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कोहली वाला दर्द झेल रहे हैं गांगुली, पिछले साल BCCI ने इसी तरह विराट से छीनी थी कप्तानी

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नई दिल्ली

बीसीसीआई ने सौरव गांगुली को दोबारा अध्यक्ष बनाने से इनकार कर दिया है। 1983 वर्ल्ड चैंपियन टीम के मेंबर रोजर बिन्नी भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अगले बॉस होंगे। सचिव जय शाह अपने पद पर बने रहेंगे। अक्टूबर 2019 में अध्यक्ष बने सौरव चाहते थे कि वह एक कार्यकाल और पूरा करे। मगर ऐसा हो न सका। बोर्ड की मीटिंग में उनका विरोध हुआ। कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। सौरव गांगुली अलग-थलग पड़ चुके हैं। दादा की इस वक्त इस चौराहे पर नजर आते हैं, जहां साल भर पहले विराट कोहली खड़े थे।

तब विराट को जबरदस्ती कप्तानी छोड़नी पड़ी थी
सौरव गांगुली के तीन साल के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद 2021 में हुआ। जब टीम इंडिया के कप्तान रहे विराट कोहली से उनकी अनबन की खबरें आने लगी। भारत का साउथ अफ्रीका का दौरा करना था। विराट कोहली की जगह अचानक कप्तानी रोहित शर्मा को सौंप दी गई। खबरों के मुताबिक टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ते समय कोहली ने वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी जारी रखने की इच्छा जताई थी, लेकिन बीसीसीआई चाहता था कि वाइट बॉल फॉर्मेट में एक ही कप्तान रहे। इस वजह से कोहली से वनडे टीम की कप्तानी छीन ली गई। तब कहा गया था कि बोर्ड ने इस बारे में कोहली से बात की थी, लेकिन कोहली ने कोई बात होने से साफ इनकार कर दिया था। इस दौरे के बाद विराट कोहली ने टेस्ट टीम की भी कप्तानी छोड़ दी थी।

अपनों ने ही छोड़ा गांगुली का साथ
गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहने के इच्छुक थे, लेकिन उन्हें बताया गया बोर्ड अध्यक्ष पद के मामले में ऐसा चलन नहीं है। सौरव गांगुली और जयेश जॉर्ज को छोड़कर बीसीसीआई की मुख्य बॉडी के हर पदाधिकारी को एक और मौका मिला है। बीसीसीआई हेडक्वार्टर में 11 अक्टूबर को हुई बैठक में मौजूद एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘सौरव परेशान दिख रहे थे। हताश और निराश भी थे। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद वह ऑफिस से निकलने वाले आखिरी आदमी थे। तेजी से अपनी कार में बैठे। खिड़की के शीशे चढ़ाए और निकल गए। नामांकन के दिन से पहले अनौपचारिक बैठकों में, गांगुली को बताया गया था कि उनका प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष और वर्तमान बीसीसीआई टीम के मेंटर एन. श्रीनिवासन गांगुली के मुखर आलोचकों में से एक थे। दादा पर आरोप लगे कि उन्होंने ऐसे ब्रांड्स का समर्थन किया, जो बीसीसीआई के ऑफिशियल स्पॉन्सर्स के प्रतिद्वंद्वी थे।

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