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कोई दया नहीं… किडनैपिंग और गैंग रेप के आरोपियों को कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा

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नई दिल्ली

दिल्ली की एक अदालत ने गैंगरेप के चार दोषियों को 20 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि दोषी किसी भी तरह की रियायत के हकदार नहीं हैं। यह मामला 2015 का है, जिसमें दो महिलाओं ने नौकरी का झांसा देकर एक लड़की को दिल्ली के विनोद नगर से किडनैप किया था। इसके बाद, उस लड़की के साथ गैंगरेप किया गया। दोषी उस लड़की को बेचने की फिराक में थे और खरीदारों से बातचीत भी कर रहे थे। तभी लड़की किसी तरह वहां से भाग निकली।

पीड़िता को बदायूं के एक गांव ले गए दोषी
दोषियों पीड़िता को यूपी के बदायूं जिले के मदरपुर गांव ले गए। वहां उसे बंधक बनाकर रखा गया, मारा-पीटा गया और डराया-धमकाया गया। दोषी उस लड़की को बेचने की योजना बना रहे थे। लड़की हिम्मत दिखाकर वहां से भाग निकली।

‘दोषियों को कड़ी सजा देना जरूरी’
अडिशनल सेशन जज स्वाति कटियार की अदालत ने 4 मार्च को यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा, “दोषियों के क्रूर और अमानवीय कृत्य को देखते हुए कड़ी सजा देना जरूरी है… ताकि यह न केवल अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो, बल्कि दूसरों के लिए भी एक सबक बने। दोषी किसी भी तरह की रियायत के हकदार नहीं हैं।”

‘अपनी साहस और इच्छाशक्ति से बची पीड़िता’
जज ने कहा, “पीड़िता अपने साहस और इच्छाशक्ति से ही उस भयावह स्थिति से बच सकी, अन्यथा उसे कहीं बेच दिया जाता और उसके घर लौटने की कोई संभावना नहीं रहती।” अतिरिक्त लोक अभियोजक अंकित अग्रवाल ने अदालत के सामने कहा कि शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बावजूद, लड़की ने हिम्मत नहीं हारी और वहां से भाग निकली।

कोर्ट ने आरोपियों को दिया था दोषी करार
कोर्ट ने बीते 1 मार्च को बिजनेश और दिनेश नाम के आरोपियों को IPC की धारा 376D (गैंगरेप) के साथ-साथ किडनैपिंग, गलत तरीके से बंधक बनाने, जानबूझकर चोट पहुंचाने और साझा मंशा के तहत दोषी ठहराया। इसके अलावा दो महिलाओं रूबी और नेहा को धारा 109 (उकसाना) के साथ-साथ किडनैपिंग, गलत तरीके से बंधक बनाने, जानबूझकर चोट पहुंचाने, साझा मंशा के तहत दोषी ठहराया गया।

जज ने कहा, “अदालतों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसी सजा दें जो समाज की अंतरात्मा की आवाज को प्रतिबिंबित करे, और जहां कठोर सजा की जरूरत हो, वहां सजा देने की प्रक्रिया कठोर होनी चाहिए। ऐसे जघन्य अपराध में दया दिखाना न्याय का मजाक उड़ाना होगा। समाज की अन्य महिलाओं के कल्याण और हितों की रक्षा भी की जानी चाहिए क्योंकि अगर दोषियों को रिहा कर दिया जाता है, तो वे अपराध को दोहरा सकते हैं। सजा देने वाली अदालतों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपराध की गंभीरता के अनुरूप सजा दें।

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