबादी उसकी प्राकृतिक मृत्यु दर के साथ बढ़ाने में वक्त लगता है। उन्होंने कहा, ‘हम संभवत: 20 साल या उसे अधिक समय में सफलता मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।’ संरक्षणवादियों द्वारा इस परियोजना की सफलता के मापदंडों के बारे में पूछे जाने पर मार्कर ने कहा, ‘हम इन जंतुओं के अनुकूल हालात, शिकार करने और प्रजनन पर गौर कर रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि मृत्यु दर से ज्यादा प्रजनन दर होगा। इनकी आबादी अधिक होनी चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘हम इन जीवों को कहीं और ले जाने के लिए अन्य प्राकृतिक निवास की भी तलाश करेंगे, जो ‘मेटापॉपुलेशन’ होंगे। यह एक बहुत लंबी और जटिल प्रक्रिया है।’ ‘मेटापॉपुलेशन’ ऐसी आबादी होती है जिसमें एक ही प्रजाति के जंतुओं को स्थानिक रूप से बांट दिया जाता है और कुछ स्तर पर इनका आपसी संपर्क होता है।मार्कर ने कहा कि वह चाहती हैं कि भारत और दुनियाभर के लोगों को यह पता चले कि ऐसी परियोजनाओं में कामयाबी आसानी से नहीं मिलती और इसमें काफी वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि चीतों पर उनके पूरे जीवनकाल नजर रखी जाए। उन्होंने कहा, ‘हम आमतौर पर फिर से बसाए जा रहे जंतुओं की पहली पीढ़ी के लिए ऐसा करते हैं ताकि उनके बारे में सबकुछ जाना जाए। हम कुछ समय तक उनके शरीर पर जीपीएस उपकरण लगाकर उन पर नजर रखेंगे और अगर अनुमति दी गई तो हम फिर से उन पर GPS लगाएंगे।’

वन्य जीवों के शरीर पर जीपीएस उपकरण इसलिए लगाया जाता है जिससे वैज्ञानिक उनकी गतिविधियों और उनके स्वास्थ्य पर नजर रख सकें।चीता विशेषज्ञ ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि वे उद्यान छोड़कर नहीं जाएंगे। उनके अपने निवास स्थान में रहना इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन्हें कितना शिकार मिलता है और कूनो में इसकी कमी नहीं है।’

चीतों के तेंदुए से संघर्ष की संभावना पर मार्कर ने कहा कि दोनों प्रजातियां नामीबिया में साथ-साथ रहती हैं और इनमें से कई चीते ऐसे इलाकों से आते हैं, जहां शेर भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सीसीएफ दल जरूरत के अनुसार भारत में रहेगा। भारत में चीतों को विलुप्त घोषित किए जाने के सात दशक बाद उन्हें देश में फिर से बसाने की परियोजना के तहत नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को 17 सितंबर को भारत में उनके नए घर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।

Latest articles

असम में भाजपा की ताकत का प्रदर्शन, भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भरी हुंकार

विधानसभा चुनाव में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार...

भोपाल सहित प्रदेशभर में मनाई गई ईद-उल-फितर, मस्जिदों में अदा हुई नमाज

भोपाल: पवित्र महीने Ramadan के 30 रोजे पूरे होने के बाद शनिवार को Eid al-Fitr...

ईरान-अमेरिका टकराव: दोनों देशों ने जताया जीत का दावा, बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump और ईरान के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी ने दुनिया की चिंता...

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा का पूजन, हनुमान चालीसा एवं श्री गुरु गीता का सामूहिक पाठ आयोजित

भोपाल। रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम...

More like this

ईरान-अमेरिका टकराव: दोनों देशों ने जताया जीत का दावा, बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump और ईरान के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी ने दुनिया की चिंता...

ट्रंप की दहाड़: ‘ईरान के साथ कोई सीजफायर नहीं!’ चीन और जापान को लेकर कह दी इतनी बड़ी बात कि मच गई खलबली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ताजा बयान इस वक्त पूरी दुनिया में चर्चा...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...