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Tuesday, June 23, 2026
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PM के नाम पर वोट, फिर भी दी चोट… नीतीश के करीबी ने ही जमकर बोला हमला

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पटना

नीतीश कुमार के साथ 10 सालों तक डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी को उनके करीबी लोगों में माना जाता था। सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी के दौर में जेडीयू और भाजपा गठबंधन की सरकार स्थिर थी। इसके लिए नीतीश और सुशील मोदी की केमिस्ट्री को ही क्रेडिट दिया जाता रहा है। लेकिन अब भाजपा ने उन्हीं सुशील मोदी को नीतीश कुमार पर हमलों के लिए आगे किया है। बुधवार को नीतीश कुमार पर तीखे हमले बोलते हुए सुशील मोदी ने कहा कि उन्होंने धोखा दिया है। यही नहीं उन्होंने नीतीश कुमार की ताकत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आपके नाम पर वोट मिला होता तो फिर 2020 में 43 सीटें ही नहीं जीतते।

नीतीश के फैसले से गिरी नहीं लड़खड़ाई है भाजपा, ‘आपदा’ में बने 4 ‘अवसर’
इसके अलावा आरसीपी सिंह को लेकर विवाद की बातों को भी उन्होंने गलत करार दिया। सुशील मोदी ने कहा कि यह सफेद झूठ है कि बिना पूछे ही आरसीपी सिंह को मंत्री बना दिया गया। अमित शाह ने इसके लिए फोन किया था और एक नेता का नाम मांगा था। नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह का नाम देते हुए कहा था कि ललन सिंह नाराज होंगे, उनका भी ख्याल रखना होगा। लेकिन खुद ही आरसीपी का नाम भी दिया। आपको गठबंधन तोड़ना है तो तोड़ दे, लेकिन इस तरह के झूठ का प्रचार नहीं होना चाहिए। आप तो इतने ताकतवर थे कि जब चाहते, आरसीपी सिंह को हटवा देते।

पूरी जेडीयू भी आ जाती तो न बनती सरकार, तोड़ने की बात ही गलत
उन्होंने कहा कि जेडीयू को तोड़ने की बातें हो रही हैं, यह भी गलत बात है। शिवसेना का उदाहरण दिया जा रहा है, लेकिन वह हमारे साथ नहीं थी। हमने किसी सहयोगी दल को तोड़ा नहीं है। हमने आज तक किसी को धोखा नहीं दिया। हमने 5 बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। आपने दोनों बार एक झटके में संबंध तोड़ दिया। सुशील मोदी ने कहा कि यदि हम पूरी जेडीयू को ही अपने में ले आते तो भी सरकार नहीं बन पाती। ऐसे में जेडीयू को तोड़ने की बात गलत है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की ओर से जनता को धोखा दिया गया है।

पीएम मोदी ने लगा दी थी चुनाव प्रचार में पूरी जान, तब मिला था बहुमत
सुशील मोदी ने कहा कि मैंने खुद 2005 में नीतीश कुमार के नाम का ऐलान मुख्यमंत्री के तौर पर किया था। आपकी पार्टी के विरोध के बाद भी ऐसा किया गया, लेकिन आपने धोखा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जनता के साथ ही विश्वासघात नहीं है। 2020 में नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मिला था। यदि आपके नाम पर वोट मिलता तो 43 सीट ही आपको नहीं मिलती। जब हमें लगा कि स्थिति कमजोर है तो फिर नरेंद्र मोदी ने प्रचार में पूरी जान लगा दी थी। यदि आपके नाम पर भी वोट मिलता तो हम 175 तक सीटें जीत कर सत्ता में आते।

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