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नेपाल को कौन सा पाठ पढ़ाने दौड़े आ रहे चीनी नेता, भारत ने चला ‘ब्रह्मास्त्र’, एशिया में बढ़ेगी टेंशन!

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काठमांडू

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में चीन ने अपनी सरगर्मी बहुत तेज कर दी है। नेपाल के अंदर भारत और अमेर‍िका के बढ़ते प्रभाव से घबराए चीन ने एक के बाद एक नेताओं की झड़ी लगा दी है। यही नहीं चीनी सेना के तिब्‍बत के कमांडर भी इन दिनों नेपाल के दौरे पर हैं। नेपाल और चीन की सेनाएं अब साल 2019 के बाद पहली बार संयुक्‍त अभ्‍यास करने जा रही हैं। चीन की इस चाल से निपटने के लिए भारत ने भी अब अपना ब्रह्मास्‍त्र चला दिया है। चीन की वैश्विक मोर्चों पर जोरदार धुलाई करने वाले भारत के व‍िदेश मंत्री एस जयशंकर अब जी-20 की बैठक के बाद काठमांडू के दौरे पर जा रहे हैं।

यही नहीं दो साल के बाद अब एक बार फिर से भारत और नेपाल के बीच संयुक्‍त आयोग की बैठक होने पर सहमति बन गई है। काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक को मध्‍य अक्‍टूबर महीने में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए भारत और नेपाल के बीच तैयारी शुरू हो गई है। इससे पहले यह बैठक साल 2021 में भारत में हुई थी, अब इसको नेपाल में आयोजित किया जाएगा। डेट फाइनल होने के बाद नेपाल के विदेश मंत्री इसका न्‍योता भारत के विदेश मंत्री को भेज देंगे।

नेपाल को बीआरआई के जाल में फंसाना चाहता है चीन
नेपाल-भारत संयुक्‍त आयोग एक शीर्ष निकाय है जिसकी स्‍थापना साल 1991 में की गई थी। इस बैठक में भारत और नेपाल के बीच पूरे द्विपक्षीय रिश्‍ते पर बातचीत होती है। नेपाल सरकार ने बताया है कि भारत ने उन्‍हें सूचना दी है कि विदेश मंत्री जयशंकर जी-20 बैठक के बाद काठमांडू के दौरे पर जाएंगे। इन बैठकों से पहले अब दोनों देश विभिन्‍न समितियों की बैठक करने जा रहे हैं जो ऊर्जा, जल संसाधन और बिजली व्‍यापार पर हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री एनपी सौद ने बताया कि आयोग की बैठक के लिए भारत के सा‍थ डेट पर बातचीत जारी है। उन्‍होंने कहा कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों की पूरी समीक्षा होगी। इससे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड 31 मई से 2 जून के बीच भारत के दौरे पर आए थे। बता दें कि कोरोना काल के बाद अचानक से चीन के नेताओं ने नेपाल का दौरा काफी बढ़ा दिया है। चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के साथ कई मंत्री भी पिछले कुछ दिनों में नेपाल के दौरे पर आ चुके हैं। चीन अपने बीआरआई प्रोग्राम को नेपाल के अंदर शुरू कराना चाहता है। वहीं अमेरिका भी लगातार अपने मंत्री नेपाल भेज रहा है। चीन के विरोध के बाद भी नेपाल में अमेरिका का एमसीसी प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है।

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