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Wednesday, March 18, 2026
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कैबिनेट में बगावत, अपनों की नाराजगी, सुशासन पर सवाल, इतने बेबस तो कभी न थे ‘सरकार’

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पटना

अब इसे विडंबना कहे या राज्य में बदली राजनीतिक स्थितियों का तकाजा। घटी घटनाओं के आधार का सच तो ये है सुशासन की सरकार के पर्याय माने जाने वाले नीतीश कुमार का ये मुख्यमंत्रित्व काल ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक हमले तो हो ही रहे हैं, अब तो सरकार के भीतर मंत्रिमंडल के साथियों का बयान भी किसी स्वस्थ स्थिति की प्रतीति तो नहीं लग रही है। प्रशासनिक स्थितियों से भी लगाम इस कदर ढीला हो गया कि खुद नीतीश कुमार को उतर कर कहना पड़ा जंगल राज नहीं जानता राज है। ये दीगर कि राज्य कई अप्रिय घटनाओं के आगाज के साथ अव्यवस्थित होते दिख रहा। राजनीतिक गलियारे में तो यह चर्चा का विषय बन गया कि महागंठबंधन की सरकार में जाना वैसा हुआ, जैसे सर मुड़ाते ओले पड़ना।

मंत्रिपरिषद के भीतर सब कुछ ठीक नहीं
कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का बॉडी लैंग्वेज तो असंतुष्टि जताता भी है और विरोध का स्वर भी ऐसा कि जैसे वो किसी विपक्षी मुख्यमंत्री पर आरोप लगा रहे हों। कैबिनेट की बैठक में शायद ये पहली बार हुआ हो जब किसी मंत्री ने आंख से आंख मिलाकर प्रतिकार करते यहां तक कह डाला कि कृषि विभाग के सारे अधिकारी चोर हैं । वो भी तब जब नीतीश कुमार का मानना है सुशासन की सरकार बेहतर प्रशासनिक क्षमता की देन है। आश्चर्य तो ये है कि तब डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव ने भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया। समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी कहते है कि विभाग में फंड की कमी नहीं है। इससे दीगर वित्त मंत्री विजय चौधरी कहते हैं कि केंद्र सरकार के कारण फंड की काफी कमी है। इतना भर ही नहीं वित्त मंत्री ने यहां तक कह डाला कि केंद्र पूरे पैसे नहीं भेजता है तो राज्य सरकार अपने संशाधनों से कार्य पूरा कर रही है।

नीतीश की ड्रीम प्रोजेक्ट कृषि रोड मैप को नकारा
राज्य के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने एक कार्यक्रम में एनडीए सरकार का तीनों रोड मैप फ्लॉप कहा। आरोप भी बहुत तीखा कि न उत्पादन बढ़े न उत्पादकता बढ़ी आर न किसानों की आमदनी ही बढ़ी। गत सरकार जिस तय किए गए न्यूनतम खरीद मूल्य निर्धारण को किसानों की आमदनी मानती है उससे लगभग किसान वंचित हैं। वे सब अधिकारियों के फजीहत से परेशान बिचौलियों को बेच कर चले आते हैं। कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने इथेनॉल नीति पर भी सरकार को घेरा। गन्ना के बाइप्रोडक्ट तक तो स्वीकार्य है। मगर मक्का और चावल से इथेनॉल के प्रोडक्शन का मैं पूरी तरह से विरोधी हूं। लोगों के पेट में अनाज नहीं और अमीरों की गाड़ी चलाने हेतु इथेनॉल का उत्पादन का मैं विरोधी हूं।

मोडिफाइड जीन पर किया गया काम व्यर्थ
कृषि मंत्री ने देश भर में कृषि की बेहतरी के लिए बीज पर किए गये प्रयोग को नकारते कहा कि नाटा मंसूरी का तो वैज्ञानिक कोई विकल्प ढूंढ नहीं पाए। सुशासन के बाद कृषि रोड मैप ही नीतीश कुमार की देश भर में प्रयोगधर्मिता की पहचान बनाई, जिसे कृषि मंत्री ने अपने वक्तव्यों से एक पल में धराशाई कर राजनीत के एक नए मुकाम का आभास करा दिया।

सुशासन पर भी लगातार चोट
महागंठबधन की सरकार बनते ही कई ऐसी घटनाओं ने सुशासन की पोल खोलते जंगल राज का आगाज करा दिया। अब कल की ही बात करें तो बेगूसराय की घटना क्या रिफ्लेक्ट करती है? कोई नौजवान बरौनी थर्मल से बछवाड़ा तक यूं ही गोली चलाते गुजरकर नौ लोगों को गोली मरता है और एक की हत्या कर देता है। इस बीच पुलिस-प्रशासन कहीं नजर नहीं आता है। इसके पहले भी पूर्व एमएलसी अनवर अहमद का थाने पर हमला, हाजीपुर में खनन पदाधिकारी पर भरी वाहन चढ़ाने की कोशिश प्रशानिक क्षमता की शिथिलता नहीं बता जाता है?

राजनीतिक हमले भी ताबड़तोड़
महागंठबंधन की सरकार के मुख्यमंत्री बनते नीतीश कुमार के हाथ से मणिपुर चला गया। अब लगे हाथ दमन-दीव पर पकड़ छूट गई। पूरी जदयू इकाई ही भाजपा में चली गई। एक-एक कर साथी छूटते जा रहे हैं। आरसीपी गए, निखिल मंडल का साथ छूटा। प्रवक्ता आलोक रंजन का साथ छूटा। और जो नीतीश कुमार के फोल्डर में नेता मसलन ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा हैं। ये वही हैं, जो इनके विरुद्ध राजनीति को अंजाम देने में लगे थे। ललन सिंह तो कांग्रेस में जाकर नीतीश कुमार को अपदस्थ करने का सपना देख रहे थे। उपेंद्र कुशवाहा ने तो मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए रालोसपा का गठन तक कर लिया था।

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