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चुनाव आयोग को PM मोदी की कैम्पेनिंग पर रोक लगानी चाहिए, भैरोंसिंह शेखावत का जिक्र कर जानें ऐसा क्यों बोले गहलोत

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जयपुर

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव कैम्पेनिंग पर रोक लगा देनी चाहिए। शनिवार देर शाम को मुख्यमंत्री आवास पर मीडिया से रूबरू होते हुए गहलोत ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान कोई धार्मिक बातें नहीं कर सकता। यह कानून में है। ऐसे में इलेक्शन कमीशन को पीएम नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार पर रोक लगनी चाहिए। गहलोत ने भैंरोसिंह शेखावत के एक बयान का जिक्र भी किया। जब शेखावत ने गंगानगर और बाली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। गंगानगर से वे चुनाव हार गए थे और बाली से चुनाव जीते थे।

गहलोत ने कहा कि तब शेखावत ने राम मंदिर के मुद्दे को उठाते हुए प्रचार किया तो वामपंथी दल के एक नेता ने चुनाव आयोग को शिकायत की थी। चुनाव आयोग उनके खिलाफ एक्शन लेता लेकिन उस समय भैंरोसिंह शेखावत के समर्थकों ने शिकायतकर्ता को किसी तरह मैनेज कर लिया था, वरना उनकी विधानसभा सदस्यता खतरे में पड़ने वाली थी। कर्नाटक चुनाव में बजरंग दल से जुड़े मुद्दे पर बीजेपी की ओर से बजरंग बली से जोड़कर दुष्प्रचार किया जा रहा है।

पीएम मोदी की चुप्पी खतरनाक – अशोक गहलोत
कर्नाटक में एक बीजेपी प्रत्याशी के कथित ऑडियो वायरल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और उनके परिवार को जान से मारने दी जा रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि यह चुप्पी खतरनाक साबित हो सकती है। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को आगे आकर मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए। खरगे और उनके परिवार को जान से मारने वाले वायरल ऑडियो पर अपना पक्ष रखना चाहिए। या तो उसका समर्थन करें या फिर विरोध करें। धमकी वाले बयान पर कुछ तो कहना चाहिए बीजेपी के नेताओं को।

सांसद बृजभूषण पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही
दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रही महिला पहलवानों का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस सांसद पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों के साथ 32 एफआईआर दर्ज हो। उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। गहलोत ने कहा कि बृजभूषण पर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। जबकि राजस्थान में अनिवार्य एफआईआर सिस्टम लागू है। यहां कोई भी व्यक्ति किसी भी थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है। अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी परिवादी का मुकदमा दर्ज नहीं करता है तो उसके खिलाफ एक्शन होता है।

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