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असली ‘हरीसिंह’ बकरी चरा रहा था, नकली ने ITBP में नौकरी ले ली! जांच हुई तो अधिकारियों के उड़ गए होश

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शिवपुरी

जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भूरा गुर्जर नाम के एक युवक ने हरीसिंह आदिवासी बनकर ITBP (इंडियन-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) में नौकरी हासिल कर ली। उसने एक साल तक नौकरी भी की। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि असली हरीसिंह आदिवासी तो गांव में बकरियां चरा रहा है। भूरा गुर्जर ने हरीसिंह के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरी पाई और ST आरक्षण का फायदा उठाया। शक होने पर जांच हुई और इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

बोलने के तरीके से हुआ खुलासा
भूरा गुर्जर ने हरीसिंह आदिवासी के नाम पर नौकरी पाई। अफसरों को भूरा गुर्जर के हावभाव और बोलने के तरीके पर शक हुआ। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में पता चला कि उसने अपना पता चकरा गांव का दिया है। अधिकारी शिवपुरी कलेक्टर के पास दस्तावेज वेरिफिकेशन के लिए पहुंचे। कलेक्टर ने स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र की जांच के लिए पटवारी को गांव भेजा। पटवारी ने गांव में जाकर देखा तो असली हरीसिंह आदिवासी बकरियां चराते हुए मिला। इस तरह इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

ITBP को भेजी मामले की जानकारी
कोलारस के एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी ITBP को भेज दी है। उन्होंने यह भी बताया कि FIR भी दर्ज कराई जा रही है। भूरा गुर्जर फिलहाल ITBP की 54वीं वाहिनी में असम के सोनितपुर जिले में तैनात है।

ये निकली असली कहानी
असली हरीसिंह (27 वर्ष) ने बताया कि 9 साल पहले वह आलू खोदने के लिए आगरा गया था। वहां उसकी मुलाकात भूरा गुर्जर से हुई। भूरा गुर्जर ने उसे 10 बीघा जमीन देने का लालच दिया। उसने हरीसिंह की 8वीं कक्षा की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र ले लिए। बाद में हरीसिंह को पता चला कि भूरा गुर्जर ने उन्हीं दस्तावेजों पर अपनी फोटो लगाकर डिजिटल प्रमाण पत्र बनवा लिया है। फिर उसने ST कोटे से ITBP में भर्ती होकर नौकरी हासिल कर ली।

पूरी पीढ़ियों का नाम जोड़ा
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। भूरा गुर्जर ने न सिर्फ खुद को आदिवासी बताकर सरकारी नौकरी ली, बल्कि अपने माता-पिता, पत्नी और दादा के आधार कार्ड में भी हरीसिंह आदिवासी की पीढ़ियों के नाम दर्ज करवा लिए। जांच में यह भी पता चला कि असली और नकली हरीसिंह के आधार नंबर अलग-अलग हैं, लेकिन नाम और पता एक जैसा है। भूरा गुर्जर के माता-पिता के आधार कार्ड भी अलग-अलग नंबरों के साथ दर्ज मिले।

10 बीघा जमीन के लालच में हुआ पूरा खेल
हरीसिंह ने बताया कि भूरा गुर्जर ने उसे 10 बीघा जमीन देने का लालच दिया था। इसी लालच में उसने अपने दस्तावेज भूरा गुर्जर को दे दिए थे। उसे नहीं पता था कि भूरा गुर्जर उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरी हासिल कर लेगा। इस मामले में ITBP और पुलिस दोनों जांच कर रही हैं। पुलिस ने भूरा गुर्जर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। ITBP भी अपने स्तर पर जांच कर रही है। मामले में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।

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