नई दिल्ली,
स्वीडन में कुरान जलाने की घटना पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पवित्र कुरान के अपमान को कुछ देशों में अपराध के रूप में नहीं देखा जाता है, लेकिन रूस में इसके लिए दंड का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में, यह संविधान और दंड संहिता दोनों के अनुसार एक अपराध है। ऐसा अपराध अगर रूस में होता तो दोषी को निश्चित रूप से दंडित किया जाता। पुतिन ने यह बयान रूसी संघ के दागिस्तान स्वायत्त गणराज्य में डर्बेंट की अपनी यात्रा के दौरान दिया। इस यात्रा में उन्होंने डर्बेंट की ऐतिहासिक मस्जिद का दौरा किया और दागिस्तान के मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की।
पुतिन को गिफ्ट में मिला कुरान
रूसी समाचार एजेंसी TASS ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन को जुमा मस्जिद की यात्रा के दौरान उपहार के रूप में पवित्र कुरान की एक प्रति मिली। उन्होंने उपहार के लिए मुस्लिम नेताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कहा कि कुरान मुसलमानों के लिए पवित्र है और दूसरों के लिए भी पवित्र होना चाहिए। हम हमेशा इन नियमों का पालन करेंगे।
स्वीडन में कुरान जलाने की घटना के बाद बोले पुतिन
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का यह बयान बुधवार को स्टॉकहोम की केंद्रीय मस्जिद के बाहर एक व्यक्ति द्वारा पवित्र कुरान की प्रति फाड़ने और जलाने के बाद आया है। स्वीडन की पुलिस ने बाद में उस व्यक्ति पर एक जातीय या राष्ट्रीय समूह के खिलाफ आंदोलन का आरोप लगाया। स्वीडन में इस्लाम के खिलाफ प्रदर्शनों की एक श्रृंखला ने तुर्की सहित मुस्लिम जगत को नाराज कर दिया है। तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस्लाम विरोधी प्रदर्शनों की अनुमति देना अस्वीकार्य है।
पहले भी कुरान जलाने का विरोध कर चुका है रूस
जनवरी में, जब स्वीडन में इसी तरह की घटना हुई थी, तो रूसी विदेश मंत्रालय ने पवित्र कुरान को जलाने को इस्लामोफोबिया का एक और उत्तेजक कृत्य बताया था। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इन निंदनीय कार्रवाइयों ने रूसी मुस्लिम समुदाय सहित इस्लामी दुनिया में अनुमानित रूप से कठोर प्रतिक्रिया को उकसाया है।
दागिस्तान की मस्जिद भी गए पुतिन
पुतिन ने दागिस्तान की जुमा मस्जिद का भी दौरा किया. यह मस्जिद दर्बेंट में है. उन्हें इस दौरान कुरान भी भेंट में दी गई. दर्बेंट संग्रहालय संरक्षक के निदेशक वेली फैटालियेव ने कहा कि हमने हमारे राष्ट्रपति को पवित्र कुरान दी है.
कुरान जलाए जाने पर भड़के इस्लामिक देश
स्वीडन में विरोधस्वरूप कुरान जलाए जाने की घटना पर इस्लामिक देशों न आपत्ति जाहिर की है. इराक, ईरान, तुर्की, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात इसका विरोध कर रहे हैं.इराक ने स्वीडन में कुरान जलाए जाने को मंजूरी देने वाले फैसले की निंदा की है. इराक के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से दुनियाभर के मुस्लिमों की भावनाएं आहत हुई हैं और यह एक तरह से उकसावे वाला कदम है.
इराक के शिया मौलवी मौकतदा सद्र ने बगदाद में स्वीडन के दूतावास के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है और राजदूत को हटाने की मांग की है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि ईरान की सरकार और लोग कुरान के इस तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकते और इसकी कड़ी निंदा करते हैं.
सऊदी अरब ने भी कुरान जलाए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह के घृणित कृत्य का कोई जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता. अरब जगत के सबसे अधिक आबादी वाले देश मिस्र ने भी स्वीडन में कुरान जलाए जाने को मुस्लिमों की भावनाएं भड़काने वाला घृणित अपराध बताया. अरब लीग ने इस इस्लामि मूल्यों पर हमला बताया.
वहीं, कुवैत ने कुरान जलाने वाले शख्स को जल्द से जल्द दंडित करने की मांग करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस्लाम के मूल्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.मोरक्को और खाड़ी सहयोग परिषद के छह सदस्य देशों ने भी कुरान जलाए जाने पर आपत्ति जताए हुए स्वीडन के राजदूत को तलब किया है.
क्या है मामला?
स्वीडन में सलवान मोमिका नाम के शख्स ने देश की मुख्य मस्जिद के बाहर कुरान जलाकर प्रदर्शन किया था. उसने इस्लाम के विरोध में मस्जिद के बाहर कुरान की प्रति जलाकर विरोध जताया था.मोमिका ने कहा था कि हम मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है लेकिन हम उनके विचारों और मान्यताओं के खिलाफ हैं. लेकिन मुस्लिम धर्म का बहुत नकारात्मक असर पड़ा है और इसे दुनियाभर में बैन किया जाना चाहिए.
पुलिस ने क्यों दी थी मंजूरी
इससे पहले स्वीडन पुलिस ने फरवरी में इराक के दूतावास के बाहर उन्हें कुरान जलाने से रोक दिया था. पुलिस का कहना था कि इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है. एक एंटी नाटो समूह पर भी कुरान की प्रति जलाने पर बैन लगाया गया है.
लेकिन इस साल अप्रैल में कोर्ट ने इस बैन को हटा दिया. कोर्ट ने कहा कि देश के संविधान के तहत प्रदर्शनकारियों के पास एकजुट होने और प्रदर्शन करने का अधिकार है. लेकिन वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बनने चाहिए. अदालत ने यह कहकर इन प्रदर्शनों को मंजूरी दी है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी है. इससे पहले प्रदर्शनकारी ने स्टॉकहोम में इराक के दूतावास के बाहर कुरान जलाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन उस समय पुलिस ने उसके अनुरोध को खारिज कर दिया था. इसके बाद शख्स ने कोर्ट का रुख किया था.
