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Friday, June 19, 2026
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अपनी पार्टी से जीतकर आया हूं, किसी की दया पर नहीं आया… सदन में जब सभापति से भिड़ गए चंद्रशेखर

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के नगीना से आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने शनिवार को लोकसभा में संविधान पर हो रही चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि सरकार आलोचना करने वालों को जेल में डालती है। आजम खान को राजनैतिक विरोध के कारण जेल में रखा गया है। उन्होंने बोलने की अवधि को लेकर सभापति से भी बहस की और कहा कि क्या यहां भी दलितों को बोलने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं अपनी पार्टी से चुनाव जीतकर सदन में आया हूं और किसी की दया पर नहीं आया।

दरअसल, सभी दलीय स्वतंत्र सांसदों को सभापति ने बोलने के लिए 4 मिनट का समय दिया था। अपनी पार्टी के अकेले सांसद चंद्रशेखर आजाद को भी चार मिनट होने पर सभापति ने भाषण समाप्त करने को कहा। इस पर आजाद नाराज हो गए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सर दलितों को क्या यहां भी बोलने नहीं दिया जाएगा? सबको चार मिनट दे रहे हो तो हमें भी दे दो। ये भेदभाव नहीं चलेगा दलितों के साथ।

‘किसी की दया पर नहीं आया’
आजाद ने आगे कहा, ‘हमें सबसे आखिरी में नंबर मिलेगा और बोलने का मौका नहीं मिलेगा। क्या मजाक कर रहे हैं सर आप?’ इस पर सभापति ने कहा कि सभी इंडिपेंडेंट सांसदों को 4 मिनट दिए जा रहे हैं। जवाब में आजाद ने गुस्से में कहा, ‘मैं अपनी पार्टी का मेंबर हूं सर और जीतकर आया हूं। किसी की दया पर नहीं आया।’ हालांकि, इसके बाद सभापति ने उन्हें एक और मिनट बोलने का समय दे दिया।

भाजपा सरकार पर हमला
भाजपा पर हमला करते हुए आजाद ने कहा कि सरकार आलोचना से डरती है। कितने लोग आज जेल में हैं… आजम खान साहब राजनीतिक विरोध पर जेल में बंद हैं। सरकार यहां बैठी है। सरकार सामाजिक न्याय की बात करती है। सरकार बताए कितने दलित सीएम बना रखे हैं। 13 राज्यों में आपकी सरकार है। कितने महिला मुख्यमंत्री हैं। आपकी सरकार ने एससी के आदेश के बाद भी रिजर्वेशन जारी नहीं किया और ओबीसी को पॉलिटिकल रिजर्वेशन आप देंगे कि नहीं देंगे आप बताएं?

‘भारत कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे’
संविधान पर बोलते हुए आजाद ने कहा, ‘आज हम संविधान की गौरवशाली यात्रा पर चर्चा कर रहे हैं। कल से ही ये चर्चा चल रही है। मैंने दोनों पक्षों को सुना। बड़े-बड़े नेता बोले। संविधान के भाग-वन में लिखा है, इंडिया दैट इज भारत। हिंदुस्तान नहीं लिखा है सर लेकिन सारे नेता संविधान पर चर्चा कर रहे हैं लेकिन हिंदुस्तानी कहकर भारत कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ये बड़ा सवाल है सर कि क्या संविधान के हिसाब से बात रखी जा रही है।

आजाद ने कहा, ’25 नवंबर 1949 को संविधान देश को सौंपते हुए बाबा साहेब ने कहा था कि 26 जनवरी 1950 को हम विरोधाभास भरे जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं। राजनीतिक जीवन में तो हमारे पास समानता होगी लेकिन सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता होगी। क्या ये चुनौती आज 75 साल बाद दूर हुई है? भारत ने 26 जवरी 1950 को खुद को एक संप्रभु लोकतांत्रिक राज्य होने का ऐलान किया लेकिन उस समय संविधान की स्थिति ये थी कि जैसे गांव का एक आदमी 50 साल पहले शहर में आ जाता और बड़े लोगों की महफिल में चला जाता, जहां वो लोग खाना खा रहे हों और वो केवल नमकीन खाकर कहता है कि ये तो फीका है। क्योंकि वो समझता नहीं था कि ये संविधान है क्या?

आजाद ने कहा, संविधान उसके लिए महज एक दस्तावेज था। ये जिम्मेदारी थी राजनैतिक दलों पर कि वो संविधान को व्यवहार में लेकर आते। इसके इतने सारे आर्टिकल हैं। अगर इनको व्यवहार में लाया जाता तो आज देश बहुत बदल गया होता। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कहा था कि लोकतंत्र भारत भूमि का केवल ऊपरी पोशाक है। उसके अनुसार यहां की संस्कृति अनिवार्य तौर पर अलोकतांत्रिक है। भारत जैसे गरीब और गैर बराबरी वाले देश में संविधान के जरिए छुआछूत खत्म करना वंचितों के लिए सकारात्मक उपाय करना, सभी वयस्कों के लिए मतदान का अधिकार देना और सबके लिए समान अधिकार देना यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

संविधान नहीं होता तो…
उन्होंने कहा कि अगर संविधान नहीं होता तो शायद अमीर और राजा-महराजा खुद को मानने वाले लोग हमारी गलियों तक नहीं आ पाते। हमारे हाल नहीं जान पाते। आजाद ने कहाकि संविधान ने सुनिश्चित किया कि रानी के पेट से राजा जन्म नहीं लेगा बल्कि वोट से नेता तैयार होगा। आर्थिक बराबरी के विषय पर सरकार क्या कर रही है, गरीब और गरीब हो रहा है, अमीर और अमीर हो रहा है। सुबह उठते ही बम की धमकी मिलती है। ये अमृतकाल है या धमकी काल है?

आजाद ने कहा, आज भी भारत में दलितों को घोड़ी चढ़ने नहीं दिया जाता। मूंछें रखने पर हत्या होती है। मासूम बच्चियों का रेप और हिंसा होती है। एनसीआरबी का डेटा देखकर डर लगेगा। यहीं एक किमी पर संविधान को जलाया गया। आर्टिकल 25 में सभी को धार्मिक आजादी है। कहां है दलितों, मुसलमों, इसाइयों की धार्मिक आजादी। संभल अजमेर और अयोध्या इसके उदाहरण हैं।

 

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