इस्लामाबाद:
पाकिस्तान अपनी परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रहा है। अब यह अपने सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण कर रहा है। इसके लिए देश की परमाणु ऊर्जा नियामक एजेंसी ने लाइसेंस जारी कर दिया है। पाकिस्तान परमाणु नियामक प्राधिकरण (PNRA) ने चश्मा न्यूक्लियर पावर प्लांट यूनिट 5 (C-5) के लिए लाइसेंस प्रदान किया है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट 1200 मेगावाट बिजली की क्षमता वाला होगा, जो इसे देश का सबसे बड़ा परमाणु बिजली उत्पादन प्लांट बनाता है। इसके निर्माण में पाकिस्तान का दोस्त चीन उसकी मदद कर रहा है।
शहबाज शरीफ ने दी बधाई
प्लांट के बारे में जानकारी देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, ‘सबसे आधुनिक और सबसे बड़े सी-5 परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण की शुरुआत पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक सहयोग में एक और मील का पत्थर है। यह प्लांट 1200 मेगावाट बिजली का योगदान देगा। मैं इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए PAEC और CNNC को बधाई देता हूं। पाक चीन दोस्ती जिंदाबाद।’
पीएनआरए ने बताया कि पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग ने इस साल अप्रैल में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिसमें परमाणु सुरक्षा, विकिरण सुरक्षा, आपातकालीन तैयारी, अपशिष्ट प्रबंधन और परमाणु सुरक्षा को कवर करने वाली प्रारंभिक सुरक्षा आकलन रिपोर्ट और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
चीनी डिजाइन का रिएक्टर
सी-5 प्रोजेक्ट के नवीनतम निर्माण में चीनी फर्म हुआलोंग का डिजाइन किया हुआ एडवांस तीसरी पीढ़ी का प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर है। यह डिजाइन पाकिस्तान के दो न्यूक्लियर पॉवर प्लांट में पहले से लागू किया गया है, जिससे चश्मा ऐसा करने वाला तीसरा प्लांट बन गया है। कराची परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट 2 और 3 पहले से ही सफलतापूर्वक काम कर रही हैं
3.5 अरब डॉलर होगी लागत
सी-5 की कुल लागत 3.5 अरब डॉलर निर्धारित की गई है और इसे राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति से पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। पाकिस्तान के पास वर्तमान में 3530 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों का 27 प्रतिशत पूरा करती है। चश्मा परमाणु ऊर्जा उत्पादन स्टेशन साइट पर पहले ही दो न्यूक्लियर पावर प्लांट हैं, जो सी-1 और सी-2 के माध्यम से 325 मेगावाट और सी-3 व सी-4 के माध्यम से 340 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं। सी-5 के जुड़ने से यह न्यूक्लियर पावर प्लांट देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा, जिसकी बिजली उत्पादन क्षमता कम से कम 1200 मेगावाट होगी।
