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Friday, March 20, 2026
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‘भारत की सरहद में चीन घुस आया लेकिन संसद में चर्चा तक नहीं हुई?’, कांग्रेस सांसद ने केंद्र से पूछा सवाल

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मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज लोकसभा में बहस की शुरुआत हो चुकी है. इस बहस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हिस्सा लेने वाले हैं. आज शुरू हुई बहस 10 अगस्त तक चलेगी. पीएम मोदी इस पर चर्चा करेंगे.केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज से लोकसभा में चर्चा शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने इस प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत की है. इस चर्चा में राहुल गांधी भी शामिल होने वाले हैं. तीन दिनों तक 18 घंटे संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी. इसके बाद 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चर्चा का जवाब देंगे.

चीनी घुसपैठ पर आज तक चर्चा क्यों नहीं हुई?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि मणिपुर के साथ म्यांमार की सरहद लगती है. म्यांमार की जो जुंटा है उसके रिश्ते चीन से जगजाहिर हैं. इसलिए मणिपुर में जो भी अस्थिरता होती है तो उसका असर देश में ही नहीं पड़ता है उसका असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है. इसी संदर्भ में मैं चीन का भी जिक्र करता हूं. वर्ष 2020 अप्रैल में नियंत्रण रेखा के पार भारत की सरहद में घुसपैठ हुई. घुसपैठ एक जगह पर नहीं हुई, घुसपैठ 8 जगह पर हुई. कांग्रेस नेता ने कहा, मैं सरकार से ये पूछना चाहता हूं कि आज 37 महीने हो गए उस घुसपैठ को जारी हुए, क्या सरकार इस घुसपैठ पर ये सुनिश्चित कर पाई है कि इस घुसपैठ के पीछे चीन की राजनीतिक मंशा क्या है. आज तक इस सदन में चीन पर चर्चा नहीं हुई. क्या ऐसी थियेटर लेवल की घुसपैठ हो और हमारी खुफिया तंत्र को पता न लगे. कांग्रेस सांसद ने पूछा कि चीन के साथ 18 राउंड की बातचीत का क्या हल निकला?

संविधान के ढांचे में बदलाव से पड़ता है पूरे क्षेत्र पर असर
पंजाब के आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संसद में केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा, ये अविश्वास प्रस्ताव मणिपुर को केंद्रित करते हुए सदन में रखा गया है. उन्होंने कहा कि जब गणराज्य की रचना हो रही थी. तब सरहद के राज्यों के लिए अलग प्रावधान किए गए थे. लेकिन जब उत्तर पूर्व के किसी राज्य पर में कोई हिंसा होती है तो इसका असर सिर्फ उस राज्य पर नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर पर उसका असर पड़ता है. कांग्रेस सांसद ने कहा कि 4 वर्ष पहले जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किया गया, लेकिन अब तक उस राज्य में चुनाव नहीं हुए हैं. सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि जब आप संविधान के ढांचे में बदलाव करते हैं तो उसका असर कहां पड़ता है.

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