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इजरायल ने तोड़ा था भारत का सपना, अब मिस्र की मदद से तैयार होंगे फाइटर जेट के इंजन

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काइरो

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत और मिस्र के रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए राजधानी काहिरा पहुंच चुके हैं। तीन दिनों तक वह काहिरा में रहेंगे। भारत और मिस्रके रक्षा संबंध आज के नहीं बल्कि पांच दशक पुराने हैं। यह बात तब की है जब भारतीय वायुसेना (IAF) की टीम सन् 1960 के दशक में काहिरा गई थी। यह टीम यहां पर फाइटर जेट के लिए अहम टेक्‍नोलॉजी के मकसद से पहुंची थी। तेजस भारत का पहला स्‍वदेशी जेट नहीं है। भारतीय वायुसेना के पास मारुत नाम का एक फाइटर जेट था जो किसी सपने से कम नहीं था। इस फाइटर जेट और भविष्‍य के लिए मिस्‍त्र, भारत की मदद करता उससे पहले ही इजरायल की वायुसेना ने उस सपने को तोड़ दिया।

क्‍या हुआ था 55 साल पहले
सन् 1967 में अरब और इजरायल के बीच युद्ध जारी था। इस युद्ध में मिस्रके चार मिराज III, दो बॉम्‍बर, तीन मिग 17 को इजरायल पर हमले के लिए रेडी रखा गया था। पांच जून 1967 को मिस्रकी वायुसेना को इजरायली वायुसेना के ऑफिसर जैकब याक नेवो की वजह से खासा नुकसान झेलना पड़ा था। भारतीय वायुसेना के ऑफिसर ग्रुप कैप्‍टन कपिल भार्गव ने इस पूरे हादसे को देखा। उनके साथ उस समय हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिम‍िटेड (HAL) के टेक्‍नीशियंस भी मौजूद थे।

ग्रुप कैप्‍टन भार्गव मिस्रकी उन कोशिशों में शामिल थे जिसके तहत जर्मन डिजाइन वाला जेट हेलवान HA300 को तैयार किया जाना था। इस जेट को बनाने में भारत की तरफ से आर्थिक मदद की जा रही थी। भारत को उम्‍मीद थी कि इस जेट का इंजन सुपरसोनिक HF-24 मारुत में भी प्रयोग हो सकता है। इस घटना के बाद भारत और इजिप्‍ट का वह सपना टूट गया और इजरायल की वायुसेना ने इसे तोड़ दिया था। मिस्रके तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जमाल अब्‍दुल नसीर ने फैसला किया कि उनकी सेना के पास सही टेक्‍नोलॉजी नहीं है। ऐसे में उन्‍होंने सोवियत संघ की मदद लेने के बारे में सोचा।

तेजस खरीदेगा मिस्र
55 साल बाद राजनाथ सिंह जब काहिरा पहुंचे हैं तो माना जा रहा है कि वह उसी सहयोग वापस शुरू कर सकते हैं जिसके तहत मिस्रऔर भारत जेट इंजन की टेक्‍नोलॉजी डेवलप करने में आपसी सहयोग करेंगे। दूसरी तरफ से इजिप्‍ट भारत में बने लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट तेजस की 70 यूनिट्स खरीदने का प्रस्‍ताव पेश कर सकता है। भारतीय वायुसेना की तरह इजिप्‍ट की वायुसेना भी राफेल उड़ाती है। लेकिन इसे छोटे और कम जटिल लड़ाकू विमान चाहिए ताकि वह अपनी सेना को मजबूत कर सके और यह उसके पायलट्स के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

भारत सरकार के सूत्रों की मानें तो मिस्रमें एक प्रोडक्‍शन लाइन लगाने की पेशकश की गई है। अगर डील सही होती है तो एक प्रोडक्‍शन लाइन मिस्रमें होगी। दूसरी ओर मिस्रभी भारत में बने मिसाइल सिस्‍टम, एडवांस्‍ड लाइट हेलीकॉप्‍टर और लाइट कॉम्‍बेट हेलीकॉप्‍टर में रूचि रखता है। राजनाथ सिंह जब काहिरा में अपने समकक्ष जनरल मोहम्‍मद जाकी से बातचीत करेंगे तो नए मौकों पर भी चर्चा होगी। इनका मकसद दोनों देशों के बीच सैन्‍य संपर्क बढ़ाना और रक्षा उद्योगों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना है।

क्‍यों है मिस्रकी अहमियत
साल 2016-2020 में सऊदी अरब के बाद मिस्रदुनिया का सबसे बड़ा अयातक देश था। भारत का वैश्विक हथियार बाजार में सिर्फ 2 फीसदी की हिस्‍सेदारी रखता है। यह आंकड़ा ब्राजील और चेक गणराज्‍य से भी कम है। भारत और मिस्रसन् 1950 और 1960में करीबी साझेदार रहे लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र की राजनीति की वजह से दोनों के रिश्‍ते कुछ खास प्रगति नहीं कर पाए। सन् 1973 में यानी युद्ध के पांच साल बाद मिस्रदुनिया का पहला देश बना जिसने इजरायल के साथ एक शांति समझौता साइन किया। दूसरी तरफ भारत के रिश्‍ते पश्चिमी सोवियत संघ के साथ मजबूत हो रहे थे। वर्तमान समय में करीब 200 अरब डॉलर का भारतीय व्‍यापार हर साल स्‍वेज नहर के जरिए होता है। ऐसे में निश्चित तौर पर भारत को मिस्रके सुरक्षा हितों में रूचि है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह या

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