27.7 C
London
Friday, June 19, 2026
Homeराष्ट्रीय'हार्ट अटैक के डर से कोविड बूस्टर नहीं लगवा रहे भारतीय' सर्वे...

‘हार्ट अटैक के डर से कोविड बूस्टर नहीं लगवा रहे भारतीय’ सर्वे में पता चली अंदर की बात

Published on

नई दिल्ली

चीन में संक्रमण बढ़ने के बीच जब देश कोविड की संभावित लहर के खतरे से निपटने की तैयारी कर रहा है, एक सर्वे से महत्वपूर्ण बात पता चली है। गुरुवार को सर्वेक्षण में खुलासा हुआ कि 10 में से छह भारतीय (64 प्रतिशत) कोविड बूस्टर खुराक लेने से हिचक रहे हैं, क्योंकि युवाओं में दिल के दौरे के मामले बढ़े हैं। सर्वेक्षण में शामिल 53 प्रतिशत लोगों ने बूस्टर शॉट्स नहीं लिए हैं और न ही इसे लेने की योजना बना रहे हैं। वहीं, 9 प्रतिशत ने अब भी कोई कोविड वैक्सीन शॉट नहीं लिया है और ऐसा करने की उनकी कोई योजना नहीं है। हाल के दिनों में कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए जिसमें लोग अचानक गिरकर मर गए। हालांकि अचानक मौतों की वजह पता नहीं चली है लेकिन लोगों में डर बैठ गया है। जबकि सरकार और एक्सपर्ट कह रहे हैं कि कोरोना के खिलाफ बूस्टर लगवाना जरूरी है।

लोकल सोशल कम्युनिटी एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स के मुताबिक, लगभग 2 फीसदी लोगों को अब भी यह तय करना है कि बूस्टर शॉट लेना है या नहीं। चीन से एक नए कोविड वेरिएंट के आने और कहर ढाने की खबर ने नागरिकों और अधिकारियों को चिंतित कर दिया है। इस समय पूरे चीन में फैला हुआ प्रमुख ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट बीएफ.7 है।

महामारी विज्ञानियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन की 60 प्रतिशत आबादी संक्रमित हो जाएगी और मौजूदा लहर से दस लाख लोगों की मौत हो सकती है। चीन के अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर नहीं हैं और लोग अपने मृत लोगों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में घंटों इंतजार करते नजर आते हैं। सर्वेक्षण के निष्कर्ष में कहा गया है, ‘परिणाम से लगता है कि जहां 28 प्रतिशत ने टीकाकरण के साथ-साथ बूस्टर शॉट लेने की सावधानी बरती है और 8 प्रतिशत जो अगले 30 दिनों में ऐसा करने की संभावना रखते हैं। उत्तरदाताओं में 64 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जो इस समय बूस्टर या एहतियाती खुराक लेने के प्रति अनिच्छुक हैं।’

नवीनतम सर्वेक्षण में 309 जिलों के नागरिकों से 19,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। श्रेणी 2, 3 और 4 के शहरों और ग्रामीण जिलों में कई लोग मानते हैं कि लंबे समय से कोविड का कोई प्रकोप नहीं है, इसलिए अब और खुराक लेने की जरूरत नहीं है। दिल के दौरे और मस्तिष्क के स्ट्रोक के मामले बढ़ने की मीडिया की रिपोर्ट आबादी के एक वर्ग को यह मानने के लिए प्रेरित कर रही हैं कि ऐसा टीका के दुष्प्रभाव के कारण हो रहा है। पहले के एक सर्वेक्षण में 51 प्रतिशत नागरिकों ने कहा कि उनके करीबी नेटवर्क में एक या एक से अधिक व्यक्ति हैं, जिन्हें पिछले दो वर्षों में दिल या मस्तिष्क का दौरा, कैंसर तेजी से बढ़ना या न्यूरोलॉजिकल समस्या ने परेशान किया है।

Latest articles

कम कीमत में नई कारें दिलाने का झांसा, गैस एजेंसी संचालक से 17 लाख की ठगी; डुप्लीकेट चाबी से उठा ले गए तीनों वाहन

भोपाल। राजधानी के तलैया थाना क्षेत्र में एक गैस एजेंसी संचालक के साथ उन्हीं...

24 घंटे में बदली पटवारियों की तबादला सूची, भोपाल में प्रशासनिक फैसले पर उठे सवाल

भोपाल। राजधानी भोपाल में पटवारियों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद...

देश की पहली कमर्शियल कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना का आज शिलान्यास करेंगे पीएम मोदी, बीएचईएल और कोल इंडिया का बड़ा कदम

झारसुगुड़ा/भोपाल। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को गति देने...

बीमा अस्पताल की बदहाली के खिलाफ आज सोनागिरी में मजदूरों का हल्लाबोल

भोपाल। केंद्र सरकार के अधीन जाने के बाद से लगातार बदहाली का दंश झेल...

More like this

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका; क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने से बदला पूरा समीकरण

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव की मतगणना में बड़ा...

उद्धव की पार्टी टूटी, 9 में से 6 सांसद बागी; 4 साल पहले शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे

नई दिल्ली/मुंबई1 महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6...