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दिल्ली वालों के ‘जुगाड़’ से सुप्रीम कोर्ट भी हैरान, बैन के बाद भी कहां से आ जाते हैं पटाखे?

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नई दिल्ली

दिल्ली में पटाखों पर एक बार फिर बैन जरूर लगा दिया गया है, लेकिन हर साल कई जगहों पर फिर भी पटाखे फोड़े जाते हैं। हर साल राजधानी में दिवाली के बाद वाले दिन धुएं की एक चादर आसमान में जरूर दिख जाती है। अब उसी ट्रेंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी परेशान है और उसकी तरफ से एक सुनवाई के दौरान ये सवाल दिल्ली पुलिस के सामने उठाया गया है। कोर्ट का तर्क है कि जब इतने सालों से पटाखों पर बैन लगाया जा रहा है तो लोगों के पास पटाखे पहुंच कैसे जाते हैं?

पुलिस से नाराज क्यों हो गया सुप्रीम कोर्ट?
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जब साल 2016 से लगातार पटाखों पर प्रतिबंध चल रहा है, तो दिल्ली में लोग पटाखे कहां से लेकर आ जाते हैं। दिल्ली पुलिस को दो टूक कहा गया है कि उन्हें उन सोर्स का पता लगाना चाहिए जहां से ये पटाखे लाए जा रहे हैं। इस बात पर नाराजगी भी जाहिर कर दी गई है कि पटाखे फोड़ने के बाद किसी पर एक्शन लेने का कोई मतलब नहीं। अगर फर्क लाना ही है तो पटाखे फोड़ने से पहले ही उन लोगों को पकड़ा जाए, उनसे पूछा जाए कि पटाखे कहां से लिए। इस तरह से पूरे नेटवर्क को कानून के शिकंजे में लाने पर जोर दिया गया है।

वैसे दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में ये जरूर कहा है कि उनकी तरफ से 2016 के बाद किसी को भी पटाखों का लाइसेंस नहीं दिया गया है। ये भी जानकारी दी गई है कि हर साल पटाखे जब्त किए जा रहे हैं। लेकिन कोर्ट इस लेट एक्शन से खुश नहीं है। उसकी नजर में जो काम काफी पहले होना चाहिए, उसमें इस तरह की देरी काफी नुकसान दे रही है। जानकारी के लिए बता दें कि इस समय दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन चल रहा है।

मनोज तिवारी की याचिका हो चुकी खारिज
इस बैन के खिलाफ बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने जरूर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उनकी तरफ से मांग हुई थी कि जब दूसरे राज्यों में ग्रीन क्रैकर्स को मंजूरी दी गई है, तो उसी तरह दिल्ली में भी वो विकल्प खुला रहना चाहिए। लेकिन बीजेपी नेता की दलील कोर्ट को ज्यादा नहीं इंप्रेस कर पाई। इसी वजह से कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर पटाखे फोड़ने हैं तो वहां जाएं जहां वो फोड़े जा रहे हों। ऐसे मुद्दों पर कोर्ट द्वारा सरकार के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

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