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Thursday, May 7, 2026
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अब तो ना ही है… AAP का कैसे सपोर्ट करेगी कांग्रेस, नीतीश कुमार निकाल पाएंगे कोई हल

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नई दिल्ली

केजरीवाल को समर्थन देने के मुद्दे पर कांग्रेस की एक अहम बैठक कल दिल्ली में हुई। इस मीटिंग से क्या निकल कर आता है इस पर कांग्रेस नेताओं से कहीं अधिक AAP की नजर थी। केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस से समर्थन मांगा था। दिल्ली और पंजाब के नेताओं ने आलाकमान को बता दिया है कि हमें केजरीवाल के साथ खड़े होने से बचना चाहिए। इस मीटिंग के बाद नेताओं के जैसे बयान सामने आए उससे लगता है कि इसकी गुंजाइश कम है कि कांग्रेस अध्यादेश के खिलाफ केजरीवाल का समर्थन करेगी। कांग्रेस के इस फैसले का असर विपक्षी एकजुटता पर भी पड़ सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार इस कोशिश में हैं कि सभी दलों को साथ आना चाहिए। कर्नाटक में जब केजरीवाल को न्योता कांग्रेस की ओर से नहीं मिला उसके बाद नीतीश की मुलाकात दिल्ली के मुख्यमंत्री से होती है। इस मीटिंग के बाद जो बयान सामने आए उसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस और केजरीवाल की पार्टी दोनों साथ आ सकते हैं।

सीधे ना नहीं बोला लेकिन इशारा मिल गया
दिल्ली और पंजाब के नेताओं ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इनमें से अधिकांश नेताओं ने दिल्ली को लेकर लाए गए केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ केजरीवाल के साथ नहीं खड़े होने की पैरवी की। दिल्ली कांग्रेस और पंजाब के नेताओं ने खरगे और राहुल से अलग-अलग मीटिंग की। मीटिंग के बाद पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि ज्यादातर नेताओं की यही राय थी कि हमें केजरीवाल के साथ खड़े होने से बचना चाहिए। इस मीटिंग के बाद कांग्रेस आलाकमान अपने रुख को लेकर जल्द फैसला करेगी। इस बैठक से पहले भी कांग्रेस के कई नेता खुलकर अपना विरोध जता चुके थे। प्रदेश नेताओं ने तो सीधे-सीधे ही ना बोल दिया है और इससे मैसेज भी AAP को गया है कि हम साथ नहीं आने वाले।

विपक्ष के गठबंधन में आखिर कैसे शामिल होंगे केजरीवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने इस अध्यादेश के विषय पर दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने आलाकमान से आग्रह किया था कि वह इस मामले में AAP और केजरीवाल का समर्थन न करें। बैठक के बाद केजरीवाल से गठबंधन संबंधी सवाल पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा जहां वैचारिक मतभेद हों, वहां गठबंधन नहीं हो सकता।

केजरीवाल की अपील पर नीतीश, ममता, केसीआर समेत कई दूसरे दल उनके साथ आए हैं लेकिन कांग्रेस का स्टैंड काफी मायने रखता है। अब कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने केजरीवाल से दूरी बनाए रखने का फैसला कर लिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अब विपक्ष को लेकर उनकी ओर से क्या बयान सामने आते हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से पहले लगातार यह बयान आते रहे हैं कि वह देश में बीजेपी की विकल्प है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से विपक्षी एकजुटता की बात हो रही थी।

नीतीश कुमार क्या निकाल पाएंगे कोई हल
पिछले दिनों कर्नाटक के शपथ ग्रहण समरोह में कांग्रेस की ओर से केजरीवाल को न्योता नहीं मिला था। शपथ ग्रहण के अगले ही दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली के सीएम केजरीवाल से मुलाकात होती है। दोनों की मुलाकात के बाद अध्यादेश के खिलाफ AAP सरकार का समर्थन देने की बात नीतीश कहते हैं। वहीं केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विपक्ष को एकजुट होकर केंद्र सरकार के तानाशाही अध्यादेश को संसद में हराना होगा। राज्यसभा में बिल पारित नहीं हुआ तो यह 2024 का सेमीफाइनल होगा और पूरे देश में यह मैसेज जाएगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सरकार जा रही है। जिस प्रकार नीतीश विपक्ष को एकजुट करने की अगुवाई कर रहे हैं और केजरीवाल का जो मैसेज था उसके बाद ही साथ आने की चर्चा शुरू हुई। अब कांग्रेस के फैसले के बाद नीतीश कुमार क्या कोई फॉर्मूला पेश कर सकते हैं। कैसे बात आगे बढ़ेगी इस पर भी नजर रहेगी।

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