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बाहरी लोग नहीं खरीद पाएंगे जमीन… उत्तराखंड विधानसभा में पास हुआ कठोर भूमि विधेयक

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देहरादून

उत्तराखंड में सशक्त भूमि-कानून बनाने के लिए राज्य विधानसभा में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) संशोधन विधेयक पेश किया गया। विधानसभा में भू-कानून विधेयक पास हो गया। इसका कानून का उद्देश्य प्रदेश में भूमि की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाना है।

सदन में विधेयक पेश किए जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए भूमि संसाधन का बेहतर उपयोग किए जाने के लिए आज विधानसभा के पटल पर सख्त भूमि विधेयक पेश कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनता के हितों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उनके विश्वास को कभी टूटने नहीं देगी। निश्चित तौर पर यह कानून प्रदेश के मूल स्वरूप को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।

राज्य के लोग लंबे समय से प्रदेश में एक सशक्त भू-कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सख्त भू-कानून पेश करने की अपनी मंशा पहली बार पिछले साल सितंबर में जाहिर की थी। उन्होंने तब बताया था कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर जमीन खरीदने के मामलों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा था कि लंबे समय से चली आ रही सख्त भू कानून की मांग पूरी की जाएगी। धामी ने कहा कि यह भू कानून राज्य की जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप है। राज्य के लोगों के अनुसार भूमि खरीद की ऊपरी सीमा न होने से प्रदेश की सीमित कृषि भूमि और कम हो रही है।

भू-कानून में क्या है
  • निकाय सीमा में तय भू-उपयोग से हटकर जमीन के इस्तेमाल करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
  • राज्य में साढ़े 12 एकड़ से अधिक जमीन खरीद की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
  • पहाड़ों पर चकबंदी और बंदोबस्ती को तेजी से पूरा किया जाएगा।
  • हरिद्वार और उधम सिंह नगर को छोड़कर शेष 11 जिलों में बाहरी प्रदेशों के लोग जमीन नहीं खरीद सकेंगे।
  • बाहरी लोगों को जमीनों की खरीदारी के लिए अब डीएम अनुमति नहीं दे पाएंगे, इसके लिए शासन के पास जाना होगा।
  • प्रदेश में जमीन खरीद के लिए पोर्टल बनाया जाएगा, जिसमें राज्य के बाहर के लोगों की एक-एक इंच जमीन खरीद का भी ब्योरा दर्ज होगा।
  • प्रयोजनों के लिए ली गई जमीन का उपयोग नियमों से हटकर किया गया, तो वह जमीन स्वत: ही सरकार में निहित हो जाएगी।
  • भूमि की कीमतों में अप्राकृतिक बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा और राज्य के मूल निवासियों को भूमि खरीदने में सहूलियत होगी।

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