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देहरादून : सेल्फी पुल बना ‘मौत का कुआं’, स्कूटी समेत नदी में गिरे युवक ने रोते हुए बयां किया खौफनाक मंजर

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दिल्ली/देहरादून

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से कुछ दूर पानी में डूबे जंगल से रोते हुए निकल रहे युवक के चेहरे पर तैर रहा खौफ बता रहा था शुक्रवार की रात उस पर कहर बनकर गुजरी है। गांववाले जब पास पहुंचे, तो उसने सिसकते हुए जो बताया वह रोंगटे खड़े करने वाला था। जन्माष्टमी की रात जब चारों तरफ जश्न था, तब करीब 12 बजे वह अपने भाई के साथ स्कूटी से घर लौट रहा था। देहरादून से कुछ आगे रायपुर और थानो के बीच जो पुल हर दिन सैकड़ों लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट बनता है, वह घुप अंधेरी रात में ‘मौत के कुएं’ में बदल चुका था। उत्तराखंड समेत पूरे पहाड़ी राज्यों में हो रही डराने वाली बारिश में सौंग नदी पर बना यह पुल भी किनारे से बह गया था। दोनों रोज की तरफ पुल से गुजरे और इससे पहले कि कुछ समझ पाते स्कूटी समेत उफनती सौंग नदी में समा गए थे। जैसे-तैसे एक युवक सुबह चमत्कारिक रूप से बाहर निकल आया और डरावनी रात की पूरी आपबीती सामने रखी। दूसरा युवक, जिसे वह अपना भाई बता रहा था, उसकी कोई खबर नहीं है।

‘देहरादून का सेल्फीवाला पुल अब मौत का कुआं’
उत्तराखंड के साथ ही जम्मू कश्मीर और हिमाचल में घनघोर बारिश हो रही है। उफनती नदियों और नदी में समाते पुलों के मंजर डरा रहे हैं। 2013 में उत्तराखंड में कुदरत के कहर की तस्वीरें ताजा हो रही हैं। देहरादून में बारिश ने काफी तबाही मचाई है। मालदेवता इलाके में नदी किनारे बने कई रेस्टोरेंटों और मकानों में पानी भर गया है। अंधेरी रात में कई पुल-पुलिया भी बह गए हैं। देहरादून में सौंग नदी में समाया यह पुल भी इनमें से एक है। अपने खूबसूरत नजारे के लिए सैलानियों और स्थानीय लोगों के बीच यह बहुत लोकप्रिय था। वीकेंड पर स्थानीय लोग इस पुल पर सेल्फी के लिए आते। अगर कोई अनजबी भी यहां से गुजरता तो रुके बिना नहीं रहता। लेकिन यह पुल अब मौत का कुआं बन चुका है।

अगर सौंग नदी पर बना यह पुल दिन में टूटता, तो कई लोग इसकी जद में आ सकते थे। देहरादून को जौली ग्रांट एयरपोर्ट से जोड़ने वाला यह वैकल्पिक रास्ता है और स्थानीय लोगों के साथ चारधाम यात्रा पर निकलने वाले टूरिस्ट इससे गुजरते हैं। इसके साथ ही इस पर अक्सर वीवीआईपी मूवमेंट भी रहता है।

‘मैं वहां गया तो नजारा खौफनाक था’
देहरादून के इस सबसे खूबसूरत पुल पर अब मौत का सन्नाटा किस कदर पसरा है, वह खबर मिलने के बाद शनिवार अलसुबह मौके पर गए गांव बड़ासी के आनंद मनवाल बताते हैं। उन्होंने बताया कि पुल का करीब 30 से 40 मीटर का हिस्सा बह गया है। नजारा बेहद खौफनाक है। उन्होंने रात को हुए हादसे के बारे में बताया कि दोनों युवक ड्यूटी के बाद सौड़ा सरोली के कृष्णा विहार स्थित अपने घर लौट रहे थे। अंधेरे में पुल का टूटा हिस्सा उन्हें दिखाई नहीं दिया और वे उसमें समा गए। आनंद के मुताबिक सौंग नदी से सटे गांवों में काफी तबाही हुई है। कुमाल्डा में कई मवेशियों और कुछ मकान के भी बहने की खबर है।

आखिर उत्तराखंड में ये पुल बह क्यों रहे हैं?
पिछले साल देहरादून और ऋषिकेश के बीच रानीपोखरी का जाखन नदी का पुल भी नदी में समा गया था। तब आधे पुल पर लटकी गाड़ियों के वीडियो काफी वायरल हुए थे। इसके साथ ही अवैध खनन को लेकर और पुल की जांच न होने को लेकर भी सवाल उठे थे। सौंग नदी पर बने इस पुलिस के लिए क्या बारिश ही जिम्मेदार है, इस बात से भी लोग सहमत नजर नहीं आते। वे इसके लिए नदियों मे अवैध खनन कोसते हैं। आनंद मनवाल भी दुखी मन से कहते हैं कि पिछले साल रानीपोखरी का पुल बहां, इस साल सौंग नदी का पुल का नंबर लग गया। ललिल बराकोटी लिखते हैं कि अवैध खनन और पीडब्लूडी की लापरवाही की भेंट सौंग नदी का यह पुल चढ़ गया है। पिछले सालों ही रायपुर-थानो मार्ग को जोड़ने वाले नए पुल का हिस्सा भी धसक गया था, जिसको लेकर काफी बवाल मचा था। देहरादून-ऋषिकेश रोड पर लच्छीवाला में नए बने पुल का भी एक हिस्सा टूट गया था।

अब टोल वाली सड़क से गुजरना पड़ेगा
रायपुर में सौंग नदी पुल का बहना टोल बचाने वालों के लिए भी झटका है। देहरादून और ऋषिकेश के बीच हाइवे से गुजरने वाले वाहनों से लच्छीवाला में टोल लिया जाता है। ऋषिकेश, टिहरी और दूसरे पहाड़ी जिलों में जाने वाले लोग इस टोल से बचने के लिए रायपुर-थानों रोड का इस्तेमाल किया करते थे। अब इस पुल के टूटने से देहरादून और ऋषिकेश जाने का अब एक ही रास्ता बचा है। ऐसे में स्थानीय लोगों को छोड़कर बाकी सभी को टोल देकर ही आगे बढ़ना होगा।

रानीपोखरी में जाखन नदी वाले पुल का हाल
जौलीग्रांट एयरपोर्ट से कुछ आगे जाखन नदी भी पूरे उफान पर है। पिछले साल पुराने पुल के बह जाने के बाद जो कच्ची सड़क बनाई गई थी, उसके आधे से हिस्से का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। राहत की बात यह है कि नया पुल बनकर तैयार है। इस वजह से इस बार यह इलाका ऋषिकेश से कटा नहीं है। पिछली बार पुल टूटने से लोगों को काफी समय तक नेपाली फॉर्म से होकर ऋषिकेश जाना पड़ा था।

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