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एग्जिट पोल्स के नतीजों ने बढ़ा दी बीजेपी की टेंशन, महाराष्ट्र और झारखंड की चुनौती कैसे करेगी पार

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नई दिल्ली

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म होने के बाद एग्जिट पोल के नतीजों में बीजेपी के बड़ा झटका लगता दिख रहा है। एग्जिट पोल में कांग्रेस पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है। इसके साथ ही 10 साल हरियाणा में बीजेपी की सत्ता से विदाई हो सकती है। दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर में भी बीजेपी को निराशा ही हाथ लगी है। यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन को बढ़त मिलने की संभावना भी जताई गई है। कुछ एग्जिट पोल ने इस गठबंधन को बहुमत के करीब दिखाया है। वहीं, कई एग्जिट पोल खंडित जनादेश का पूर्वानुमान व्यक्त कर रहे हैं। इस तरह इन दो चुनावों ने बीजेपी की चुनौती को बढ़ा दिया है।

बीजेपी की बढ़ेगी टेंशन
दो राज्यों के एग्जिट पोल नतीजों ने निश्चित रूप से बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के लिए यह चुनाव दूसरा झटका है। इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि बीजेपी को पहले जैसा लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। हरियाणा में पार्टी सत्ता विरोधी लहर को थामने में असफल होती नजर आ रही है। इस वजह से पार्टी का हैट्रिक लगाने का सपना टूटता दिख रहा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का भी फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है।

नए सिरे से बनानी होगी रणनीति
पार्टी राज्य में सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए कई राज्यों में सीएम का चेहरा ही बदल देती है। हालांकि, इस चुनाव में बीजेपी को यह दांव कामयाब होता नहीं दिख रहा है। इसके अलावा पार्टी की तरफ से कई पुराने चेहरों का टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाया जाता है। इस बार पार्टी की यह रणनीति भी बेअसर साबित होती नजर आ रही है। इसके अलावा पार्टी चुनाव से पहले कलह को कंट्रोल करने में असफल रही है। ऐसे में पार्टी के लिए बागियों की चुनौती से निपटना भी काफी अहम है। वर्तमान में दो विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल से इतना तो तय है कि बीजेपी को अब अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।

महाराष्ट्र में एमवीए की चुनौती
महाराष्ट्र में पार्टी के सामने महाविकास अघाड़ी से मजबूती से निपटने की चुनौती है। पार्टी यहां शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ सरकार में हैं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने वाली पार्टी ने एनसीपी से अलग होकर आए शरद पवार के भतीजे अजित पवार को अपने खेमे में कर चुकी है। ऐसे में पार्टी को चुनाव के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दे को लेकर सावधानी बरतनी होगी। कहीं ऐसा ना हो कि पार्टी का मुद्दा उसके ऊपर ही भारी पड़ जाए। राज्य में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म होगा। ऐसे में बीजेपी के लिए समय के हिसाब से आगे बढ़ना होगा।

झारखंड में लगाना होगा जोर
झारखंड में बीजेपी जेएमएम को हटाकर सत्ता में आने के लिए जोर आजमाइश करेगी। पार्टी ने इस काम के लिए चंपाई सोरेन को अपने साथ मिलाया है। खास बात है कि बीजेपी बड़ी संख्या में चुनाव से पहले विरोधी दल के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करती है। इसके अलावा उन्हें टिकट भी देती है। ऐसे में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ ही वरिष्ठ नेताओं में असंतोष पनपने लगता है। हरियाणा में पार्टी को इस बार टिकट बंटवारों में बड़े पैमाने पर बगावत का सामना करना पड़ा था। ऐसे में पार्टी हरियाणा से सबक लेते हुए झारखंड में भी फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहेगी।

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