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झारखंड, हरियाणा में तोड़फोड़! JK में भी खेल… क्या BJP ने लोकसभा चुनावों से कोई सबक नहीं लिया

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नई दिल्ली

करीब चार महीने पहले संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। हालांकि, पार्टी केंद्र में सरकार बनाने में सफल रही। अब बीजेपी बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ने जा रही। पार्टी नेतृत्व की निगाहें आगामी विधानसभा चुनावों पर है। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में असेंबली चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में बीजेपी लगातार अपनी रणनीतिक तैयारियों में जुटी हुई है। हालांकि, इन चुनावों से पहले बीजेपी जिस तरह से विपक्षी पार्टियों के नाराज नेताओं को अपने साथ लाने की कवायद में नजर आ रही, उसे लेकर सवाल खड़े हो रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों से कोई सबक नहीं लिया? क्या बीजेपी एक बार फिर वही गलती दोहरा रही जो उसने बीते आम चुनाव में की थी?

बीजेपी का ‘तोड़-फोड़’ वाला दांव कितना सफल
ऐसा इसलिए लग रहा क्योंकि बीजेपी ने झारखंड और हरियाणा में तोड़-फोड़ शुरू कर दी है। वो विपक्षी पार्टियों के नाराज नेताओं को अपने साथ लाने की कोशिशों में जुटी नजर आ रही। ऐसी खबर है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन के लिए बीजेपी ने दरवाजे लगातार खुले रखे हैं। चर्चा है कि चंपाई सोरेन बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में हैं यही वजह है कि उन्होंने जेएमएम नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी में जाने को लेकर कुछ नहीं कहा लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व को बता दिया कि उनके पास विकल्प खुले हैं। भले ही झारखंड में चुनाव तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन सियासी पारा चढ़ा हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन बगावती तेवर में दिख रहे हैं।

झारखंड में चंपाई सोरेन ने दिखाए तेवर
यही नहीं चर्चा ये भी है कि चंपाई सोरेन के साथ जेएमएम के कई नेता और विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं। ऐसा होता है तो झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के लिए चुनाव से ठीक पहले ये किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने तो ट्वीट करके चंपाई सोरेन का एनडीए में आने को लेकर स्वागत तक कर दिया है। हालांकि, सवाल यही है कि क्या चंपाई सोरेन बीजेपी में जाएंगे? क्या बीजेपी चुनावी राज्यों में फिर तोड़-फोड़ वाली रणनीति पर चलेगी?

हरियाणा में जेजेपी के कई विधायक टूटे
हरियाणा में भी बीजेपी का प्लान कुछ ऐसा नजर आ रहा। तभी चुनाव घोषित होने के तुरंत बाद जननायक जनता पार्टी के विधायक अनूप धनाक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। टोहाना से विधायक देवेंद्र बबली, गुहला चीका से विधायक ईश्वर सिंह, शाहबाद से विधायक रामकरण काला ने भी पार्टी छोड़ दी। उनके अलावा रामनिवास सुरजाखेड़ा, जोगी राम सिहाग और राम कुमार गौतम भी जेजेपी से बगावत कर चुके हैं। इस तरह से जेजेपी में अब तीन ही विधायक बचे हैं। अनूप धनाक, दुष्यंत चौटाला के बेहद करीबी थे। उन्हें 2019 के बीजेपी जेजेपी गठबंधन सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था। हालांकि, इस साल संपन्न हुए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जेजेपी ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ दिया था। अब विधानसभा चुनाव आते ही जेजेपी में टूट शुरू हो गई है।

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी नेता बीजेपी में शामिल
लग तो ऐसा ही रहा है क्योंकि बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव ऐलान के साथ ही दूसरे दलों के नेताओं को अपनी पार्टी में एंट्री देना शुरू कर दिया है। ताजा मामला पीडीपी नेता और पूर्व मंत्री जुल्फकार अली का है, जिन्हें बीजेपी में शामिल कर लिया गया है। जुल्फकार अली ने 17 अगस्त को ही दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। तभी से ये लग रहा था कि वो महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी छोड़कर बीजेपी में आएंगे। भले ही बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों में तोड़फोड़ वाला दांव चल रही, लेकिन क्या पार्टी को इसका फायदा मिलेगा।

क्या बीजेपी ने लोकसभा चुनाव नतीजों से नहीं लिया सबक?
ये सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी ने ऐसा ही दांव चला था। विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं को अपने साथ न केवल जोड़ा बल्कि उन्हें लोकसभा का टिकट भी दिया था। हालांकि, चुनाव नतीजों से स्पष्ट हो गया कि पार्टी का वो प्लान उस तरह से सफल नहीं रहा जैसी उम्मीद की गई थी। अब एक बार फिर बीजेपी उसी राह पर चलती दिख रही है। देखना होगा कि क्या बीजेपी को इन चुनावों में कामयाबी मिलेगी?

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