नई दिल्ली,
कराची लिटरेचर फेस्टिवल में पैनल डिस्कशन के दौरान पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रवक्ता और रिटायर्ड मेजर जनरल अतहर अब्बास ने पाकिस्तान सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि आगे बढ़ने का रास्ता सिर्फ राज्य तंत्र ही नहीं है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत से बातचीत हमारे देश की जरूरत है.
‘सर्च फॉर पीस एंड सिक्योरिटी अमंग नेवर्स’ थीम पर हो रहे 14वें कराची लिटरेर फेस्टिवल के अंतिम दिन अतहर अब्बास ने कहा, अगर आप बातचीत को पूरी तरह से सुरक्षा एजेंसियों पर छोड़ देंगे तो दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरने वाले नहीं हैं. इस तरह का निर्णय एक कदम आगे और दो कदम पीछे हटने जैसा है.”
भारत ना माने तो अमेरिका और यूरोप की लें मदद: जनरल अब्बास
उन्होंने आगे कहा, “ट्रैक II डिप्लोमेसी, मीडिया, व्यवसाय और व्यापार संगठन और शिक्षा के माध्यम से बातचीत को लेकर पाकिस्तान को एक पहल करनी चाहिए. इसके माध्यम से भारतीय लोगों से जुड़ वहां के समाज में अपना स्थान बनाया जा सकता है.
अगर भारतीय नागरिक पाकिस्तान को लेकर बातचीत करते हैं तो इससे भारत सरकार और राज्य के अधिकारियों पर दबाव बनेगा. यह समय की मांग है कि पाकिस्तान के लिए बातचीत जरूरी है.पूर्व मेजर जनरल ने आगे कहा कि अगर भारत की ओर से गतिरोध का सामना करना पड़ता है तो पाकिस्तान, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बाहरी ताकतों का भी समर्थन हासिल कर सकता है.
पाकिस्तान में हुई अस्थिरता तो भारत में भी फैलेगी: अब्बास
चर्चा के दौरान जनरल अब्बास से जब यह पूछा गया कि पड़ोसियों (भारत) के साथ बातचीत कितनी जल्दी हो सकती है? इस पर उन्होंने कहा, “आप अपने पड़ोसी को नहीं बदल सकते हैं. आखिरकार, उन्हें (भारत) बातचीत की मेज पर आना ही होगा. भले ही उन्हें लगता हो कि वो एक महान शक्ति हैं.”
रिटायर्ड मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा कि हमें केवल सरकारी स्तर पर ही बातचीत की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में जगह बनाने से पाकिस्तान की तरह भारत में भी अस्थिरता फैल जाएगी इसलिए हमें अन्य विकल्पों की ओर भी देखना चाहिए.
दोनों देशों ने बातचीत के मौके गंवाए: अब्बास
आईएसपीआर के पूर्व डीजी अतहर अब्बास ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ‘बस डिप्लोमेसी’ और पाकिस्तानी जनरल मुशर्रफ की ‘आगरा इनिशिएटिव’ को याद करते हुए कहा कि दोनों देश पहले ही बातचीत शुरू करने के अवसर गंवा चुके हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में बात करना और कठिन हो गया है, जब देश खुद राजनीतिक उठापटक से त्रस्त है.
इसी चर्चा के दौरान विदेशी संबंधों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भले ही भारत और पाकिस्तान में हमेशा तनाव रहा है. लेकिन हाल के कुछ वर्षों में ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ पर अपेक्षाकृत हालात नियंत्रण में रहे हैं.भविष्य में भी दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं देखते हुए माइकल कुगेलमैन ने कहा कि मुझे लगता है कि यह शर्म की बात है. क्योंकि बेहतर संबंध से दोनों देश आर्थिक रूप से लाभान्वित हो सकते हैं.
प्रशांत क्षेत्र की राजनीति में अमेरिका की भागीदारी के बारे में बात करते हुए कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में शांति और भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंध चाहता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में चीन को एक प्रमुख शक्ति के रूप में नहीं देखना चाहता है.कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता है क्योंकि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है. ऐसे में नियंत्रित अराजकता, अनियंत्रित अराजकता से ज्यादा दूर नहीं है.
