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पीएम से कोई व्‍यक्तिगत संबंध नहीं… प्राण प्रतिष्‍ठा पर सवाल उठा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताई आपत्ति की वजह

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नई दिल्‍ली

उत्तराखंड ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में हैं। 22 जनवरी को अयोध्‍या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्‍ठा समारोह से पहले उनकी आपत्ति से माहौल गरम है। उन्‍होंने सवाल उठाया है कि शंकराचार्यों के योगदान को सामने रखने की कोशिश ही नहीं की जा रही है। इसके उलट सच यह है कि उन्‍होंने ही कोर्ट में प्रमाण रखे। इसी के चलते हिंदुओं के पक्ष में फैसला आया। सड़क पर आंदोलन करने से कोर्ट ने आदेश नहीं दिया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हमारे साथ विशेष बातचीत में यह भी कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनका कोई व्‍यक्तिगत संबंध नहीं है। उनकी पीएम से कभी कोई बात नहीं हुई है। इस दौरान उन्‍होंने अपनी आपत्ति की वजह को भी बताया।

शंकराचार्यों के योगदान को सामने नहीं रखा गया
प्राण प्रतिष्‍ठा समारोह की तैयारियों के बीच स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्यों के योगदान को सामने नहीं रखा जा रहा है। अगर आज रामलला का अपनी जगह बैठने का माहौल बना हुआ है तो उसके पीछे शंकराचार्य ही हैं। जो लोग रामलला को लाने की बात कर रहे हैं उनसे पूछना चाहिए कि ऐसा सड़क पर चिल्‍लाने की वजह से हुआ है या न्‍यायालय के फैसले से। अदालतों में हिंदुओं के पक्ष में फैसला सड़क पर आंदोलन करने से नहीं आया है। 90 दिन की बहस हाईकोर्ट में हुई थी। इसमें 50 दिन की बहस मुसलमानों की ओर से हुई थी। 40 दिन हिंदुओं की तरफ से हुई थी। उसमें से 24 दिन शंकराचार्यों ने बहस की है। उन्‍होंने 350 से ज्‍यादा प्रमाण रखे। उनके वकीलों ने दिन-रात एक कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में भी 40 दिन की बहस में लगातार 4 दिन शंकराचार्यों की बहस है।

प्राण प्रतिष्‍ठा पर बताई आपत्ति की वजह
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्‍ठा पर सवाल उठाया है। एनबीटी.कॉम से बातचीत में स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी आपत्ति की वजह बताई। उन्‍होंने कहा कि मंदिर भगवान का शरीर होता है। उसके अंदर की मूर्ति आत्मा होती है। मंदिर का शिखर भगवान की आंखें हैं। कलश भगवान का सिर है। मंदिर में लगा झंडा भगवान के बाल हैं। बिना सिर या आंखों के शरीर में प्राण-प्रतिष्ठा कैसे हो सकती है। यह शास्त्रों के विरुद्ध है।

पीएम मोदी के साथ कोई व्‍यक्‍त‍िगत संबंध नहीं…
जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से सवाल किया गया कि क्‍या उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई व्‍यक्तिगत नाराजगी है तो उन्‍होंने इसका दो-टूक जवाब दिया। वह बोले कि पीएम से उनकी कोई व्‍यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उनसे कोई व्‍यक्तिगत संबंध भी नहीं है। जिससे व्‍यक्तिगत संबंध होता है, उसी से व्‍यक्तिगत नाराजगी या प्रसन्‍न्‍ता होती है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे यह भी कहा कि उनकी प्रधानमंत्री से कभी मुलाकात नहीं हुई। न कभी बातचीत हुई। हां, एक नागरिक के नाते उनका रिश्‍ता जरूर है। वह अपने प्रधानमंत्री और अन्‍य मंत्रियों को मजबूत देखना चाहते हैं।

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