दिल्ली और पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) इस बार गुजरात में भी पूरा दमखम लगा रही है। ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल भी लगातार गुजरात के दौरे करके वहां पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटे हैं। लगातार 27 सालों से सरकार चला रही भाजपा के मुकाबले में खुद को कांग्रेस से आगे बता रही ‘आप’ ने हिमाचल पर फोकस कम कर दिया है। हालांकि, इस बीच दिल्ली में भी जल्द ‘दंगल’ के आसार बढ़ गए हैं। परिसीमन का काम पूरा होने के बाद चर्चा है कि गुजरात में विधानसभा चुनाव के आसपास ही दिल्ली में भी एमसीडी चुनाव कराए जा सकते हैं।
गुरुवार को दिल्ली में इसका ट्रेलर भी दिख गया। राजधानी के तेहखंड में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट का उद्घाटन करते हुए गृहमंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने एक तरीके से कैंपेन की शुरुआत भी कर दी। उन्होंने यहां केजरीवाल का नाम लेकर ‘आप’ पर जोरदार प्रहार किया। एमसीडी का फंड रोकने का आरोप लगाते हुए शाह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी घर-घर जाकर लोगों को इसके बारे में बताएगी। गृहमंत्री ने कहा कि केजरीवाल सरकार चाहती है कि दिल्ली ‘आप निर्भर’ हो जबकि भाजपा चाहती है कि राष्ट्रीय राजधानी आत्मनिर्भर हो। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने पूर्व के तीन नगर निकायों के साथ सौतेला व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल सरकार पर इन तीनों निकायों के 40 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं।
इधर शाह ने आरोप लगाए और उधर अरविंद केजरीवाल ने सिलसिलेवार ट्वीट्स के जरिए इनका जवाब भी दिया। ‘आप’ के कई प्रवक्ताओं ने भी एक के बाद एक कई पीसी करते हुए भाजपा पर पलटवार किया। शाह की ओर से दिल्ली को कूड़ा मुक्त किए जाने के वादे पर केजरीवाल ने कहा, ”15 साल से जो काम आप नहीं कर पाए, अब आपको तीन साल और चाहिए? जनता आप पर भरोसा क्यों करे? आप रहने दीजिए। आपसे नहीं होगा। अब हम दिल्ली को कूड़ा मुक्त करके दिखाएंगे।” एमसीडी के 40 हजार करोड़ रुपए बकाया रखने के आरोप पर मुख्यमंत्री ने कहा, ”केंद्र सरकार ने 15 साल में MCD को कितने पैसे दिये? दोनों जगह बीजेपी की सरकार थी? डबल इंजन? अपनी नाकामी के बहाने मत बनाइए। जनता को बताइए आपने 15 साल में क्या काम किया। मैं चैलेंज करता हूं कोई एक काम बता दीजिए।”
गढ़ या गुजरात, कहां फोकस करेंगे केजरीवाल?
गुजरात के साथ ही एमसीडी चुनाव कराए जाने की अटकलों के बीच राजनीतिक विश्लेषक इससे जुड़े तमाम सवालों के जवाब तलाशने में जुट गए हैं। पूछा जा रहा है कि यदि गुजरात के साथ दिल्ली में एमसीडी चुनाव कराया जाता है तो केजरीवाल की प्राथमिकता क्या होगी? ‘आप’ की जन्मस्थली दिल्ली में सेमीफाइनल पर ध्यान लगाएंगे या फिर गुजरात में अपने मिशन को तरजीह देंगे? पार्टी एक तरफ हर हाल में एमसीडी पर काबिज होना चाहती है तो दूसरी तरफ गुजरात में अच्छा प्रदर्शन ‘मिशन 2024’ के लिए बेहद अहम है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के मुकाबले ‘आप’ के पास भीड़ जुटाने लायक स्टार प्रचारकों का अभाव है और यही उनके लिए सबसे बड़ी मुश्किल है। यदि दोनों जगह साथ चुनाव होता है तो केजरीवाल के लिए गढ़ और गुजरात में एक साथ मेहनत करनी होगी। उनके साथ दिक्कत यह भी है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं तो स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन जेल में बंद हैं। ऐसे में सारा दारोमदार केजरीवाल पर ही है।

