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दिल्ली में जिन घरों पर चला बुलडोजर, इस बार किसका करेंगे वो समर्थन- बीजेपी या AAP?

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नई दिल्ली

लोकसभा चुनाव में इस बार राजधानी दिल्ली की सियासत भी अहम रहने वाली है। एक तरफ अगर अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और कथित शराब घोटाला एक बड़ा मुद्दा है तो वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बुलडोजर कार्रवाई भी जनता के बीच में एक मुद्दा बन गया है। पिछले 1 साल में प्रशासन का बुलडोजर कई बार चला है, कई घर जमीदोज किए गए हैं। अब इंडियन एक्सप्रेस ने उन्हीं लोगों से बात की है, उनके मुद्दे समझने की कोशिश की है, ये जानने का प्रयास रहा है कि चुनावी मौसम में इस बार उनका समर्थन किस तरफ है।

सबसे ज्यादा बुलडोजर कार्रवाई दिल्ली के तुगलकाबाद, महरौली और सुंदर नगर में देखने को मिली है। अपने घर खो चुके पीड़ित लोगों का आरोप है कि जिस समय बुलडोजर कार्रवाई की गई, किसी की तरफ से भी आपत्ति दर्ज नहीं करवाई गई, किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। जमीन पर मौजूद इन लोगों को लगता है कि एक तरफ अगर बीजेपी की तरफ से बुलडोजर कार्रवाई हुई है तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की सरकार ने भी आंखें बंद रखी। इसी वजह से इस बार इन पीड़ित लोगों का वोट किस तरफ जाएगा, ये अभी तक साफ नहीं हो पा रहा है।

तुगलकाबाद में 49 साल की रेनू रहती हैं, वे वैसे तो एक प्राइवेट एजेंसी के साथ नर्स के रूप में काम कर रही हैं, लेकिन पहले उनका ठीक-ठाक घर दिल्ली की बंगाली कॉलोनी में हुआ करता था। बुलडोजर कार्रवाई को याद करते हुए वे कहती हैं कि जिस दिन बुलडोजर हमारे घर पर चला था, कोई भी मदद करने के लिए नहीं आया, कोई हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। अब किसके लिए वोट करें, कोई हमारा साथ देने के लिए नहीं आए, लोग गुस्से में है, हम लोगों ने अपनी जरूरी चीज खो दी हैं, मैं किसी को भी अब वोट नहीं करना चाहती।

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2023 में एएसआई को दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था जितना भी अतिक्रमण है, उसे हटाया जाए। इस वजह से तुगलकाबाद फोर्ट के पास में जो मकान थे उन पर बुलडोजर चला दिया गया, 96 बीघा के करीब जमीन को साफ किया गया। इस कार्रवाई में रेनू का घर भी हमेशा के लिए खो गया। अब उसका परिवार पतली गली में एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के सिंगल रूम में रहता है। कुछ ऐसी ही कहानी 40 साल की प्रियंका की भी है जो दूसरों के घर में साफ सफाई का काम करती है। उनके पास भी पहले दो रूम और किचन वाला अच्छा घर था। लेकिन बुलडोजर एक्शन में उनका घर भी टूट गया और अब वे रेणु की तरह एक सिंगल रूम में रहने को मजबूर हैं। प्रियंका तो आरोप लगती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है,वे गरीबों को भूल चुके हैं।

अब ये कहानी तो तुगलकाबाद की थी, लेकिन महरौली में भी हालात कोई ज्यादा अच्छे नहीं है। यहां पर लोग मानते हैं जब तक एमसीडी में बीजेपी जीत रही थी, तब किसी भी घर को हाथ नहीं लगाया गया, लेकिन जैसे ही आम आदमी पार्टी की सरकार बनी, घर टूटने लगे। कुछ लोग तो ऐसा भी दावा कर रहे हैं कि अगर फिर भाजपा को वहां पर जिता दिया जाए तो शायद ही घर टूटने बंद हो जाए। बिहार के कैथल से आने वाला एक परिवार काफी विस्तार से बताता है कि आखिर क्यों वो बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों से नाराज है। परिवार कहता है हमें केजरीवाल और मोदी से कोई मतलब नहीं है। हमें तो बस ये देखना है कि हमारे लिए कौन क्या कर सकता है और वर्तमान स्थिति में आम आदमी पार्टी हमारी मांगों को पूरा करती नहीं दिख रही। उनके खुद के आदमी जेल में बैठे हैं, ये जो भी बुलडोजर वाली कार्रवाई हुई है, ये सब राजनीति से प्रेरित है, इन बिल्डिंगों को पहले बनने दिया गया, उनकी रजिस्ट्री तक की गई, अगर ऐसा नहीं होता तो शायद हम में से किसी को इतना झटका नहीं लगता।

दिल्ली के सुंदर नगर में भी हालत कुछ खास नहीं चल रहे हैं। यहां भी कई लोगों ने तो अपने पुराने मकान अब छोड़ दिए हैं, लेकिन उस वजह से अब 16000 रुपए तक रेंट महीने का चुका रहे हैं। लेकिन उनकी गलियों में बुलडोजर कार्रवाई की चर्चा आज भी होती है, कई पीड़ित लोग शाम को किसी चाय की टपरी पर इस इलाके में वापस आकर उस कार्रवाई पर चर्चा करते दिख जाते हैं। इन लोगों को एक ही उम्मीद है कि शायद सुप्रीम कोर्ट से किसी तरह की राहत मिल जाए। पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट से इन्हीं लोगों को बड़ा झटका लगा था क्योंकि साफ कहा गया था कि 2006 से पहले तक इस प्रकार के अतिक्रमण इलाके में नहीं थे।

इस इलाके में रहने वाले 44 साल के मनोहर बताते हैं कि उनकी चार बेटियां हैं और एक बेटा है। अपनी आपबीती बताते हुए वे कहते हैं कि हमारे पास ज्यादा पैसा नहीं है, मैं तो मजदूरी के जरिए रोज का थोड़ा बहुत पैसा कमाता हूं। हम सब यहां पर वोट करते हैं, लेकिन कोई भी हमारी मदद करने के लिए नहीं आया। मैं मानता हूं कि आम आदमी पार्टी ने फिर भी अच्छा काम किया है। कम से कम पानी बिजली तो फ्री कर ही दिया।

अभी एक तरफ इन लोगों की आपबीती है तो दूसरी तरफ उसी आपबीती पर राजनीतिक रोटियां भी सेकी जा रही हैं। एक तरफ अगर बीजेपी ने साउथ दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी को उतारा है, आम आदमी पार्टी ने शाही राम पहलवान को मौका दिया है। इसी तरह ईस्ट दिल्ली से आप ने कुलदीप कुमार को भाजपा के हर्ष मल्होत्रा के सामने उतार रखा है। इस समय आम आदमी पार्टी के तमाम नेता दावा करते हैं कि बीजेपी हर गरीब के घर को तोड़ना चाहती है, बीजेपी का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा जान पूछ कर आम आदमी पार्टी गरीबों तक पहुंचने नहीं दे रही।

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