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कुंभ के बहाने बुजुर्ग बाप को छोड़ आए… ताने सुन-सुनकर बेटा परेशान था, वाराणसी से आए फोन ने कराया पुनर्मिलन

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वाराणसी:

बिहार के शेखपुरा जिले के 85 वर्षीय गंगाधर मिश्रा, 22 फरवरी को प्रयागराज के महाकुंभ में संगम नोज पर स्नान करते समय अपने बेटे से बिछड़ गए थे। उन्हें मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था। लेकिन 5 मार्च को वाराणसी में सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर ने उन्हें सड़क किनारे घायल अवस्था में पाया और अपने आश्रय गृह ‘छाया-कबीर’ में ले गए। हालत सुधरने पर मिश्रा ने अपनी पहचान बताई और अंतिम संस्‍कार की क्रिया से एक दिन पहले परिवार से उनका पुनर्मिलन हो गया।

22 फरवरी को महाकुंभ में गंगा स्नान के दौरान गंगाधर मिश्रा अपने बेटे से बिछड़ गए। बेटा कपड़े धोने गया था और इसी दौरान भीड़ में मिश्रा खो गए। कुछ तीर्थयात्रियों ने उन्हें वाराणसी जाने वाली बस में बिठा दिया। इधर, बेटा, बहू और परिवार के अन्य सदस्य महाकुंभ क्षेत्र और प्रयागराज में हर जगह उनकी तलाश करते रहे। न मिलने पर वे घर लौट गए।

गांव वालों ने परिवार पर ताने कसने शुरू कर दिए कि उन्होंने कुंभ के बहाने अपने बुजुर्ग पिता को छोड़ दिया है। बेटे भोला मिश्रा ने बताया, गांव के लोग ताना मारते थे कि कुंभ के बहाने बूढ़े बाप को छोड़ आए।

परिवार वालों के साथ भोला शुक्रवार को काशी पहुंचा। अमन कबीर ने बताया कि परिवार सुबह लगभग 4 बजे उनके आश्रय गृह पहुंचा। अपने पिता को देखकर बेटे और परिवार के सभी सदस्य भावुक हो गए। यह एक भावुक पल था। पिता को जीवित देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

गंगाधर मिश्रा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। डाक विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद वे अपने पैतृक गांव में परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में चार बेटियां, तीन बेटे और नाती-पोते हैं। वे 22 फरवरी को परिवार के साथ कुंभ स्नान के लिए गए थे। भीड़ में बिछड़ने के बाद कुछ यात्रियों ने उन्हें वाराणसी की बस में बिठा दिया।

5 मार्च को सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर को मुकीमगंज में सड़क किनारे एक घायल बुजुर्ग के बारे में सूचना मिली। अमन बेसहारा और परित्यक्त बुजुर्गों की सेवा करते हैं। वे मिश्रा को अपने आश्रय गृह ‘छाया-कबीर’ ले आए। कुछ दिनों बाद जब मिश्रा की हालत में सुधार हुआ, तो उन्होंने अपनी पहचान बताई। उन्होंने बताया कि वे बिहार के शेखपुरा जिले के रहने वाले हैं।

मिश्रा के परिवार ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन जब वे नहीं मिले तो उन्होंने मान लिया कि उनकी मृत्यु हो गई है। इसके बाद गांव वालों ने परिवार पर ताने मारने शुरू कर दिए। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कुंभ के बहाने अपने बुजुर्ग पिता को छोड़ दिया है। यह बात परिवार के लिए बहुत कष्टदायक थी। बेटे भोला मिश्रा ने बताया कि वे बहुत परेशान थे।

जब परिवार को मिश्रा के वाराणसी में होने की खबर मिली, तो वे तुरंत काशी पहुंचे। वे सीधे अमन कबीर के आश्रय गृह गए। वहां अपने पिता को जीवित देखकर वे भावुक हो गए। यह एक अविस्मरणीय पल था। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। अमन कबीर के प्रयासों से एक परिवार फिर से मिल गया। यह घटना मानवता की एक मिसाल है।

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