इस्लामाबाद
भारत के विपक्षी नेता चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठाते रहते हैं. हालांकि, पाकिस्तानी संसद में एक विपक्षी नेता ने ईवीएम और भारतीय चुनावी प्रणाली की सराहना की है. पाकिस्तान के विपक्ष के नेता शिबली फराज ने पाकिस्तान की चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने इतना बड़ा चुनाव बिना किसी धांधली के करा लिया.
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने सीनेटर फराज ने पाकिस्तानी चुनावी प्रक्रिया और धांधली पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘मैं अपने दुश्मन देश का उदाहरण नहीं देना चाहता, अभी चुनाव हुए हैं वहां… 80 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट किया है.. कितने हजारों मतदान केंद्र बनाए गए.. एक जगह पर एक आदमी तक के लिए मतदान केंद्र बना दिए उन लोगों ने. एक महीने से ज्यादा समय तक चुनाव हुआ, ईवीएम से चुनाव कराए गए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इस दौरान क्या एक भी आवाज उठी कि चुनाव में धांधली हुई है. हम भी यही चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि ये देश इसी बात में फंसकर रह जाए कि ये चुनाव जीता या वो जीता.. न जीतने वाला मानता है न हारने वाला. इसने हमारे राजनीतिक सिस्टम को बिल्कुल खोखला कर दिया है. हम भी अपने चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से क्यों नहीं करा सकते हैं?’
फराज ने कहा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद, भारत ने धोखाधड़ी के आरोपों के बिना अपने यहां विशाल चुनाव सफलतापूर्वक करा लिया. फराज की ये प्रशंसा भारत की चुनावी प्रणाली की मजबूती और पारदर्शिता की ओर इशारा करती है और यह दक्षता और विश्वसनीयता का एक मॉडल सामने रखती है जो पाकिस्तान सहित अन्य लोकतंत्रों के लिए एक उदाहरण के रूप में काम कर सकता है.गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वायनाड में बोलते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाया था, उन्होंने कहा था, ‘चुनाव आयोग ने चुनाव को पीएम की चुनावी जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया था.’
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन के मुखिया नवाज शरीफ ने तो दिल खोलकर पीएम मोदी को बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए एक ट्वीट में लिखा, ‘तीसरी बार पद संभालने के लिए मोदी जी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं. हालिया चुनाव में आपकी पार्टी की सफलता दिखाती है कि आपके नेतृत्व में जनता का विश्वास कायम है. आइए हम नफरत को उम्मीद में बदलें और दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों की नियति को आकार देने के अवसर का लाभ उठाएं.’
पाकिस्तान के चुनावों पर उठे सवाल
पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव हुए थे। लेकिन इससे पहले ही यह साफ हो गया था कि सत्ता में किसकी सरकार आएगी। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की लहर पूरे पाकिस्तान में थी। लेकिन इमरान खान को सेना पसंद नहीं करती। सेना चाहती थी कि नवाज शरीफ फिर सत्ता में आएं। चुनावों में इमरान खान की पार्टी को प्रत्याशी उतारने से प्रतिबंधित कर दिया गया। वहीं जब रिजल्ट आए तो इसमें धांधली के आरोप लगे। आरोप लगे कि इमरान के समर्थक निर्दलीय उम्मीदवारों को जबरन हरा दिया गया।
पाकिस्तान के चुनावों में धांधली के आरोप
पाकिस्तान में हुए ‘कथित चुनाव’ ने पूरे देश की भद्द पिटाई थी। अमेरिकी कांग्रेस के 31 सांसदों ने राष्ट्रपति बाइडेन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों की जांच होने तक पाकिस्तान की नई सरकार को मान्यता न देने का आग्रह किया गया था। क्योंकि पाकिस्तान में चुनाव शांतिपूर्ण नहीं हुआ। 8 फरवरी के दिन मोबाइल सेवाओं को अवरुद्ध कर दिया गया था। कई इलाकों में हिंसा भी देखी गई थी। चुनावों के नतीजे जारी करने में भी देरी हुई, जिससे धांधली का शक बढ़ा है।
