नई दिल्ली:
कांग्रेस पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमेन पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बड़े दावे किए हैं. उन्होंने कहा, “इस देश में शतरंज का खेल चल रहा है लेकिन खिलाड़ी कौन है, इस पर हम निर्णायक तौर पर पहुंचे नही हैं. अलग-अलग मोहरे हैं. उनमें से एक मोहरे के विषय पर बात करने हम हैं, जिनका नाम है माधबी पुरी बुच.”
पवन खेड़ा ने आगे कहा, “माधबी पुरी बुच, SEBI की मेंबर थीं, उसके बाद 2 मार्च 2022 को चेयरपर्सन बनीं. सेबी शेयर मार्केट की रेगुलेटर है और इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री और गृहमंत्री करते हैं. ” पवन खेड़ा ने दावा किया कि SEBI चीफ साथ तीन जगहों से सैलरी ले रही थीं. वो ICICI बैंक, ICICI प्रुडेंशियल और SEBI से एक साथ सैलरी ले रही थीं.
‘माधबी पुरी बुच को इस्तीफा देना चाहिए’
पवन खेड़ा ने कहा, “2017 से 2024 के बीच में करोड़ों की रेगुलर इनकम ICICI बैंक ले रही थीं और ईशॉप पर जो टीडीएस था, वो भी यही बैंक दे रहा था. यह सीधे-सीधे SEBI के सेक्शन-54 का उल्लंघन है. इसलिए अगर माधबी पुरी बुच में थोड़ी भी शर्म होगी तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.”
‘2017 और 2024 के बीच ICICI बैंक से 16.8 करोड़…’
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सवाल खड़ा करते हुए कहा, “भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), शेयर बाजार को विनियमित करने में अहम भूमिका निभाता है, जहां हम सभी अपना पैसा निवेश करते हैं. लेकिन सेबी अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है? यह कैबिनेट की नियुक्ति समिति है, जिसमें प्रधान मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं. इस समिति के दो सदस्य सेबी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के संबंध में, यह ध्यान दिया गया कि उन्हें 2017 और 2024 के बीच ICICI बैंक से 16.8 करोड़ रुपये की नियमित आय प्राप्त हुई. अगर आप पूर्णकालिक सेबी सदस्य हैं, तो आप ICICI बैंक से वेतन क्यों प्राप्त कर रहे थे.पवन खेड़ा ने कहा कि वे ESOP और ESOP का TDS भी ICICI बैंक से ले रही थीं. इसलिए हम जानना चाहते हैं कि आप SEBI की पूर्णकालिक सदस्य होने के बाद भी अपना वेतन ICICI से क्यों ले रही थीं?
पीएम मोदी से पवन खेड़ा ने पूछे ये सवाल
- जब SEBI के हेड चुनते हैं, तो इसका क्राइटेरिया क्या होता है?
- क्या नियुक्ति के वक्त ACC के सामने ये तथ्य आए थे या नहीं. और नहीं आए थे तो कैसी सरकार चला रहे हैं?
- क्या प्रधानमंत्री को यह जानकारी थी कि सेबी की चेयरपर्सन एक ऑफिस ऑफ प्रॉफिट पर बैठी हैं और सेबी की मेंबर के साथ ICICI से तनख्वाह ले रही हैं?
- क्या पीएम को मालूम है कि सेबी की चेयरपर्सन ICICI के कई मामलों पर फैसले ले रही हैं?
- सेबी की चेयरपर्सन के बारे में इतने तथ्य हैं फिर भी उनको कौन बचा रहा है?
‘शतरंज के खिलाड़ी कौन?’
पवन खेड़ा ने आगे कहा, ‘इस दौरान ICICI के कई केस सेबी का हाथ में हैं और सेबी उस पर फैसला दे रहा है. इस शतरंज के खिलाड़ी कौन हैं, जिनको ये भी नहीं डर है कि कभी भी खुलासे हो सकते हैं.आपका नया इंडिया है, तो ये भी नई कांग्रेस है, बहुत खुलासे करती है.बता दें कि पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए इस बात का ऐलान किया था कि आज सुबह 11:30 बजे, बड़ा खुलासा किया जाएगा.
हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया था नाम
पिछले महीने अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने सेबी प्रमुख माधबी पुरी और उनके पति धवल बुच पर कथित अडानी घोटाले के कनेक्शन का आरोप लगाया था। हिंडनबर्ग रिसर्च ने डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए कहा था कि बुच और उनके पति के पास एक ऐसे ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी थी जिसमें गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी द्वारा बड़ी मात्रा में पैसा निवेश किया गया था।
सेबी चीफ ने आरोप नकारे
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सेबी प्रमुख और उनके पति ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर हिंडनबर्ग के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं। इनमें तनिक भी सच्चाई नहीं है। हमारा जीवन और वित्तीय स्थिति एक खुली किताब की तरह है।
पिछले साल अडानी ग्रुप पर लगाए थे आरोप
पिछले साल जनवरी में हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इस रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। अडानी को 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था। बता दें कि हाल ही में सेबी ने हिंडनबर्ग को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि फर्म ने गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल करके रिपोर्ट से लाभ उठाने उठाने की कोशिश की। इसके लिए हिंडनबर्ग ने अमेरिकी हेज फंड के साथ मिलीभगत की।
