7 C
London
Wednesday, March 18, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीययूनेस्‍को तक ने कह दिया बच्‍चों के लिए जहर है 'मोबाइल', ये...

यूनेस्‍को तक ने कह दिया बच्‍चों के लिए जहर है ‘मोबाइल’, ये काम करने से सुरक्षित रहेंगे आपके बच्‍चे

Published on

यूनाइटेड नेशंस की साइंस और कल्‍चर एजेंसी यूनेस्‍को का कहना है कि स्‍कूल में बच्‍चों के स्‍मार्टफोन के इस्‍तेमाल पर बैन लगा देना चाहिए। यूएन का बयान है कि क्‍लासरूम में बच्‍चों का ध्‍यान भटकने और डिजीटल एजुकेशन को बढ़ावा देने के बजाय स्‍कूल में फेस टू फेस टीचिंग लर्निंग प्रोसेस पर ध्‍यान देना चाहिए।इससे यह मतलब निकलता है कि यूनेस्‍को स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों के लिए स्‍मार्टफोन के इस्‍तेमाल को सही नहीं मानता है। आगे जानिए इस मुद्दे स जुड़ी और भी कई जरूरी बातों और पहलुओं के बारे में।

हर बदलाव नहीं होता है अच्‍छा
यूनेस्‍को ने बच्‍चों की पढ़ाई में डिजीटल लर्निंग को लेकर पॉलिसी बनाने वालों को चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा जरूरी नहीं है कि हर बदलाव से फायदा हो या प्रगति मिले। अगर कोई चीज हो सकती है या उसे करना हमारे हाथ में है, तो ऐसा जरूरी नहीं है कि हम उसे करें ही। इसकी बजाय हमें वो चीजें करनी चाहिए जो हमें फायदा पहुंचाए। यूनेस्‍को ने पॉलिसी बनाने वालों से शिक्षा के सोशल पहलुओं पर फोकस करने की गुजारिश भी की।

हर बच्‍चे के हाथ में है मोबाइल
अंकुरा हॉस्‍पीटल द्वारा करवाए गए एक सर्व में 186 बच्‍चों को शामिल किया गया था। इनमें से 100 पर्सेंट बच्‍चे 3 से 5 साल, 6 से 10 साल और 11 से 15 साल के थे। इस सर्वे में पाया गया कि हर एज ग्रुप का बच्‍चा अपने स्‍क्रीन टाइम लिमिट से ज्‍यादा देर तक इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों का इस्‍तेमाल कर रहा था।

बच्‍चों में ज्‍यादा है स्‍क्रीम टाइम
इस सर्वे में खुलासा हुआ कि बच्‍चों का इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइस पर गेम खेलने और पढ़ने का समय ज्‍यादा है और यह पीडियाट्रिशियनों द्वारा बताई गई अवधि से अधिक है। 3 से 5 साल के 54 पर्सेंट बच्‍चे पढ़ाई करते समय इलेक्‍ट्रॉनिक डिवाइसों का इस्‍तेमाल करते हैं, 6 से 10 साल और 11 से 15 साल के 48 और 39 पर्सेंट बच्‍चे ऐसा करते हैं। डिवाइस पर लगातार आने वाली नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंटेंट ने बच्‍चों का पढ़ाई में मन लगाना मुश्किल कर दिया है। यह सर्वे पुणे के हॉस्‍पीटल द्वारा किया गया था।

इन देशों में बैन है स्‍मार्टफोन
कई देशों में स्‍कूलों में बच्‍चों के लिए स्‍मार्टफोन के इस्‍तेमाल पर पहले से ही बैन लगा रखा है। फ्रांस में पहले से ही एक ऐसी पॉलिसी 2018 में लागू कर दी गई थी और नीदरलैंड में भी साल 2024 में ऐसा निर्दश जारी किया जा सकता है।डच के एजुकेशन मिनिस्‍टर का बयान है कि ‘बच्‍चों को पढ़ाई पर ध्‍यान लगाने के मौके मिलने चाहिए जो स्‍मार्टफोन के चक्‍कर में कम हो जाते हैं। मोबाइल फोन से ध्‍यान भटकता है और हमें बच्‍चों को इससे बचाने पर ध्‍यान देना है। यूके की सरकार भी बच्‍चों को अनुशासन में लाने के लिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है।

पैरेंट्स को क्‍या करना चाहिए
सबसे पहले तो आप अपने बच्‍चे के स्‍क्रीन टाइम को लिमिट करें और उसे आउटडोर गेम्‍स खेलने के लिए प्रोत्‍साहित करें। बच्‍चे को फोन चलाने के लिए समय कम दें और उसे दूसरे कामों में व्‍यस्‍त रखने की कोशिश करें।

Latest articles

इंटक में  तौहीद सिद्दीकी को मिली अहम जिम्मेदारी

भोपाल मप्र नगरीय निकाय श्रमिक कर्मचारी संघ (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष अशोक गोस्वामी द्वारा संगठन...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी से की मुलाकात, राजस्थान में अक्षय ऊर्जा के विस्तार पर हुई चर्चा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर अब एनएमडीसी के बोर्ड में शामिल, भारत सरकार ने जारी किया आदेश,5 साल के लिए निदेशक (कार्मिक) के...

नई दिल्ली।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड  के अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान निदेशक (एचआर) कृष्ण...

महर्षि गौतम भवन में जुटेगा समाज, 19 मार्च को होगा भव्य समारोह

भोपाल राजधानी के महर्षि गौतम भवन में आगामी 19 मार्च 2026 को एक भव्य और...

More like this

कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में DBT प्रायोजित व्याख्यान श्रृंखला संपन्न: जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य पर हुई चर्चा

भोपाल। भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) के सहयोग से भोपाल के कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ...

ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मुजतबा खामेनेई

तेहरान। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को...