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Wednesday, April 1, 2026
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अपने संतरों को… ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस में कह दी ऐसी बात कि हो गया बवाल, मेट्रो ने हटाया

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नई दिल्ली

अक्टूबर दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने का महीना है। भारत में भी हर स्तर से महिलाओं को सजग करने का प्रयास होता है। इसी प्रयास में क्रिकेट युवराज सिंह की संस्था यूवीकैन ने एक विज्ञापन तैयार किया जिसे दिल्ली मेट्रो में चिपकाया गया था। लेकिन इस विज्ञापन में जागरूकता संदेश का जो तरीका अपनाया गया, उस पर आपत्तियां आने लगीं और फिर मेट्रो को यह विज्ञापन हटाना पड़ा। लोगों का कहना है कि इरादा सही हो सकता है, लेकिन तरीका बिल्कुल गलत। एक यूजर ने मेट्रो में लगे पोस्टर की तस्वीर के साथ लिखा, ‘ये पोस्टर दिल्ली मेट्रो में लगे हैं जो ब्रेस्ट कैंसर से जागरूक करने के लिए लगाए गए हैं। इसमें महिलाओं के स्तनों को संतरा बताया गया है। ये कितनी भद्दी और पिछड़ी सोच है कि आप ब्रेस्ट कैंसर की जागरूकता के लिए पोस्टर बना रहे हैं और ब्रेस्ट नहीं लिख पा रहे हैं?’

स्तन को संतरा बताने पर विवाद
जी हां, मूल विवाद स्तन को संतरा बताए जाने का है। पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है, ‘आप अपने संतरों को कितनी भलीभांति जानती हैं?’ दूसरे पोस्टर में लिखा है, ‘अपने संतरों को महीने में एक बार ठीक से परखें।’ हर पोस्टर में इसी तरह के अलग-अलग सवालों के साथ यह संदेश दिया गया है कि शुरुआत में ही पता चल जाए तो जिंदगी बच सकती है। सबसे आखिर में हैशटैग के साथ यह बताया गया है कि यह ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता का अभियान है।

डॉक्टर ने मां के निधन का कहानी बता जताया दुख
लेकिन स्तन को संतरा बताने से लोगों की भावनाएं आहत हो गईं। यूरोलॉजिस्ट डॉ. जैसन फिलिप लिखते हैं, ‘दिल्ली मेट्रो में लगे इस विज्ञापन से मुझे समस्या है। मेरी प्यारी माता जी का स्तन कैंसर से ही निधन हुआ जो स्टेज 4 पर पहुंच गया था। विडंबना देखिए कि उनका बेटा मैं खुद ब्रेस्ट सर्जन हूं लेकिन उन्होंने लिहाज में मुझे ही ये बात नहीं बताई। जब बिल्कुल छोटी गांठ थी तभी बता देतीं तो संभवतः इलाज हो जाता।’ वो आगे लिखते हैं, ‘इसलिए कृपया ब्रेस्ट कैंसर को सेक्सुअलाइज मत कीजिए जो दुनियाभर में सबसे कॉमन कैंसर है। मैंने स्तन कैंसर की शुरुआती पकड़ और इलाज की व्यवस्था में बहुत पैसे निवेश किए हैं।’ फिर वो अपील करते हैं कि महिलाओं को लज्जा त्यागकर तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए ताकि पीड़ा और मौत से बचा जा सके। अंत में उन्होंने दिल्ली मेट्रो में लगे विज्ञापन पर भी कहा कि आखिर स्तन को स्तन कहने या लिखने में क्या दिक्कत है?

गुस्से में लाल होकर खूब लगाई फटकार
सुजाता पाण्डेय लिखती हैं, ‘डीएमआरसी को शर्म आनी चाहिए। आखिर किस बदमिजाज ने यह विज्ञापन डिजाइन किया और मेट्रो के किस अधिकारी ने इसे लगाने की मंजूरी दे दी?’ सुजाता कहती हैं, ‘ब्रेस्ट कैंसर ने 2022 में दुनियाभर में 6 लाख, 70 हजार महिलाओं की जान ले ली है।’ वो आगे कहती हैं कि महिलाओं के स्तन संतरे नहीं हैं। उनका सवाल है कि क्या इस तरह से जानलेवा स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी?

डीएमआरसी ने वापस लिया विज्ञापन
इन प्रतिक्रियाओं के बाद डीएमआरसी ने विज्ञापन को हटा दिया है। डीएमआरसी ने अपने बयान में कहा, ‘डीएमआरसी के अधिकारियों ने विज्ञापन को अनुचित पाया है और तुरंत संज्ञान लिया है। यह विज्ञापन सिर्फ एक ट्रेन में लगा था और उसे बुधवार 23 अक्टूबर को साम 7.45 बजे के करीब हटा लिया गया। डीएमआरसी हमेशा लोगों की भावनाओं का ख्याल रखता है और ऐसे किसी प्रचार का समर्थ नहीं करता जो सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापनों से जुड़े दिशानिर्देशों की अवहेलना करता हो। दिल्ली मेट्रो पूरा यत्न करेगी कि उससे जुड़े किसी भी स्थल पर इस तरह का अनुचित विज्ञापन नहीं लगाया जाए।’

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