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मुसलमान मुसलमान रहे, ईसाई ईसाई रहे, बस हिंदू को सेक्युलर रहना होगा… विपक्ष पर संसद में बरसे तेजस्वी

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नई दिल्ली/कर्नाटक:

बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष और बंगलूरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने आज लोकसभा में भीमराव आंबेडकर का जिक्र कर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। सूर्या ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार, मुसलमान मुसलमान हो सकता है, ईसाई ईसाई हो सकता है, लेकिन हिंदू को धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मैंने कम्यूनिस्ट पार्टी के विपक्षी सदस्य को सुना कि आरएसएस आंबेडकर और आंबेडकर के संविधान के खिलाफ थी। ये बात सच से बहुत दूर है। एक बार नहीं, बल्कि दो बार कांग्रेस और कम्यूनिस्ट ने साथ मिलकर चुनाव में बाबा साहेब आंबेडकर को जीतने से रोकने के लिए काम किया।

तेजस्वी ने कहा कि सावित्री आंबेडकर ने अपनी किताब में लिखा है कि पंडित नेहरू के निर्देश पर एस ए डांगे ने आंबेडकर को हराने के लिए ओवरटाइम काम किया था। जब कांग्रेस और कम्यूनिस्ट आंबेडकर को हराने की कोशिश कर रहे थे, जब कम्यूनिस्ट नेता एस एस डांगे ने ये नारा दिया- ‘अपना वोट भले बर्बाद हो जाने दो लेकिन आंबेडकर को नहीं जीतने देना’, तब आरएसएस प्रचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी ने आंबेडकर को चुनाव जिताने के लिए उनके इलेक्शन एजेंट के तौर पर काम किया था।

नरेंद्र मोदी के आने के बाद ही गरीब को न्याय मिला
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं नरेंद्र मोदी के आने के बाद ही गरीब को न्याय मिला है। सबका साथ सबका विकास’, संविधान की रक्षा करने की नरेंद्र मोदी की शैली है। संसद में उन्होंने कच्चाथीवू द्वीप श्रीलंका को सौंपे जाने पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1974 में संविधान में संशोधन किए बिना कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वजह से कैसे उस वक्त की भारतीय सरकार पाल्क स्ट्रेट में एक द्वीप के नियंत्रण की लड़ाई एक छोटे से देश से हार गई। दूसरी ओर श्रीलंका (तत्कालीन सीलोन) की सरकार ने इस द्वीप छीनने के लिए पूरा जोर लगा दिया था।

सूर्या ने डीएमके पर भी बोला हमला
डीएमके सांसद ए राजा द्वारा धर्मनिरपेक्षता को संविधान का मूल ढांचा बताए जाने के बाद बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग सनातन धर्म को खत्म करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म को खत्म करने की बात करते हैं, क्या हमें डीएमके से धर्मनिरपेक्षता पर व्याख्यान लेना चाहिए। डीएमके नेता संवैधानिक नैतिकता की बात कर रहे थे, 26 नवंबर 1957 को उनके प्रेरणास्रोत पेरियार ने संविधान को दफना दिया और 200 समर्थकों की गिरफ्तारी हुई थी। क्या ऐसे लोगों से संवैधानिक नैतिकता और इतिहास का पाठ पढ़ना चाहिए?

आर्टिकल 356 का 90 से ज्यादा बार दुरुपयोग
आर्टिकल 356 का 90 से ज्यादा बार दुरुपयोग हुआ, चुनी हुई सरकारों को हटा दिया गया। वो था संविधान पर हमला। वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा देना संविधान पर हमला है। संविधान पर सबसे पहला हमला पंडित नेहरू ने किया था जब उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया था। एकदम पहला अटैक। तब कौन संविधान की रक्षा कर रहा था? वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।

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