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कैसे गुजरात के घर-घर में पहुंच गए गढ़वी, AAP सीएम फेस का वो टर्निंग पॉइंट

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अहमदाबाद

आम आदमी पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में इसुदान गढ़वी को सीएम कैंडिडेट बनाया है। गढ़वी राजनीति में आने से पहले जाने-माने टीवी एंकर रहे हैं। इसुदान का जन्म 10 जनवरी 1982 को द्वारका जिले के पिपलिया गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उन्होंने अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता के कामयाब करियर को छोड़कर गढ़वी ने राजनीति में कदम रखा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसुदान गढ़वी  पर भरोसा जताते हुए उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार बना दिया। 40 साल के गढ़वी को कैडिडेट करार देने से पहले आम आदमी पार्टी ने बाकायदा एक सर्वे कराया था। जिसमें इसुदान को 73 प्रतिशत वोट मिले। दरअसल इसुदान गढ़वी गुजरात में अन्य पिछड़ी जातियों यानी ओबीसी से ताल्लुक रखते हैं। जो कि राज्य की आबादी का 48 प्रतिशत हिस्सा हैं।

टीवी शो से लोगों के दिलों में गढ़वी ने बनाई जगह
इसुदान गढ़वी ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन से की थी। इसुदान ने कई मीडिया चैनल्स के साथ काम किया और किसानों की समस्याओं को लेकर कई न्यूज स्टोरीज कीं। उनके करियर में टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्होंने डांग और कपराडा में पेड़ों की अवैध कटाई के पीछे के घोटालों को उजागर किया। उस दौर में इसुदान गढ़वी की रिपोर्ट के बाद सरकार को भी एक्शन लेना पड़ा था। 2015 में इसुदान वीटीवी गुजराती से जुड़ गए और अगले कई सालों तक उन्होंने वहां पर ‘महामंथन’ नाम का न्यूज शो होस्ट किया। इस महामंथन शो के जरिए वह गुजरात के घर-घर में पहुंच गए और उनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी। खुद इसुदान कहते हैं कि मेरी सुरक्षित नौकरी थी लेकिन फिर भी मेरे मन में यह बार-बार आ रहा था कि ईश्वर ने मुझे कुछ और करने के लिए भेजा है।

परिवार का राजनीति से कोई नाता नहीं
इसुदान गढ़वी के परिवार के किसी शख्स का राजनीति से दूर दूर तक कोई लेना-देना नहीं रहा है। 14 जून, 2021 को वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए, जिसके बाद से उनका कद लगातार बढ़ता चला गया। उन्हें गुजरात में आप के जमीनी नेता के तौर पर पहचान मिली हुई है। इस वक्त वे आप के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव भी हैं। पत्रकार होने के नाते इसुदान के कई पार्टियों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं। राजनीति में आने से पहले उनकी कई पार्टियों के नेताओं से बातचीत भी हुई थी। लेकिन उन्होंने राजनीति की शुरुआत आम आदमी पार्टी से ही करने का फैसला लिया। वहीं आम आदमी पार्टी को भी गढ़वी से काफी उम्मीदें है।

ओबीसी वोटों पर आम आदमी पार्टी की नजर
आम आदमी पार्टी की नजर गुजरात के 48 फीसद ओबीसी वोट बैंक पर है। गढ़वी पर अपने पिता का बहुत ज्यादा प्रभाव है और इसकी झलक उस समय भी दिखी जब उन्हें सीएम चेहरा घोषित किया गया था। इस दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने अपने पिता को याद किया और कहा कि मैंने अपने पिता को उनके देहांत से पहले वचन दिया था कि मैं लोगों से जुड़े मुद्दों की बात करूंगा।

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