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राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर विनय कटियार ने क्या दी सफाई, किसे दिया मंदिर निर्माण का श्रेय?

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नई दिल्ली

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन शुरू करने का श्रेय लेने वाले भाजपा नेता और बजरंग दल संस्थापक विनय कटियार ने हाल में इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया है। कटियार ने इंटरव्यू में राम मंदिर के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर बात की है।

90 के दशक में विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने राम जन्मभूमि आंदोलन और बजरंग दल पर समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया था। कटियार से जब इन आरोपों पर उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि ऐसे आरोप लगाने वाले खुद नफरत फैला रहे थे। उन्हें आंदोलन और बजरंग दल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ख़ैर, हमने राम मंदिर के लिए काम किया और काम पूरा हुआ। विजय हो गई।”

इसके बाद कटियार ने आंदोलन में लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी रथ यात्रा से आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई। उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। उनकी यात्रा विभिन्न राज्यों से होकर गुजरी जहां अलग-अलग सरकारें शासन कर रही थीं। उनकी यात्रा ने जन जागरण किया। उनका बहुत भारी योगदान था।”

द इंडियन एक्सप्रेस ने विनय कटियार को याद दिलाया कि आंदोलन के कारण दंगे हुए और कारसेवकों के अलावा भी कई लोग मारे गए। कटियार से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि विवाद को सुलझाने का कोई शांतिपूर्ण तरीका हो सकता था?

जवाब में कटियार ने कहा, “हनुमानगढ़ी चौराहे पर हुई फायरिंग में चार कारसेवकों की मौत हो गई। कोई अन्य व्यक्ति नहीं मारा गया। हमारा आंदोलन अहिंसक था। मुलायम सिंह यादव सरकार ने हिंसा भड़काई और फैलाई। उन्होंने गोली चलाने का आदेश दिया। जब सरकार बदली तो मामला शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। हमने इस मुद्दे पर सरकार के साथ कई दौर की बातचीत की। हमने कभी मुस्लिम पक्ष से बात नहीं की। यह आंदोलन ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का एकमात्र रास्ता था।”

1990 और 2024 की अयोध्या में क्या अंतर हैं?
कटियार से पूछा गया कि अयोध्या के निवासी होने के नाते उन्हें 1990 और 2024 की अयोध्या में क्या अंतर देखने को मिलता है? जवाब में कटियार ने बताया, “अयोध्या का विकास हो रहा है, सड़कें चौड़ी की जा रही हैं। विशाल द्वार बनाये गये हैं। इस नई अयोध्या को देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। श्रद्धालुओं का स्वागत किया जा रहा है। घाटों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। एयरपोर्ट को भव्य रूप दिया गया है। हम अयोध्या में धार्मिक मूल्यों के अनुरूप जो कुछ भी चाहते थे, वह सब वहां विकसित किया जा रहा है।”

राम मंदिर का श्रेय किसे देंगे?
विनय कटियार का मानना है कि राम मंदिर का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, “जब ऐसे आंदोलन होते हैं तो इसका श्रेय पूरे संगठन को जाता है। आंदोलन में आरएसएस की बड़ी भूमिका थी। उसने एक संगठन के रूप में नेतृत्व किया, लेकिन इसके अन्य सहयोगी संगठनों जैसे वीएचपी ने राम मंदिर के लिए आगे आकर काम किया और वीएचपी इसी तरह का काम जारी रखे हुए है। तो इसका श्रेय संघ के स्वयंसेवकों को जाता है।”

अयोध्या के भव्य समारोहों से भाजपा को लोकसभा चुनाव में मदद मिलने के सवाल पर कटियार ने कहा कि इससे भाजपा को कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि राम मंदिर राजनीतिक नहीं है।काशी और मथुरा के सावल पर कटियार ने कहा, “पहले राम मंदिर बनने दीजिए, मथुरा और काशी के मुद्दों पर उसके बाद विचार किया जाएगा। लेकिन उनको भी छोड़ेंगे नहीं।”

6 दिसंबर, 1992 को कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं और साधुओं की मौजूदगी में कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढाह दिया था। हालांकि विनय कटियार यह मानते ही नहीं हैं कि बाबरी मस्जिद नाम की कोई इमारत थी। द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बजरंग दल संस्थापक ने कहा, “…बाबर ने कुछ भी नहीं बनाया। उसने हमारा ही पुराना मंदिर हड़प लिया। वह ढांचा जर्जर हो गया था और राम मंदिर बनाने के लिए उसे हटा दिया गया था।”

बता दें कि विनय कटियार ‘बाबरी विध्वंस’ मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह समेत करीब 48 लोगों के साथ नामित आरोपी थें। 30 सितंबर, 2020 को फैसला सुनाए जाने तक 32 आरोपी ही बचे थे, जिन्हें सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था।

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