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Tuesday, April 28, 2026
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‘जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना…’, महाराष्ट्र में छगन भुजबल की खुली बगावत, अजित पवार के खिलाफ निकाली भड़ास

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नई दिल्ली,

महाराष्ट्र में महायुति सरकार के गठन के बाद अब नाराजगियों का दौर जारी है. कई नेताओं का दर्द छलक रहा है. लेकिन एनसीपी (अजित गुट) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने अब अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर कर दी है. मंगलवार को उन्होंने कहा कि ‘जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना.’ उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं. वहीं, मंगलवार को पुणे में छगन के समर्थकों ने अजित पवार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया. उनका कहना था कि यह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अपमान है. प्रदर्शन बारामती में उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के बंगले के बाहर भी हुआ.

जानें क्यों नाराज हैं छगन भुजबल
छगन भुजबल ने दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें कैबिनेट में शामिल करना चाहते थे, लेकिन फैसला अजित पवार ने किया. 77 वर्षीय विधायक भुजबल पहले महायुति सरकार में मंत्री थे . लेकिन इस बार उन्हें जगह नहीं दी गई है.

बोले- मैं आहत हूं
भुजबल ने कहा कि एनसीपी में फैसले अजित पवार लेते हैं, जैसे बीजेपी में देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना में एकनाथ शिंदे लेते हैं. एक दिन पहले दिए गए अपने बयान ‘जहां नहीं चैन, वहां नहीं रहना’ पर सफाई देते हुए भुजबल ने कहा कि वह बुधवार को एनसीपी कार्यकर्ताओं और अपनी येवला सीट के लोगों से चर्चा के बाद कुछ कहेंगे. भुजबल ने कहा, ‘मुझे मंत्री न बनाए जाने का कोई दुख नहीं, लेकिन जो व्यवहार मेरे साथ हुआ, उससे मैं आहत हूं.’

‘मैं कोई खिलौना नहीं’
नासिक में मीडिया से बात करते हुए भुजबल ने कहा कि उन्हें मई में लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा गया था, लेकिन नाम फाइनल नहीं हुआ. फिर राज्यसभा सीट की पेशकश की गई, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, ‘मैंने नासिक से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव स्वीकार किया. जब मैं राज्यसभा जाना चाहता था, तो मुझे विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा गया. अब मुझे राज्यसभा सीट ऑफर की जा रही है. क्या मैं कोई खिलौना हूं? आप जब कहें खड़ा हो जाऊं और जब कहें बैठ जाऊं? मेरे क्षेत्र के लोग क्या सोचेंगे अगर मैं इस्तीफा दे दूं?’

भुजबल ने कहा, ‘मुझे लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर तैयार किया गया. मैंने एक महीने तक तैयारी की, लेकिन अंतिम समय में मेरा नाम हटा दिया गया. फिर मुझे बताया गया कि मुझे महाराष्ट्र में रहना चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे साथ जो हुआ, वह अपमानजनक है. यह मंत्री पद का सवाल नहीं है, बल्कि मेरे साथ हुए बर्ताव का सवाल है.’ भविष्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से बात करके वो कोई फैसला लेंगे.बता दें कि रविवार को फडणवीस ने नागपुर में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया, जिसमें 39 नए सदस्य शामिल हुए. इसमें 19 बीजेपी, 11 शिंदे गुट और 9 अजित पवार गुट से थे. भुजबल उन 10 मंत्रियों में थे जिन्हें नई सूची से हटा दिया गया.

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