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‘हिंदू धर्म का दुरुपयोग किया जा रहा…’ नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ने UCC को बताया मूर्खतापूर्ण

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कोलकाता

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने बुधवार को दावा किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक मुश्किल मुद्दा है और इसे आसान बनाने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। अमर्त्य सेन (90) ने यह भी कहा कि यूसीसी का निश्चित रूप से हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से संबंध है। अमर्त्य सेन ने कहा कि हिंदू राष्ट्र ही प्रगति का एकमात्र रास्ता नहीं है… हिंदू धर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इससे किसको फायदा होगा?

उन्होंने कहा, ‘समान नागरिक संहिता एक मुश्किल मुद्दा है। अब इसे आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। हममें भिन्नताएं हैं। धर्मों में भिन्नता है, नियमों और रीति-रिवाजों में भिन्नता है। हमें उन भिन्नताओं को दूर करके एकजुट होने की जरूरत है।’

‘मैंने अखबार में पढ़ा…’
सेन ने अपने घर पर संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने अखबार में पढ़ा कि समान नागरिक संहिता लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। पता नहीं ऐसी बेकार अवधारणा कहां से आती है।’ यूसीसी विवाह, तलाक और विरासत पर कानूनों के एक समान नियमों को संदर्भित करता है जो धर्म, जनजाति या अन्य स्थानीय रीति-रिवाजों के बावजूद सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होगा।

उन्होंने यह भी कहा, ‘हम हजारों साल से समान नागरिक संहिता के बिना रहते आए हैं। हमें सोचना होगा कि इसके लागू होने से किसको फायदा है।’ यूसीसी को हिंदू राष्ट्र के विचार से जोड़ने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अर्थशास्त्री ने कहा कि हिंदू धर्म का दुरुपयोग हो रहा है। भारत रत्न पुरस्कार विजेता ने कहा, ‘समान नागरिक संहिता हिंदू राष्ट्र के विचार से जुड़ी हुई है। लेकिन हिंदू राष्ट्र प्रगति का एकमात्र रास्ता नहीं है, हिंदू धर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है।’

पीएम मोदी के बयान के बाद चर्चा
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में अपने सार्वजनिक संबोधन में यूसीसी का जिक्र किया था जिसके बाद से इसकी चर्चा तेज है। पीएम मोदी ने कहा कि देश दो कानूनों से नहीं चल सकता और समान नागरिक संहिता संविधान का हिस्सा है. समान नागरिक संहिता व्यक्तिगत कानून बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों पर उनके धर्म, लिंग और सेक्सुअल ओरिएंटेशन की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा।

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