नई दिल्ली
अदालत ने कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां और ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ के संस्थापक खालिद सैफ समेत 13 के खिलाफ दिल्ली दंगे के मामले में आरोप तय करने का शुक्रवार को आदेश दिया। इनमें हत्या की कोशिश और गैरकानूनी रूप से जमा होने से संबंधित आरोप भी शामिल हैं। इन सभी को अदालत ने हालांकि, आपराधिक साजिश, उकसावे और समान मंशा के अपराध और आर्म्स एक्ट के आरोपों से मुक्त कर दिया है।
स्पेशल जज अमिताभ राव ने आदेश में कहा कि प्रथम द्ष्टया यह मानने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि आरोपियों ने आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148, 186, 188, 332 और धारा 353 के तहत अपराध किया। ये सभी आरोपी व्यक्ति 307 और 149 के तहत अपराध के लिए मुकदमे का सामना करने के लिए उत्तरदायी हैं। आदेश में आरोपियों के लिए राहत की बात यह रही कि उन्हें समान मंशा, आपराधिक साजिश और उकसावे के अपराध से आरोपमुक्त कर दिया गया है।आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत अपराधों से भी उन्हें आजादी मिली है।
मस्जिद वाली गली से जुडा है मामला
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मौजूदा मामला नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के खुरेजी खास इलाके में मस्जिद वाली गली में दंगे से जुड़ा है। अदालत ने आदेश में जिक्र किया कि चश्मदीदों और पीड़ित हेड कॉन्स्टेबल योगराज (इलाके के बीट कॉन्स्टेबल) ने घटना के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए दिए बयान में खासतौर से सभी 13 आरोपियों का नाम लिया था। पुलिस अधिकारी ने सभी आरोपयों की साफ-साफ पहचान की थी जो हथियारों से लैस होकर गैरकानूनी रूप से जमा हुए। इशरत जहां और खालिद सैफी के उकसाने पर पुलिस पर पथराव किया, जबकि भीड़ में शामिल एक नाबालिग ने हेड कॉन्स्टेबल पर गोली चलायी थी।
क्या था मामला
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों के लिए मुख्य साजिशकर्ता के रूप में भूमिका निभाने के आरोप में इशरत जहां और कई अन्य लोगों के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
