इंफाल
मणिपुर में हुई जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या को लेकर पहली बार आधिकारिक आंकड़ा जारी किया गया है। राज्य सरकार के नए सुरक्षा सलाहकार ने बताया कि मणिपुर में 3 मई से अब तक जातीय संघर्ष में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है। हालांकि अपुष्ट रिपोर्टों ने इस गिनती को 100 से अधिक बताया गया है। इसके अलावा हिंसा में 200 से अधिक घायल हुए हैं। वहीं इंफाल घाटी में रविवार को जनजीवन सामान्य होता नजर आया क्योंकि दुकानें और बाजार फिर से खुले और सड़कों पर कार भी चलती दिखीं। उधर, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने पूर्वोत्तर राज्य में शांति की अपील के साथ-साथ जातीय समुदायों के बीच एक संवाद शुरू करने की अपील की।
चुराचांदपुर में कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू में ढील
हिंसा प्रभावित मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में रविवार सुबह कर्फ्यू में तीन घंटे की ढील दी गई। इस दौरान लोगों ने दवा और भोजन जैसी आवश्यक वस्तुएं खरीदीं। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत लगाए गए कर्फ्यू में सुबह सात बजे से सुबह 10 बजे तक ढील दी गई। इससे पहले शनिवार को भी दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक दो घंटे की ढील दी गई थी।
सेना ने 23,000 लोगों को बचाया
मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए बुलाई गई भारतीय सेना और असम राइफल्स ने अब तक लगभग 23,000 नागरिकों को सफलतापूर्वक बचाया है और उन्हें ऑपरेटिंग बेस में ले जाया गया है, भारतीय सेना का एक बयान रविवार को कहा। बयान के अनुसार, बचाव अभियान शुरू होने के बाद से हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। इसके परिणामस्वरूप कर्फ्यू के घंटों में ढील दी गई है, जो अब चुराचांदपुर में सुबह 7 बजे से 10 बजे तक है।
छात्रों को निकालने में लगी फोर्स
कुल आबादी में मेइती समुदाय करीब 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासियों में नगा और कुकी शामिल हैं और आबादी में इनकी संख्या करीब 40 प्रतिशत है और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं। इस बीच, असम राइफल्स की एक टुकड़ी को इंफाल में सभी नगा छात्रों को रविवार को वापस कोहिमा ले जाने के लिए चुनिंदा जगहों से एकत्रित करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक मृतक संख्या 54 हैं जिनमें से 16 शव चुराचांदपुर जिला अस्पताल के मोर्चरी में रखे गए हैं, जबकि 15 शव इंफाल पूर्वी जिले के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान में रखे गए हैं। अधिकारी ने कहा कि इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल में क्षेत्रीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान ने 23 लोगों के मारे जाने की सूचना दी है।
सेना के कंट्रोल में हैं ये जिले
पुलिस ने बताया कि चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार रात दो अलग-अलग मुठभेड़ों में पांच उग्रवादी मारे गए और इंडिया रिजर्व बटालियन के दो जवान घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि चुराचांदपुर जिले के सैटन में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच एक मुठभेड़ हुई, जिसमें चार उग्रवादी मारे गए। पुलिस ने बताया कि टोरबंग में उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं, जिसके चलते सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी मारा गया और आईआरबी के दो जवान घायल हो गए। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने चुराचांदपुर, मोरेह, काकचिंग और कांगपोकपी जिलों को अपने कंट्रोल में ले लिया है।
कैसे भड़की मणिपुर में हिंसा
मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। नगा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर हाईकोर्ट की ओर से पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था। पुलिस के अनुसार, तोरबंग में मार्च के दौरान हथियारबंद लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर मेइती समुदाय के सदस्यों पर हमला किया। जवाबी हमले किए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा फैल गई।
हिंसक झड़पों पर ममता बनर्जी ने जताई चिंता
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि हिंसा प्रभावित मणिपुर में फंसे राज्य के लोगों को निकालने के प्रयास जारी हैं। पूर्वोत्तर राज्य में हिंसक झड़पों पर चिंता जताते हुए बनर्जी ने मुख्य सचिव एच के द्विवेदी से स्थिति की निगरानी करने और फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने ट्वीट किया कि मणिपुर से हमें जिस तरह के संदेश मिल रहे हैं, उससे गहरी पीड़ा हुई है। मैं मणिपुर के लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों के अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं, जो अब वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार लोगों के साथ प्रतिबद्धता से खड़ी है और मणिपुर सरकार के साथ बातचीत से वहां फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव को पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने और लोगों की मदद करने का निर्देश दिया गया है। हम हर समय लोगों के साथ हैं। सभी से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हैं।
