झारसुगुड़ा/भोपाल। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को गति देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून, 2026 को ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कोयला गैसीकरण परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह देश की पहली वाणिज्यिक (कमर्शियल) पैमाने की ‘कोयले से अमोनियम नाइट्रेट’ उत्पादन सुविधा होगी। इस महापरियोजना का विकास ‘भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड’ द्वारा किया जा रहा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों ‘भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड’ (भेल) और ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ का एक संयुक्त उद्यम है।
यह संयंत्र बीएचईएल द्वारा पूर्णतः स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई अत्याधुनिक कोयला गैसीफिकेशन तकनीक पर काम करेगा और इसके माध्यम से प्रतिदिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन किया जाएगा। यह परियोजना भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों (400 अरब टन से अधिक का भंडार) का सही मूल्य प्राप्त करने और विदेशों से आयातित रासायनिक फीडस्टॉक पर निर्भरता कम करने में गेम-चेंजर साबित होगी। वर्तमान में भारत प्रतिवर्ष लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये के रासायनिक उत्पादों का आयात करता है। इस स्वदेशी तकनीक आधारित परियोजना से न केवल भारी विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा।
उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि लखनपुर परियोजना भविष्य के घरेलू कोयला-आधारित रसायन उद्योग के लिए एक आदर्श मिसाल बनेगी। इस रणनीतिक परियोजना के लिए महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की लगभग 350 एकड़ भूमि को पट्टे पर लिया गया है और कोयला मंत्रालय की ओर से 1,350 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देशभर में ऐसी सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 46,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है, जिससे आने वाले समय में 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और लगभग 50,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। आज होने जा रहा यह शिलान्यास समारोह भारत के कोयला क्षेत्र में स्वच्छ तकनीक, मूल्यवर्धन और टिकाऊ औद्योगिक विकास के एक नए युग का सूत्रपात करेगा।
