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माचिस नहीं दिया तो इंजीनियर के सिर पर बियर की बोतल और चाकू मारकर हत्या, India-New Zealand मैच के बीच लड़ाई

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आगरा

आईटी कंपनी में नौकरी करने वाले इंजीनियर की राह चलते शराबियों ने हत्या कर दी। इंजीनियर अपने दोस्तों के साथ मैदान खड़े होकर मोबाइल पर इंडिया न्यूजीलैंड का फाइनल क्रिकेट मैच देख रहा था। वहां शराब पी रहे युवकों ने इंजीनियर और उसके साथियों से सिगरेट जलाने के लिए माचिस मांगी। इस बात पर कुछ कहासुनी हो गई। शराबियों ने हमला कर दिया। एक युवक ने इंजीनियर के सिर पर बियर की बोतल मार दी तो दूसरे ने पेट में ताबड़तोड़ चाकूओं से हमला कर दिया। लहूलुहान करके हमलावर मौके से फरार हो गए। युवक की मौके पर ही मौत हो गई। दोस्तों ने पुलिस को सूचना दी।

आवास विकास कालोनी सेक्टर 7 निवासी सिद्यांत गोविंदम (24) ने दयालबाग से बीटेक किया था। वह एनसीआर की एक आईटी कंपनी में प्रोग्रामर था, उसकी नौकरी को लगे अभी एक महीना पूरा भी नहीं हुआ था। रविवार को वह अपने तीन दोस्त सिद्धार्थ, शशांक और शुभम गुप्ता के साथ शास्त्रीपुरम के मैदान में मोबाइल फोन पर आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी इंडिया न्यूजीलैंड का फाइनल मैच देख रहा था। इसी बीच वहां शराब पी रहे कुछ युवक उनके पास माचिस मांगने के लिए आए। इस पर युवक के साथ सिद्यांत के दोस्तों की कहासुनी हो गई। उसने अपने साथियों को बुला लिया और चारों पर हमला कर दिया, जिसमें सिद्यांत की मौत हो गई।

रंगबाजी में कर दी हत्या
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि हमलावर बाइक पर फरार हो गए। ये तीन लोग थे। सीसीटीवी खंगाले गए तो बाइक सवार दहतोरा की ओर भागते हुए नजर आए। फुटेज की आधार पर दो युवकों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में कुछ जानकारी हासिल हुई है। हमलावरों में से एक युवक सिद्यांत और उसके दोस्तों के पास आया था। उसने सिगरेट जलाने के लिए माचिस मांगी थी। सिद्यांत ने उसे भगा दिया था। इसी बात पर विवाद हुआ था।

एक गुट के लोगों ने चाकूओं से सिद्यांत की हत्या कर दी। हत्या रंगबाजी के चलते हुई। हमलावर अभिषेक, दिलीप और कन्हैंया तीनों बोदला के रहने वाले हैं। दिलीप और कन्हैंया को अरेस्ट कर दिया है। अभिषेक की तलाश की जा रही है।

बुझ गया घर का चिराग
सिद्यांत के पिता सिकंदरा फल मंडी में एक आढ़त पर एकाउटेंट की नौकरी करते हैं। कोविड में उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। सिद्यांत ही उनकी देखभाल करता था। बेटे की मौत पर पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बेटे का शव देख कर पिता कहने लगे कि अभी नौकरी को एक महीना नहीं हुआ है।

बेटा कहता था कि पहली सैलरी उनके हाथों में रखेगा। बेटे की बातें याद करके वे फफक-फफक कर रो रहे थे। रो-रोकर बहन की आंखें भी सूज आई थीं। सिद्यांत घर पर रहकर वर्क फ्रॉम होम पर काम कर रहा था। वह घर से 10 मिनट में लौटकर आने की बात कहकर गया था।

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