छिंदवाड़ा:
कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कांग्रेस के अंदर उथल-पुथल मची हुई है। पूर्व सीएम के वफादार एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव लड़ रहे उनके बेटे नकुलनाथ को मझधार में छोड़कर पुराने कांग्रेसी जा रहे हैं। उस लिस्ट में छिंदवाड़ा मेयर विक्रम आहाके का नाम भी शामिल हो गया है। विक्रम आहाके कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ता थे। उनकी सादगी के कायल कमलनाथ से लेकर राहुल गांधी तक थे। यही वजह रही है कि दो साल पहले छिंदवाड़ा से विक्रम आहाके को कांग्रेस पार्टी ने मेयर का टिकट दिया था। चुनाव जीतने के बाद जब वह मेयर बने तो राहुल गांधी की उनकी सादगी पर एक पोस्ट किया था। दो साल बाद विक्रम आहाके का मन बदल दिया है और कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
साधारण घर से आते हैं विक्रम आहाके
विक्रम आहाके के मेयर बनने के बाद देश में उनके संघर्ष की कहानी की खूब चर्चा हुई थी। वह बेहद ही साधारण घर से आते हैं। मां आंगनवाड़ी की कार्यकर्ता हैं और पिता छोटे किसान हैं। वहीं, छुट्टियों में विक्रम अहाके भी दूसरे के खेतों में मजदूरी करते थे। पैसे के लिए वह शादियों में जूठी बर्तनें भी साफ करते थे। साथ ही मेयर बनने से पहले विक्रम आहाके साइकल की सवारी करते थे।
कमलनाथ ने दिया था टिकट
दो साल पहले निकाय चुनाव में कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए विक्रम आहाके को छिंदवाड़ा से टिकट दिया था। टिकट मिलने के बाद आहाके चुनावी मैदान में उतरे। उन्होंने बीजेपी को उम्मीदवार को तब मात दी, जब एमपी में शिवराज की सरकार थी। शिवराज सरकार ने छिंदवाड़ा फतह के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन विक्रम आहाके जीत में सफल रहे। कमलनाथ एक समय में विक्रम आहाके अपने हेलीकॉप्टर में साथ लेकर उड़ते थे।
बीजेपी में शामिल हो गए विक्रम आहाके
छिंदवाड़ा मेयर विक्रम आहाके मोहन यादव के समक्ष बीजेपी की सदस्यता ले ली है। विक्रम ने कमलनाथ का साथ ऐसे वक्त में छोड़ा है, जब कमलनाथ को विक्रम की सख्त जरूरत थी। दरअसल, नगर निगम में18 साल बाद कांग्रेस का परचम लहराने वाले विक्रम आहाके ने पिछले चुनाव में एक तरफा जीत हासिल की थी। कमलनाथ के सबसे विश्वासपात्र माने जाने वाले युवा आदिवासी नेता विक्रम का पार्टी छोड़कर जाना कमलनाथ और कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
छिंदवाड़ा के छोटे गांव राजखोह के रहने वाले विक्रम
भले ही आज विक्रम ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है लेकिन वह एक गरीब परिवार से आते हैं। छिंदवाड़ा विधानसभा के छोटे से गांव राजखोह में जन्मे विक्रम आहाके की मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। वह कांग्रेस से जुड़े और NSUI से जुड़कर राजनीति में आ गए।
राहुल गांधी कर चुके हैं तारीफ
विक्रम के मेयर बनने के बाद राहुल गांधी ने उनकी तस्वीरों के साथ फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा था। राहुल गांधी ने लिखा था कि मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं, पिता जी किसान हैं और बेटा ‘महापौर’ है । मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस ने 18 साल बाद बड़ी जीत दर्ज की है। कांग्रेस पार्टी के विक्रम आहाके ने साबित कर दिया कि अगर सच्ची मेहनत, लगन और ईमानदारी से अपने सपनों के लिए लड़ा जाए तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है।
विक्रम आहाके कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष थे और युवा कांग्रेस के ‘जिला सचिव’ के तौर पर भी संघर्षरत थे, अब वो छिंदवाड़ा के महापौर होंगे। हमारा सपना है कि एक ऐसा हिंदुस्तान बने जहां अमीर-ग़रीब में फासला न हो, सबको समानता का अधिकार मिले और कांग्रेस पार्टी जनता से किए गए अपने सभी वचनों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
कुर्सी जाने का था डर
दरअसल, छिंदवाड़ा नगर निगम के कांग्रेस पार्षद लगातार बीजेपी जॉइन कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस यहां अल्पमत में आ गई है। अब तक 12 से ज्यादा कांग्रेसी पार्षद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, समझा जा सकता है कि किस तरह से नगर निगम में पार्टी की स्थिति खराब हो गई है। वहीं, विक्रम को अपनी कुर्सी जाने का भी डर था क्योंकि ढाई साल के बाद यदि पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ सकता था। इन सारी चीजों को लेकर विक्रम ने अपनी राजनैतिक पारी को जारी रखने के लिए ऐसा कदम उठाया। ऐसा उनके करीबी बताते हैं।
