मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने धनशोधन से जुड़े एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत को एक विशेष अदालत से मिली जमानत पर तत्काल रोक लगाने से बुधवार को इनकार कर दिया। दरअसल इससे पहले ईडी ने राउत की जमानत का विरोध करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख किया था। हालांकि ईडी को ये दांव उल्टा पड़ गया। हाईकोर्ट ने ईडी को खूब सुनाया। हाईकोर्ट ने ईडी से कहा कि राउत की जमानत पर तत्काल रोक लगाने का कोई कारण नहीं बनता है। राउत की जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए अदलात ने कहा कि वह दोनों पक्षों को सुने बिना ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकती। उच्च न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए गुरुवार तक टाल दिया। इससे पहले विशेष अदालत ने राउत और एक अन्य आरोपी प्रवीण राउत की जमानत दिन में मंजूर कर ली थी और शुक्रवार तक इस जमानत आदेश पर रोक का प्रवर्तन निदेशालय का अनुरोध ठुकरा दिया था।
इसके बाद ईडी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति भारती डांगरे की एकल पीठ ने यह कहते हुए तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया कि जब जमानत मंजूर की जा चुकी है तो वह दोनों पक्षों को सुने बिना ऐसी रोक नहीं लगा सकती। अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने कहा, “मैंने आदेश को देखा तक नहीं है। मुझे नहीं पता कि किस आधार पर जमानत दी गई है। मुझे नहीं पता कि आपने (ईडी) ने किस आधार पर आदेश को चुनौती दी है। मैं दोनों पक्षों को सुने बिना भला स्थगन आदेश कैसे दे सकती हूं।”
अदालत ने कहा कि वह जमानत रद्द करने की केंद्रीय एजेंसी की अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा, “अगर सुनवाई के बाद मैं जमानत रद्द करने का आदेश देती हूं तो आरोपी व्यक्तियों को वापस हिरासत में लिया जा सकता है।” उच्च न्यायालय ने यह भी पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उन्हें जमानत के आदेश पर रोक लगाने का अधिकार है।
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने जमानत आदेश पर गुरुवार तक रोक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अर्जी पर सुनवाई एक दिन में पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, “निचली अदालत ने जमानत याचिकाओं को सुनने और आदेश पारित करने में एक महीने का समय लिया … आप मुझसे इतनी जल्दी फैसला करने की उम्मीद करते हैं? मैं नहीं चाहती कि आपके (ईडी) या उनके (संजय राउत और प्रवीण राउत) साथ कोई अन्याय हो। जब आप जमानत रद्द कराने पर आते हैं, तो अदालत की भी अपनी सीमित शक्तियां होती हैं।”
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ईडी का आवेदन दंड प्रक्रिया संहिता (जमानत रद्द करना) की धारा 439 (2) के तहत दायर किया गया था, न कि धारा 482 (आदेश को रद्द करना) के तहत। अदालत ने कहा, “केवल धारा 482 के तहत, उच्च न्यायालय के पास जमानत आदेशों को निलंबित करने की अंतर्निहित शक्तियां हैं।” प्रवीण राउत की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने ईडी की अर्जी का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि आरोपी रिहा होने के बाद कहीं भाग नहीं जाएंगे। पोंडा ने कहा, “आरोपियों में से एक (संजय राउत) सांसद हैं। आरोपियों की जड़ें समाज में हैं। निचली अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें लगाई हैं। कोई भी भागने वाला नहीं है।” ईडी ने राज्यसभा सांसद संजय राउत को 31 जुलाई को उपनगरीय गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास के संबंध में वित्तीय अनियमितताओं में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया था।
