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Wednesday, May 20, 2026
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लगाके आग बहारों की बात करते हैं… महाकुंभ भगदड़ पर विपक्ष पर यूं बरसे योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में महाकुंभ और उससे जुड़ी आलोचनाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि 56 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु कुंभ में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। उन्होंने सनातन धर्म, गंगा, भारत की आस्था और महाकुंभ के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठे प्रचार की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे झूठे वीडियो और अफवाहें इन 56 करोड़ श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हैं।

योगी ने ज़ोर देकर कहा कि कुंभ किसी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे समाज का आयोजन है, और सरकार सिर्फ़ एक सेवक की भूमिका में है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी तत्परता से निभाएगी। बावजूद इन अफवाहों और दुष्प्रचार के, जनता ने इस आयोजन को सफल बनाया है। मुख्यमंत्री ने 29 जनवरी को हुई भगदड़ में पीड़ित लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। साथ ही, सोनभद्र और अलीगढ़ में हुए सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के प्रति भी उन्होंने दुःख जताया और कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। लेकिन, उन्होंने इस पर राजनीति करने पर सवाल उठाए।

योगी ने मनोज पांडे का धन्यवाद किया जिन्होंने काहिरा और नेपाल के वीडियो को कुंभ का बताकर फैलाई जा रही अफवाहों का ज़िक्र किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जो लोग 29 जनवरी की एक भगदड़ के शिकार हुए थे, उनके प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। सोनभद्र, अलीगढ़ जिनका भी जिक्र आपने किया जो सड़क दुर्घटना के शिकार हुए। हमारी संवेदनाएं उनके साथ हैं। सरकार उनके साथ खड़ी है। लेकिन इस पर राजनीति करना कितना उचित है।”

मुख्यमंत्री ने उन लोगों पर कटाक्ष किया जो कुंभ के आयोजन पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने एक कविता के माध्यम से अपनी बात रखी: “लगाके आग बहारों की बात करते हैं, जिन्होंने रात में चुन-चुनकर बस्तियों को लूटा, वही नसीबों के मारों की बात करते हैं।” उन्होंने कहा कि 56 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “आयोजन किसी पार्टी विशेष का नहीं था। आयोजन समाज का है। सरकार पीछे है। सरकार सेवक के रूप में वहां पर है। इसके लिए हम लोग तत्परता के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।”

योगी ने जनता द्वारा अफवाहों और दुष्प्रचार को नज़रअंदाज़ करके कुंभ को सफल बनाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोजन के प्रति तमाम अफवाहों और दुष्प्रचार को दरकिनार कर लोगों ने इसे सफलता की ऊंचाई तक पहुंचाया है। कुछ लोग जानबूझकर “सनातन धर्म के खिलाफ, मां गंगा के खिलाफ, भारत की आस्था के खिलाफ या महाकुंभ के खिलाफ कोई भी अनर्गल प्रलाप करते हैं। कोई झूठा वीडियो दिखाते हैं तो इन 56 करोड़ लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।

माता प्रसाद पांडेय के सवाल के विषय में योगी ने कहा कि ये समाजवादी संस्कार हैं कि हर अच्छे कार्य का विरोध करना है। उन्होंने कहा कि हिंदी इस सदन की भाषा है। योगी ने कहा कि हिंदी को तो हटाया नहीं गया। भोजपुरी, अवधी हो या बृज हो इनकी दूसरी कोई लिपि नहीं है। देवनागरी ही इनकी लिपि है। समाजवादियों के बारे में मान्यता है कि जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद भी करते हैं।

योगी ने कहा कि महाकुंभ का विरोध ये पहले दिन से कर रहे थे। महाकुंभ की तैयारियों को लेकर एक दिन की चर्चा तय की गई थी। लेकिन आपने चर्चा नहीं होने दी। लेकिन पहले दिन से ये अफवाह और दुष्प्रचार आपके द्वारा निरंतर होता रहा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महाकुंभ के बारे में कहना शुरू किया कि इतना पैसा और इतना विस्तार देने की आवश्यकता क्या है। आपकी पार्टी के नेता ने कहा कि संगम का किला, जहां वट वृक्ष है। सरस्वती नदी वहीं से निकलती है। आपको अक्षय वट का नाम भी नहीं पता, ये आपका जनरल नॉलेज है।

योगी ने कहा कि पहले दिन से ही राज्य सरकार आंकड़े दे रही है कि कितने लोग डुबकी लगा रहे हैं। लेकिन यह नहीं बता पा रहे हैं कि कितने लोगों की जान चली गई। योगी ने कहा कि आप के ही सहयोगी लालू यादव जी को महाकुंभ फालतू का महाकुंभ दिखाई देता है। मल्लिकार्जुन खरगे कहते हैं कि कुंभ भगदड़ में हजारों लोग मारे गए। जया बच्चन समाजवादी पार्टी की नेत्री कहती हैं कि व्यवस्था आम आदमी के लिए नहीं बल्कि वीआईपी के लिए हैं। शवों को गंगा में बहा दिया गया।

योगी ने कहा कि इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना बयान सपा, कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी के नेताओं द्वारा सनातन के सबसे बड़े आयोजन के प्रति दिए गए। योगी ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि क्या सनातन के आयोजन के साथ जुड़ना क्या अपराध है। अगर ये अपराध है तो हमारी सरकार ये करती रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने भी स्नान किया। आस्था के साथ जो आए उनका स्वीकार किया गया। जो चिढ़ाने आया उसे दुत्कार कर भगा दिया गया। हम इस बात को मानते हैं कि संक्रमित व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है, संक्रमित सोच का नहीं।

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