रीवा
तारीख- 12 जुलाई, साल- 2022 और जगह- मध्य प्रदेश में रीवा का अतरैला इलाका। रुक-रुककर हुई रात भर की बारिश अब थम चुकी थी। उमस भरे मौसम में ज्यादातर लोग घरों के भीतर ही थे। गलियों में थोड़ी-बहुत ही चहलकदमी थी। तभी एक घर से चीखने की तेज आवाज सुनाई देती है। लोग घरों से बाहर निकलते हैं और हैरानी भरी नजरों से इधर-उधर देखते हैं। चीख की आवाज एक बार फिर सुनाई देती है। लोगों के कदम उस घर की तरफ दौड़ पड़ते हैं, जहां से आवाज सुनाई दे रही थी। घर का दरवाजा अंदर से बंदर था और चीखें अभी भी जारी थीं। ऐसा लग रहा था कि किसी के साथ बहुत बेरहमी की जा रही है। पड़ोस के कुछ लोग दरवाजा खटखटाते हैं, लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी कुंडी नहीं खुलती।
तब तक कुछ लोग पुलिस के पास फोन घुमा देते हैं। कुछ ही देर में इलाका सायरन की आवाज से गूंज उठता है। खाकी वर्दी वाले अपनी गाड़ी से उतरते हैं और दरवाजा पीटते हुए आवाज लगाते हैं। कुछ देर इंतजार करने के बाद दरवाजा तोड़ दिया जाता है। जैसे ही घर के अंदर पुलिस वालों के कदम पड़ते हैं, हर किसी की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। सामने एक महिला खून से लथपथ पड़ी थी। उसके शरीर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं था, जहां से खून ना बह रहा हो। आंगन में भी दूर-दूर तक खून के छींटे पड़े थे। माहौल में एक गहरा सन्नाटा पसर जाता है।
हाथ में हंसिया और कपड़ों पर खून के निशान
तभी पुलिस की नजर चंद कदम दूरी पर खड़ी एक दूसरी महिला पर पड़ती है। उसके हाथ में एक हंसिया था, जिससे अभी भी खून की बूंदें टपक रही थीं। सर से पांव तक उसके शरीर पर खून के निशान थे। पुलिस को समझते देर नहीं लगती कि आंगन में पड़ी महिला को इसी दूसरी औरत ने हंसिए से लहूलुहान किया है। तुरंत घायल महिला को एंबुलेंस में डालकर अस्पताल पहुंचाया जाता है, लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि वो दम तोड़ चुकी है। इधर पुलिस उस दूसरी महिला को गिरफ्तार कर लेती है। पूछताछ होती है, तो एक ऐसी खौफनाक कहानी से पर्दा उठता है, जिसे सुनकर लोगों का कलेजा कांप जाता है।
शादी के कुछ दिन बाद ही बदल गया कंचन का रूप
जिस महिला का कत्ल हुआ, उसका नाम था सरोज कौल। सरोज ने कुछ साल पहले ही अपने बेटे की शादी कंचन कौल नाम की लड़की से कराई थी। घर में सब खुश थे कि परिवार में नई बहू आई है। शुरुआत में तो सब ठीक था, लेकिन कुछ दिन बाद ही सास और बहू के बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस होने लगी। ये बहस इस कदर बढ़ी कि ऐसा कोई दिन नहीं जाता था, जब पड़ोस के लोग सास-बहू के बीच झगड़े की आवाज ना सुनते। 12 जुलाई को भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर जबरदस्त झगड़ा हुआ। उस दिन कंचन का पति किसी काम से बाहर गया हुआ था।
कातिल बहू को मिली कर्मों की सजा
झगड़े में कंचन इस हद तक भड़की कि उसने घर में पड़ा हंसिया उठाया और अपनी सास के ऊपर वार कर दिया। हंसिया लगते ही सरोज बेढाल होकर गिर पड़ी, लेकिन कंचन के हाथ नहीं कांपे। उसने एक-एक कर सरोज के शरीर पर करीब 95 वार किए। सरोज ने दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने कंचन के साथ-साथ उसके ससुर बाल्मीकि कौल को भी आरोपी बनाया था, लेकिन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। वहीं, हत्या के इस मामले को क्रूर करार देते हुए कोर्ट ने हत्यारी कंचन कौल को सजा-ए-मौत सुनाई।
