नई दिल्ली,
सरकारी पदों पर ‘लेटरल एंट्री’ को लेकर देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। इस बीच सरकार के अंदर से भी आवाज मुखर होने लगी है।केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने ‘लेटरल एंट्री’ पर मचे सियासी बवाल को लेकर सोमवार को कहा कि मेरी पार्टी इससे कतई सहमत नहीं है। मैं खुद इसे सरकार के समक्ष रखूंगा। पासवान केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में सहयोगी हैं।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ‘मैं और मेरी पूरी पार्टी स्पष्ट राय रखती है कि सरकारी को कोई भी नियुक्तियां, उसमें आरक्षण के प्रावधानों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। निजी क्षेत्रों में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कोई भी सरकारी नियुक्ति होती है, चाहे किसी भी स्तर पर हो, उसमें आरक्षण के प्रावधानों को ध्यान रखना चाहिए। इसमें नहीं रखा गया है, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। मैं खुद सरकार का हिस्सा हूं और मैं इसे सरकार के समक्ष रखूंगा। हां… मेरी पार्टी इससे कतई सहमत नहीं है।’
क्या बोले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान?
चिराग पासवान ने कहा, “किसी भी सरकारी नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए. इसमें कोई शक-शुबहा नहीं है. निजी क्षेत्र में कोई आरक्षण नहीं है और अगर इसे सरकारी पदों पर भी लागू नहीं किया जाता है… यह जानकारी रविवार को मेरे सामने आई और यह मेरे लिए चिंता का विषय है.” चिराग पासवान ने कहा कि सरकार के सदस्य के तौर पर उनके पास इस मुद्दे को उठाने का मंच है और वह ऐसा करेंगे. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जहां तक उनकी पार्टी का सवाल है, वह इस तरह के उपाय के बिल्कुल भी समर्थन में नहीं है.
यूपीएससी ने निकाली 45 पदों पर भर्ती
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने हाल ही में कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर लैटरल एंट्री के जरिए 45 पदों पर भर्ती निकाली है. इनमें संयुक्त सचिवों के लिए 10 और निदेशकों या उप सचिवों के लिए 35 पद शामिल हैं. आयोग के इस कदम का पुरजोर विरोध हो रहा है.
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि यह बीजेपी द्वारा रिजर्वेशन पॉलिसी को खत्म करने और सहयोगियों को अहम पदों पर भर्ती करने के लिए जानबूझकर इस तरह की कोशिश कर रही है.
लेटरल एंट्री सिस्टम का सरकार ने किया बचाव
आलोचनाओं के जवाब में, बीजेपी ने लेटरल एंट्री पहल का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के तहत शुरू की गई भर्ती प्रक्रियाओं में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना है.केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस के विरोध को पाखंडी करार दिया और बताया कि लेटरल एंट्री की पहल का प्रस्ताव यूपीए के दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा दिया गया था. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार शासन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पारदर्शी तरीके से इन सिफारिशों का सम्मान और इंप्लीमेंटेशन कर रही है.
