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तुमसे पहले जो शख्स यहां तख्त नशीं था… राज्यसभा में कांग्रेस के सिंघवी ने खूब पढ़े शेर

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नई दिल्ली

लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई… आज जब राज्यसभा में कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली सेवा बिल के विरोध में बोलना शुरू किया तो इकबाल की चर्चित लाइन भी दोहराई। गृह मंत्री अमित शाह के राज्यसभा में बिल पेश करने के फौरन बाद कांग्रेस सांसद सिंघवी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि यह बिल असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। यह संघवाद के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। ये उनके लिए सोचने की बात है जो इस बिल का समर्थन कर रहे हैं या समर्थन करने की घोषणा कर दी है। जो आज केंद्र सरकार के साथ हैं, शायद कभी आपके साथ भी ऐसा हो सकता है। सबका नंबर आ सकता है। एक समय उन्होंने कहा कि ऐसे हालात को देखकर वो पुराना शेर याद आया। ए काफिले वालो! तुम इतना भी नहीं समझे, लूटा है तुम्हें रहजन ने, रहबर के इशारे पर।

सिंघवी ने पढ़ा बशीर बद्र का शेर
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद ने मोदी सरकार पर तंज कसने के लिए फिर शेर पढ़ा- तुमसे पहले वो जो इक शख़्स यहां तख़्त-नशीं था, उसको भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था। बशीर बद्र का जिक्र करते हुए सिंघवी ने आगे कहा, ‘शोहरत की बुलंदी भी पलभर का तमाशा है। जिस डाल पर बैठे हो, वो टूट भी सकती है।’ सिंघवी ने कहा कि दोस्तों, ये बिल एक सिविल सर्विसेज अथॉरिटी बनाता है और उसे व्यापक शक्तियां देता है सुझाव देने की हर नियुक्ति, हर स्थानांतरण के बारे में- ग्रेड ए से लेकर दानिक्स अफसर तक। कौन किसी और की सरकार में वित्त सचिव बनेगा, कौन पीडब्ल्यूडी का सचिव बनेगा। उनके बीच अदला-बदली कब और कैसे होगी, ये माननीय LG करेंगे न कि चुनी हुई सरकार।

दूसरा, जितने भी सतर्कता के अधिकार क्षेत्र और नॉन-विजिलेंस के केसेज अनुशासनहीनता के केस में… सब इस अथॉरिटी में आएंगे सुझाव के लिए और एलजी के पास निर्णय के लिए। इसका उद्देश्य खौफ पैदा करना है जिससे आप इन सभी सचिवों को कंट्रोल कर सकें। तीसरा, अथॉरिटी में तीन व्यक्ति हैं- चीफ सेक्रेट्री, प्रिंसिपल सेक्रेट्री और मुख्यमंत्री। मुख्यमंत्री को अध्यक्ष बनाया गया है। ये अजीब सा अध्यक्ष है, जो चेयरमैन है बिना चेयर के।

सिंघवी ने आगे कहा कि मैंने कभी नहीं देखा कि एक चुना हुआ चीफ एग्जिक्यूटिव दो सचिवों के नीचे आएगा। ये दो सचिव बैठकर निर्णय करेंगे और वो सीएम चुप रहेगा और केवल असहमति दर्ज करा पाएगा। यह निर्णय और सुझाव ‘सुपर सीएम’ के पास जाएगा और उसके बाद गृह मंत्री के पास जाएगा। चौथा, जितनी समितियां और संस्थाएं हैं उन सबका बजट बनाएगी दिल्ली सरकार लेकिन उसके अध्यक्ष उधर से नियुक्त होंगे। पांचवां, हर छोटी हर बड़ी चीज के लिए निर्विवाद कब्जा होगा। कांग्रेस सांसद ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री, माननीय गृह मंत्री आप उच्चतम पद पर विराजमान महानुभाव क्या अफसर क्लासेज के लिए निचले से लेकर सेक्रेट्री तक नीतियां आप ही बनाना चाहते हैं। कम से कम उसे तो सीएम के पास छोड़ दीजिए।

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