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खुद सोफे पर बैठे राहुल-सोनिया, खरगे के लिए साइड में लगाई कुर्सी… बीजेपी ने कांग्रेस को बताया दलित विरोधी

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नई दिल्ली:

गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस अधिवेशन का आज समाप्त हो गया। कांग्रेस अधिवेशन में एक बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए साइड में अलग कुर्सी लगाई गई, जबकि राहुल गांधी और सोनिया गांधी सोफे पर बीच में बैठे थे। इसे लेकर बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथ ले लिया। बीजेपी ने कांग्रेस पर दलित नेता का अपमान करने का आरोप लगाया।

बीजेपी ने साधा कांग्रेस पर निशाना
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर इस घटना का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले खड़गे जी का सम्मान करना सीखो। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी कुर्सी किनारे पर लगाने का क्या मतलब था? यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस दलित विरोधी है।” इस घटना को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज कसा और पार्टी के अंदरूनी तनाव की बात उठाई।

राहुल गांधी के हमले पर बीजेपी का पलटवार
अमित मालवीय ने खरगे वाला वीडियो राहुल गांधी के एक पोस्ट के जवाब में शेयर किया। इस पोस्ट में राहुल ने बीजेपी पर दलित विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाया था। राहुल ने एक वीडियो शेयर कर लिखा था, बीजेपी की दलित विरोधी और मनुवादी सोच का एक और उदाहरण! बीजेपी लगातार दलितों को अपमानित और संविधान पर आक्रमण करती आ रही है। इसलिए संविधान का सिर्फ सम्मान नहीं, उसकी सुरक्षा भी ज़रूरी है। मोदी जी, देश संविधान और उसके आदर्शों से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं जो बहुजनों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानती है।’

कांग्रेस पर गांधी परिवार को तवज्जो देने के लगते रहे हैं आरोप
ऐसा पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान करने और गांधी परिवार को तवज्जो देने का आरोप लगा है। अहमदाबाद अधिवेशन में खरगे को अलग कुर्सी पर बैठाए जाने की घटना ने पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। यह पार्टी में गांधी परिवार की प्राथमिकता को दर्शाता है। भले ही मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी अध्यक्ष हों, लेकिन इस आयोजन में राहुल और सोनिया गांधी को केंद्र में रखा गया। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि कांग्रेस में औपचारिक नेतृत्व से ज्यादा गांधी परिवार का प्रभाव हावी है।

कांग्रेस के पूर्व नेता ने भी जताई थी आपत्ति
कांग्रेस के पूर्व नेता टॉम वडक्कन ने भी कांग्रेस पर गांधी परिवार के दबदबे पर सवाल उठाए थे। वडक्कन ने कहा था, “पार्टी में स्वाभिमानी कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गांधी परिवार के इर्द-गिर्द ही सारी सत्ता केंद्रित है, और अन्य नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने कहा था कांग्रेस चाहे जो भी व्यवस्था अपना ले, चाहे गहलोत अध्यक्ष बनें या थरूर, वे महज कठपुतली होंगे। पार्टी की कमान राहुल गांधी के हाथ में ही होगी, बस वह’बैकसीट’ से पार्टी चला रहे होंगे।

कांग्रेस में हमेशा रहा गांधी परिवार का दबदबा
कांग्रेस पार्टी का गांधी परिवार के साथ गहरा रिश्ता रहा है। नेहरू-गांधी परिवार ने दशकों तक पार्टी का नेतृत्व किया है, और यह परिवार पार्टी की पहचान का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, और अब सोनिया व राहुल गांधी तक, इस परिवार ने पार्टी को कई बार सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई है।

गांधी परिवार से इतर नेताओं को भी देनी होगी प्राथमिकता
कांग्रेस में गांधी परिवार की प्राथमिकता एक दोधारी तलवार है। एक तरफ यह पार्टी को एकजुट रखने में मदद करता है, लेकिन दूसरी तरफ यह अन्य नेताओं में असंतोष पैदा करता है। खरगे की कुर्सी की घटना और टॉम वडक्कन के बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पार्टी को नेतृत्व में संतुलन लाने की जरूरत है। अगर कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना है, तो उसे गांधी परिवार के साथ-साथ अन्य नेताओं को भी आगे बढ़ाने की रणनीति बनानी होगी। जवाबदेही और समावेशिता ही पार्टी को नई दिशा दे सकती है।

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