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Wednesday, March 25, 2026
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क्या भारत के खिलाफ जानबूझकर बवाल नहीं रोकता ब्रिटेन? पाक प्रेम तो वजह नहीं!

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नई दिल्‍ली

हिंदू- मुस्लिम विवाद अब ब्रिटेन तक पहुंच गया है। ताजा हिंसा की जड़ें भारत और पाकिस्‍तान के बीच हुए एशिया कप मैच से जुड़ी हैं। तब से पूर्वी ब्रिटेन के लीसेस्‍टर में दोनों समुदायों में तनाव है। यहां तक एक धर्मस्‍थल में तोड़फोड़ और हिंदू धर्म प्रतीकों का अपमान करने की बात भी सामने आई है। 28 अगस्‍त को एशिया कप मैच में भारत से पाकिस्‍तान हार गया था। इसी के बाद से हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। छह सितंबर को शहर में पाकिस्‍तानी मुसलमानों ने हिंदुओं को निशाना बनाया था। तब से यह सिलसिला जारी है। यह और बात है कि भारत के खिलाफ इतना बवाल होने के बावजूद ब्रिटेन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। जो वीडियो वायरल हुए हैं उनमें देखा जा सकता है कि हंगामा पुलिस की मौजूदगी में हो रहा है। हालांकि, इन्‍हें रोकने के लिए वह कुछ खास नहीं कर रही है। लीसेस्‍टर में भारतीय समुदाय के खिलाफ अभद्रता की भारत ने कड़ी निंदा की है। आखिर ब्रिटेन चुप क्‍यों है?

लंदन में भारतीय दूतावास ने लीसेस्‍टर में भारतीयों के खिलाफ हुई हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उसने कहा है कि शहर में हिंदू प्रतीकों और धर्मस्‍थल में तोड़फोड़ निंदनीय है। उसने ब्रिटेन के प्राधिकरणों के सामने यह मामला उठाया है। इसमें इन हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है। भारतीयों को सुरक्षा देने का मुद्दा भी उठाया गया है।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्‍बल ने भी इस पूरे मामले पर अपना नजरिया रखा है। उन्‍होंने कहा है कि यह अभद्रता पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई है। स्थानीय पुलिस के बयान टालमटोल करते नजर आते हैं। उन्‍होंने भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया पर खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि ब्रिटेन के अधिकारी भारत के खिलाफ प्रदर्शनों को बर्दाश्त करते हैं। यह उसी का नतीजा है।

ब्रिटेन में भारत के खिलाफ प्रदर्शनों को छूट!
ब्रिटेन में भारत के खिलाफ प्रदर्शनों की खबरें पहले भी आती रही हैं। कश्‍मीर के मुद्दे पर आए दिन ब्रिटेन में प्रदर्शन होते हैं। खालिस्‍तान के समर्थन में भी भारत के खिलाफ प्रदर्शनों की अनुमति दी जाती रही है। पिछले साल लंदन में भारतीय उच्‍चायोग के सामने कश्‍मीर मुद्दे पर पाकिस्‍तानियों ने ब्‍लैक डे का आह्वान किया था। यह भले फ्लॉप शो साबित हुआ था। लेकिन, ब्रिटेन सरकार ने इसे रोकने के प्रयास नहीं किए थे। इसी तरह खालिस्‍तान के समर्थन में प्रदर्शनों को भी रोका नहीं गया था। देखने में आया है कि ऐसे प्रदर्शनों को लेकर ब्रिटेन का रवैया ढुलमुल रहा है। पिछले महीने की ही बात है। जब 15 अगस्‍त के दिन भारत ने अपनी आजादी का जश्‍न मनाया था। तब पूरे ब्रिटेन में अलग-अलग जगहों पर कश्‍मीर की आजादी और खालिस्‍तान की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान भारत विरोधी नारे लगे थे। कश्‍मीर में मानवाधिकार उल्‍लंघन के आरोप लगाए गए थे।

ब्रिटेन भारत से तमाम मुद्दों पर सहयोग तो चाहता है। लेकिन, अपनी बारी आने पर वह ऐसा करते हुए नजर नहीं आता है। उसकी संसद में भी कश्‍मीर का मुद्दा उठता रहा है। कई सांसद इसे लेकर पाकिस्‍तान के साथ हमदर्दी जताते रहे हैं। तब ब्रिटेन भूल जाता है कि यही वह पाकिस्‍तान है जिसने सालों साल उसकी और अमेरिका की आंखों में धूल झोंकी है।

लीसेस्‍टर में कैसे शुरू हुई हिंसा?
28 अगस्‍त को एशिया कप मैच में भारत ने पाकिस्‍तान को हराया था। जब भारतीय समुदाय इसका जश्‍न मना रहा था तब पाकिस्‍तानी मुस्लिमों की भीड़ ने इन पर हमला बोला था। लीसेस्‍टर में यह बवाल हुआ था। एक हफ्ते बाद 4 सितंबर से हिंदुओं पर सिलसिलेवार हमले होने लगे। पाकिस्‍तानियों ने हिंदुओं के प्रतीकों को भी निशाना बनाया है। इसके उलट मीडिया में हिंदुओं को आक्रामक दिखाने की कोशिश की जा रही है।

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