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SC का आदेश ताक पर, नूंह में DSP की हत्या…अरावली में कैसे चलता है खनन का पूरा गोरखधंधा

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नूह

19 जुलाई को पंचगांव में सामान्य दिनों की तरह ही सब चल रहा था। नूह जिले के 3800 लोगों के इस गांव में वह गुप्तचर के ठिकानों पर खड़ा था। उसे कुछ सूचना मिली, उसने अपने भाई मित्तर और चचेरे भाई इक्कर को उन्होंने पुलिस की चेतावनी दी लेकिन तब तक वे खनन के लिए गहरी पहाड़ियों के अंदर चले गए। अचानक एक सफेद रंग की, नीले रंग वाली बोलेरो गांव में जाती नजर आई। यह पुलिस की गाड़ी थी। उसमें डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई, उनका ड्राइवर और दो दूसरे पुलिसवाले थे। अरशद अपने डंपर पर पत्थर भरकर ला रहा था। रोके जाने पर डीएसपी को कुचलते हुए निकल गया। इस घटना ने एक बार फिर अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन से पर्दा हटाया।

2009 में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूह में खनन को अवैध बताया लेकिन नूह में कभी भी खनन नहीं रुका। सकरे बंदरगाहनुपा इलाका, युवाओं में बड़े स्तर पर बेरोजगारी है। उन्हें महज 200 रुपये में अवैध खनन के लिए हायर कर लिया जाता है। इन पहाड़ियों से अलवर के लिए एक गलियारा निकलता है। अवैध खनन करते डंपर यहां से आसानी से निकल जाते हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नूह के 434 गांव में से 20 गावों में अवैध खनन चलता है। इन 20 में 8 लगभग तवाड़ू डिविजन में आते हैं, जहां डीएमसपी की हत्या हुई।

आधी रात चलता खनन
स्थानीय लोगों की मानें तो यह अवैध खनन का धंधा आधी रात होता है। सुबह लगभग 4 बजे तक चलता है। इस काम में स्थानीय मजदूरों से लेकर राजस्थान के मजदूरों को लगाया जाता है। डीएसपी की हत्या मामले में गिरफ्तार हुए पंचगांव के अरशद समेत छह आरोपी हैं, इनमें से एक नाबालिग है। उसे पत्थरों से डंपर भरकर वापस लाने के लिए 300 रुपये मिलने थे। पचगांव देश के आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में से एक है। यहां पर खनन ही आय का एक साधन है।

लोकल कनेक्शन और आय
एक डंपर पत्थर 3000 से 6000 रुपये में बिकता है हालांकि कीमत पत्थर कितना है, इस पर भी निर्भर करता है। नाबालिक को 300 से 500 रुपये दिए जाते हैं। एक डंपर की ट्रिप पर लगभग 1500 रुपरये खर्च होते हैं। इससे स्थानीय युवाओं को आय होती है इसलिए वे मिलीभगत से खनन का साथ देते हैं। नूह में लोगों के पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है। पंचगांव के नाइक मोहम्मद ने कहा कि युवा क्या करें? सरकार अगर उन्हें नौकरियां दे तो अवैध खनन पर लगाम लग सकती है।

नूह में लगभग 70 से 80 क्रशिंग यूनिट्स हैं। यहां पर वास्तविक पत्थरों से ज्यादा कुचले हुए पत्थरों की डिमांड है। खनन डिपार्टमेंट इसके लिए ई रवाना स्लिप जारी करता है लेकिन इस स्लिप के इतर कई डंपर अवैध तरीके से कई ड्रिप करते हैं। सूत्रों की मानें तो इन अवैध डंपरों को बिना ई रावना के निकालने के लिए हाइवे पर तैनात पुलिस, होम गार्ड और दूसरे अधिकारी अडवांस में घूस लेते हैं।

क्रशर की डिमांड
पुलिस ने यहां पर स्थानीय लोगों को इंफॉर्मर बना रखा है। 157 ऐक्ट के तहत नूह में 254 डंपर और ट्रक सीज किए गए हैं। कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं लेकिन एक बार जेल से छूटने के बाद वही लोग फिर से अवैध खनन में लग जाते हैं। यहां पर पहाड़ियों के बीच इन अवैध खनन वालों को पकड़ना आसान नहीं। यहां से राजस्थान बॉर्डर लगभग 60 किलोमीटर दूर है। यहां से वे आसानी से भाग निकलते हैं। नूह एसपी वरुण सिंगला ने बताया कि उनके पास पर्याप्त फोर्स है लेकिन पहाड़ी रास्तों से राजस्थान की तरफ भाग जाने से अवैध खनन वालों को ट्रेस करना आसान नहीं। नूह में खनन माफियाओं का सिंडिकेट नहीं है लेकिन लोग व्यक्तिगत रूप से आजीविका के लिए खनन करते हैं।

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