5.9 C
London
Friday, March 13, 2026
Homeराज्यऑस्ट्रेलियाई नागरिक बनने का चस्का पड़ा भारी, पासपोर्ट पर फंसे पेच से...

ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बनने का चस्का पड़ा भारी, पासपोर्ट पर फंसे पेच से अकेला छूट गया बेटा

Published on

बेंगलुरु

एक दंपती के आस्ट्रेलियाई नागरिकता हासिल करने का खामियाजा उनके नाबालिग बेटे को भुगतना पड़ रहा है। जयनगर के दंपती के बेटे के पासपोर्ट पर यह कहते हुए रोक लगा दी गई कि उसके माता-पिता दोनों अब भारतीय नागरिक नहीं हैं। नागरिकता अधिनियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहता है, तो उस व्यक्ति का प्रत्येक अवयस्क बच्चा भारत का नागरिक नहीं रहेगा। वहीं अब पासपोर्ट के चक्कर में उलझे माता-पिता ने इस मामले के लिए अपील की है। जो कि फिलहाल गृह मंत्रालय (एमएचए) के विचाराधीन है। हालांकि मामले में माता पिता दोनों ही इस नियम से अनजान थे कि ऐसा करने पर उन्हें यह तकलीफ झेलनी पड़ेगी।

बेटे को दादी के पास छोड़ गए थे दंपती
बेंगलुरु के रहने वाले दंपति आईटी पेशेवर हैं। ये लोग साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। बेंगलुरू के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पुरुष और महिला अपने नाबालिग बेटे को जयनगर में उसकी दादी के पास छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में बस गए थे। कुछ साल पहले, उन्होंने अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बन गए। जबकि उनका नाबालिग लड़का, जो कि अब 15 साल का है। उसके पास भारतीय पासपोर्ट था। कोविड की स्थिति कम होने और भारत द्वारा अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध हटाने के बाद दंपती 2022 में बेंगलुरु लौट आए और अपने बेटे को छुट्टी मनाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ले जाने की योजना बनाई। दंपती ने देखा कि उनके बेटे का भारतीय पासपोर्ट की वैधता खत्म हो चुकी है। इसके नवीनीकरण के लिए दंपती ने जब आवेदन करने की कोशिश की तो हकीकत बेपरदा हो गई।

माता-पिता में एक की नागरिकता होना जरूरी
पासपोर्ट जारी करने या फिर नवीनीकरण करने के लिए कम से कम माता-पिता में से एक की नागरिकता होना जरूरी है। इसी के आधार पर नाबालिग के लिए एक भारतीय पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किया जाता है। लेकिन यहां तो नियम से अनजान माता पिता दोनों ने ही भारतीय नागरिकता त्याग दी थी। मामले से संबंधित एक अधिकारी ने इसको लेकर जानकारी दी। नागरिक अधिनियम 1955 की धारा 8 में कहा गया है ‘जहां एक व्यक्ति उप-धारा (I) के तहत भारत का नागरिक नहीं रहता है। उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिग बच्चा भारत देश का नागरिक नहीं रहेगा। बशर्ते कि ऐसा कोई बच्चा बालिग होने के बाद एक साल के भीतर यह घोषणा कर सकता है कि वह फिर से भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहता है। उसके बाद वह फिर से भारत का नागरिक बन जाएगा।

Latest articles

समय पर खर्च करें केंद्रीय निधि, ताकि विकास की गति बनी रहे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के विकास में केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं...

ईरान जंग का असर: देश में रसोई गैस का हाहाकार, ब्लैक में 1800 तक पहुंचा घरेलू सिलेंडर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत...

शादी के लिए पुजारी का अपहरण कर वसूले 50 हजार, मंडप से गिरफ्तार हुआ गैंग सरगना ‘भूरा हड्डी’

भोपाल जधानी की कोहेफिजा पुलिस ने पुजारी के अपहरण और अवैध वसूली के मामले में...

एमपी में बेटियां आजीवन पूजी जाती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नारी शक्ति के सम्मान और उनके...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी होली व धुलंडी की शुभकामनाएं

जयपुर भजनलाल शर्मा ने होली एवं धुलंडी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई...

मप्र में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, 90 दिन में एफआईआर और 10 साल तक की सजा का प्रस्ताव

भोपाल मप्र में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए राज्य...