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प्रफुल्ल कैबिनेट बर्थ की वेटिंग में, भुजबल राज्यसभा सीट पर नाराज… अजित पवार की पार्टी में चल क्या रहा है?

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मुंबई,

महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में गजब का घमासान मचा हुआ है. पार्टी में एक साथ महात्वाकांक्षाओं का टकराव देखने को मिल रहा है. पार्टी के सीनियर नेता प्रफुल्ल पटेल केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं हुए. उन्होंने वजह बताई कि उन्हें सीनियरिटी के हिसाब से मनपसंद पोर्टफोलियो नहीं मिल रहा था. तो वहीं रायगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव जीतने वाले सुनील तटकरे बतौर राज्यमंत्री ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने को तैयार थे. लेकिन प्रफुल्ल पटेल ने उन्हें रोक लिया.

अब खींचतान की एक नई वजह इस पार्टी में महाराष्ट्र में सामने आई है. एनसीपी ने अब पार्टी अध्यक्ष अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भी भर दिया है. लेकिन पार्टी के इस फैसले पर एनसीपी के सीनियर नेता छगन भुजबल नाराज दिख रहे हैं. सुनेत्रा को राज्यसभा भेजने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए छगन भुजबल ने कहा है कि वे निश्चित रूप से राज्यसभा जाने के लिए उत्सुक थे. हालांकि अब पार्टी ने ‘सर्वसहमति’ से सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया है. बता दें कि सुनेत्रा पवार बारामती सीट से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ लोकसभा का चुनाव हार चुकी हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजे अजित पवार की एनसीपी के लिए झटके और परेशानियां लेकर आई. इस चुनाव में पार्टी को मात्र एक सीट पर जीत मिली. ये जीत हासिल की सुनील तटकरे ने.

दिल्ली में जब नरेंद्र मोदी सरकार गठन करने के लिए मंत्रिमंडल का फॉर्मूला तय किया जाने लगा तो सीटों की हैसियत के आधार पर अजित पवार की पार्टी को मात्र एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद ऑफर किया गया. एनसीपी की ओर से मंत्री पद की इस रेस में प्रफुल्ल पटेल सबसे आगे थे. लेकिन सुनील तटकरे भी उनके पीछे थए. सुनेत्रा पवार पहले ही चुनाव हार चुकी थीं.

हालांकि जब प्रफुल्ल पटेल को पता चला कि उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया जा रहा है तो उन्होंने ये पोस्ट लेने से इनकार कर दिया. एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने अपनी सीनियरिटी का हवाला देते हुए कहा कि वह पूर्व में भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं ऐसे में राज्यमंत्री का पद लेना उनके लिए उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा था कि राज्यमंत्री बनना मेरे लिए डिमोशन जैसा होगा.

प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उन्हें फिलहाल इंतजार करने को कहा गया है और बताया गया है कि उनकी मांग पर आने वाले समय में विचार किया जाएगा. यानी कि पटेल को कैबिनेट बर्थ का इंतजार है. पटेल ने यह भी कहा था कि इसमें उनकी ओर से नाराजगी वाली कोई बात नहीं है.

हालांकि प्रफुल्ल पटेल को तब इस पद के लिए चुनौती मिल रही थी अपनी पार्टी के सुनील तटकरे से. सुनील तटकरे का दावा है कि वे पार्टी के इकलौते सांसद हैं इसलिए केंद्र की ओर से मिलने वाली कुर्सी पर उनका हक बनता है. बता दें कि प्रफुल्ल पटेल राज्यसभा से सांसद हैं. इस खींचतान में फिलहाल एनसीपी की ओर से कोई भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुआ है.

इधर अजित पवार अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने का मन बना चुके हैं. सुनेत्रा पवार बारामती से सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव हार चुकी हैं. अब एनसीपी बीजेपी के सहयोग से सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेज रही है.

लेकिन सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने के फैसले से पार्टी के दूसरे कद्दावर नेता नाराज हो गए हैं. पार्टी का ओबीसी चेहरा छगन भुजबल ने कहा कि वे निश्चित रूप से राज्यसभा जाना चाहते थे. लेकिन अब पार्टी ने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. भुजबल ने कहा है कि वे दुखी तो नहीं हैं लेकिन वे राज्यसभा जाना चाहते थे.

जब छगन भुजबल से पूछा गया कि क्या पार्टी में सभी फैसले अजित पवार, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की ओर से लिए जाते हैं और क्या वे खुद को कटा हुआ महसूस करते हैं. इस पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में पार्टी के अध्यक्ष अजित पवार हैं. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल हैं, और क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनील तटकरे हैं. मुझे छोड़ देने का कोई सवाल ही नहीं है. मैं खुद कल की बैठक में शामिल था. यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है.

सुनेत्रा पवार की ओर इशारा करते हुए जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्यसभा में हारे हुए कैंडिडेट की बैकडोर एंट्री करवाई जा रही है तो उन्होंने कहा कि हम पार्टी के फैसले को स्वीकार कर करते हैं. बता दें कि पार्टी में कुछ नेता छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि ओबीसी चेहरे भुजबल को मंत्री बनाने से पार्टी को फायदा होगा.

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